जशपुर मूनादी ।। अभी अभी कुनकुरी में हुए एक सड़क हादसे का वीडियो अब सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। लेकिन इस वीडियो में सिर्फ एक्सीडेंट नहीं दिख रहा, बल्कि एक ऐसी तस्वीर भी दिखाई दे रही है जो कई सवाल खड़े कर रही है।
कुनकुरी जनपद कार्यालय के सामने पल्सर और स्कूटी की जोरदार टक्कर हुई। हादसे में लोग घायल हुए, दर्द से कराह रहे थे और उन्हें तत्काल इलाज की जरूरत थी।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर घायलों को अस्पताल कैसे पहुंचाया गया?
वीडियो में दिखाई दे रहा है कि घायल लोगों को किसी एम्बुलेंस में नहीं, बल्कि एक खुले वाहन के डाले में लिटाकर अस्पताल ले जाया जा रहा है। ऊपर से चिलचिलाती धूप, नीचे लोहे का डाला और बीच में दर्द से तड़पते घायल।
अब यह वीडियो सोशल मीडिया में वायरल है। लोग इसे "डाला एम्बुलेंस सेवा" बताकर तंज कस रहे हैं। कोई व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है तो कोई स्वास्थ्य तंत्र की पोल खुलने की बात कह रहा है।
सोचिए, अगर घायलों की हालत और गंभीर होती तो क्या खुले डाले में ले जाना सुरक्षित माना जाता? क्या व्यवस्था इतनी सुस्त है कि लोगों को मजबूरी में डाले को ही एम्बुलेंस बनाना पड़ रहा है?
जब सड़क पर घायल पड़े लोगों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस की जगह डाले का सहारा लेना पड़े, तो सवाल उठना लाजिमी है।
यह वीडियो केवल एक हादसे का वीडियो नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था का आईना भी है, जहां कई बार जरूरत के वक्त एम्बुलेंस नहीं, बल्कि जुगाड़ सबसे पहले पहुंचता है।
फिलहाल "डाला एम्बुलेंस" का यह वीडियो सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन हंसी-मजाक के पीछे छिपा सवाल बेहद गंभीर है—क्या हमारे स्वास्थ्य सिस्टम की रफ्तार एम्बुलेंस से भी धीमी हो गई है?