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September 28, 2025



Munaadi Exclusive रायगढ़ में भी वोट चोरी या सीनाजोरी, पता से लेकर पिता के नाम तक लापता, किसी के 11 बच्चे तो कहीं एक छत के नीचे............ पढ़िए बड़ा खुलासा

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सत्ता के चालों की मुनादी।। पूरे देश भर में वोट चोरी की बात की जा रही है जो मुद्दा राहुल गांधी ने कर्नाटक के महादेवपुरा से उठाया है अब तमाम राज्यों में उसकी पुनरावृति देखने को मिल रही है। कर्नाटक के बाद महाराष्ट्र और अब छत्तीसगढ़ में भी मतदाता सूची में तमाम गड़बड़ियां सामने आई है। इस मामले पर स्थानीय निर्वाचन अधिकारी भी फिलहाल जवाब नहीं दे रहे हैं और आने वाले दिनों में सुधार का आश्वासन दे रहे हैं। 


मामला रायगढ़ जिले के नगर निगम क्षेत्र के मतदाता सूची से जुड़ा है जहां कुछ वार्ड के मतदाता सूचियों के अध्ययन के बाद उसमें कई खामियां सामने आई है। मुनादी ने खुद इस मतदाता सूचियों की छानबीन की और पाया कि इनमें काफी गड़बड़ी है। मकान संख्या 0 वाली गड़बड़ी को हम यदि शामिल न भी करें तो भी, यहां के मतदाता सूची के काफी नाम संदेहों को जन्म देने वाली है। जैसे पिता की जगह रिश्तेदार का नाम होना, मकान संख्या की जगह MO लिखा जाना, मतदाता सूची में फोटो का न होना जबकि उनका एपिक नंबर मतदाता सूची में दर्ज है। पिता और पुत्र के उम्र में बहुत अंतर। कहीं पिता की उम्र कम है तो कहीं पिता मात्र 7 साल का ही बड़ा है इत्यादि।

एक पार्षद के कितने बच्चे ?  

रायगढ़ शहर का एक वार्ड क्रमांक 42 है जहां के निर्दलीय पार्षद हैं उसतराम भट्ट, हालांकि उनका नाम कहीं भट्ट है तो कहीं भाट। उनकी जाति को लेकर भी विवाद है दरअसल उन्होंने पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित वार्ड से चुनाव लड़ा लेकिन उनके मुख्य प्रतिद्वंदी भाजपा के रामाधार उर्फ छोटू साहू ने उनपर सवाल उठते हुए कहा कि उसतराम भट्ट अनुसूचित जाति से हैं और वे उस वार्ड से चुनाव के पात्रता नहीं रखते हैं रामाधार साहू उसी वार्ड से भाजपा के प्रत्याशी और उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे हैं। हालांकि चुनाव के कुछ दिनों बाद भट्ट ने भाजपा ज्वाइन कर लिया और इस विवाद का पटाक्षेप हो गया लेकिन मतदाता सूची में छपा उनका नाम और उनसे जुड़े नाम अभी भी विवादों के कारण है। जब मुनादी ने वार्ड क्रमांक 42 के मतदाता सूची की छानबीन की तो पाया कि वहां 11 लोगों के पिता, पति, रिश्तेदार के नाम के आगे उनका नाम लिखा हुआ है। एक व्यक्ति जिनके पिता का नाम उसतराम भट्ट बताया गया है  उनकी उम्र 70 साल बताई गई है जबकि सतराम भट्ट की उम्र मात्र 45 वर्ष ही है। यही नहीं मुस्लिम जमात के व्यक्तियों के नाम के आगे पिता और रिश्तेदार के बतौर भी उनका नाम मतदाता सूची में अंकित है। सच्चाई तो यह है कि न तो उसतराम भट्ट के कोई मुस्लिम रिश्तेदार हैं ही उनकी संतान ने मुस्लिम धर्म अपनाया है। यही नहीं आदिवासी वोटर्स के भी वे पिता और रिश्तेदार के नाम से अपना नाम अंकित कराया हुआ है। ऐसे में यह मामला फर्जी वोटर का है या मात्र मतदाता सूची में मानवीय त्रुटि का इसका पता तभी चल पाएगा जब सरकारी एजेंसी इसकी जांच करेगी। 


उसतराम का पक्ष 

इस मसले पर मुनादी ने उसत राम भट्ट से बात की, उन्होंने मुनादी की बताया कि उन्होंने अपनी तरफ से 13 नाम मतदाता सूची में जुड़वाए थे। ऐसे में जो गड़बड़ी दिख रही है उसके लिए BLO जिम्मेदार है। मैने नाम जुड़वाए के लिए पर्याप्त दस्तावेज BLO को मुहैया करवाए थे। उन्होंने यह भी माना कि उनके वार्ड के बूथ संख्या 89 के 85 नाम काट दिए गए थे, जिसकी शिकायत भी उन्होंने की थी लेकिन उसपर सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी दावा किया कि जो नाम उन्होंने जुड़वाए हैं वे फर्जी नहीं हैं लेकिन मतदाता सूची में पिता के नाम में हेरफेर हो जाने के कारण ऐसा प्रतीत हो रहा है। 


मतदाता सूची में पिता का नाम ???? 

जब मुनादी ने वार्ड क्रमांक 27 के मतदाता सूची को देखा तो वहां भी कई अनियमितता वहां के मतदाता सूची में दिखाई दी। कई वोटर्स के फोटो मतदाता सूची में नहीं हैं जबकि उनका एपिक नंबर उनके मतदाता सूची में अंकित हैं। यही नहीं उनके पिता के नाम के आगे ???????? लिखा हुआ है। इसके अलावा यहां पिता और संतानों की जाति भी अलग अलग बताई गई है। उनकी जाति उनके सरनेम से स्पष्ट हो रहा है। वोटर्स का सरनेम साहू है तो उसके पिता का सरनेम पटेल लिखा हुआ है। यह एक मात्र उदाहरण है। यही नहीं एक मकान संख्या में 23 लोगों के नाम दर्ज हैं और सभी परिवार अलग अलग समुदाय के बताए गए हैं। एक घर में इतने सारे परिवार का नाम दर्ज होना भी मतदाता को संदेह के दायरे में लाता है।  यही हाल लगभग वार्ड क्रमांक 26 का भी जहां पिता के नाम के साथ, मकान नंबर के साथ कई त्रुटियां सामने आई है। 


पूरे मोहल्ले का नाम गायब हुआ  

वार्ड क्रमांक 38 में तो तमाम त्रुटियों के अलावा पूरा एक मोहल्ले के मतदाताओं के नाम हो गायब कर दिए गए। इस वार्ड के पूर्व पार्षद मुरारी भट्ट ने मुनादी को विधानसभा चुनाव और नगर निगम चुनाव के मतदाता सूची को उपलब्ध करते हुए बताया कि उनके वार्ड के कल्याण कॉलोनी के 70 से ज्यादा नाम काट दिए गए। विधान सभा चुनाव के दौरान उनके नाम मतदाता सूची में दर्ज थे लेकिन नगर निगम चुनाव के समय उस कॉलोनी से मात्र 8 मतदाताओं के नाम ही वोटर लिस्ट में आया बाकी के करीब और 70 नाम गायब हो गया। विधानसभा चुनाव के मतदाता सूची और नगर निगम चुनाव के मतदाता सूची की तुलना करने पर यह बात स्पष्ट भी हुई। यहां के पूर्व पार्षद मुरारी भट्ट का कहना है कि ये लोग कांग्रेस समर्थक थे इसलिए इनका नाम ही मतदाता सूची से हटा दिया गया। वे BLO से गुहार लगाते रहे लेकिन उनकी आपत्तियों पर ध्यान ही नहीं दिया गया। इसके कारण एक मोहल्ला ही मताधिकार से वंचित हो गया। यही आरोप विधानसभा के बूथ क्रमांक 89 से भी लगाए गए हैं। स्थानीय लोगों ने अपना नाम काटे जाने के आरोप लगाए उनकी संख्या 85 बताई गई है हालांकि यह संख्या सही है या नहीं यह भी जांच से ही कन्फर्म हो सकती है। यहां के पार्षद उसतराम भट्ट ने माना है कि इस मोहल्ले के 85 लोगों का नाम जाता गया लेकिन कैसे कटा उन्हें नहीं मालूम। 


मतदाता सूची से नाम काटने का नियम 

वैसे मतदाता सूची से नाम हटवाना भी एक जटिल प्रक्रिया है। अपना नाम कटवाने के लिए अमूमन व्यक्ति को खुद ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन देना पड़ता है, कुछ मामलों में BLO के रिपोर्ट के बाद भी नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है यदि BLO यह रिपोर्ट करता है कि बार बार जाने के बाद भी मतदाता अपने स्थान पर नहीं मिल रहा है, इसके बाद उसे वहां के लोगों के सामने पंचनामा बनाकर रिपोर्ट बनाई जाती है इसके बाद भी नाम डिलीट किया जा सकता है लेकिन बल्क में इस तरह से एक मोहल्ला या कई लोगों का नाम डिलीट किया जाना संदेहास्पद माना जा रहा है और इसे वोट चोरी से जोड़कर देखा जा रहा है। 


एक ही मकान संख्या में कई लोग 

बूथ क्रमांक 1 के मकान नंबर 157 में 19 लोगों का नाम दर्ज है, वहीं वार्ड क्रमांक 26 में एक ही मकान नंबर 28 में 13 से ज्यादा नाम हैं और उनके सरनेम भी अलग अलग हैं। उसी तरह बूथ क्रमांक 4 के एक ही मकान में 3 अलग अलग धर्म के परिवार का नाम दर्ज है। हालांकि यह देखने में सामान्य लगता है या यह लग सकता है कि एक मकान में किराएदार रहते होंगे लेकिन नियमतः जब एक मकान में भिन्न भिन्न सरनेम के लोग रहते हों तो मकान क्रमांक में विभिन्न खंड बना दिया जाता है जैसे 28/1 28/2 इत्यादि लेकिन इन मकानों में न केवल विभिन्न सरनेम के लोग हैं बल्कि इनकी संख्या भी कहीं 13, कहीं 18 कहीं 19 है। नियमतः एक ही परिवार यानि एक सरनेम वाले नाम के लोग एक समान नंबर के घर में तो रह सकते हैं लेकिन यदि उनका सरनेम चेंज है तो मकान संख्या का अलग अलग खंड बनाकर लिखना पड़ता है। जैसे 28 नंबर मकान में यदि अलग अलग सरनेम के परिवार हैं तो वहां प्रत्येक परिवार के मकान संख्या के आगे 28/1, 28/2 ऐसे लिखा जाएगा। 


SIR इस समस्या का हल है ?  

प्रदेश में अब SIR यानि विशेष गहन (मतदाता) पुनरीक्षण की प्रकिया की शुरुआत होना है और उसकी तैयारी जोर शोर से चल रही है। 2003 और 2025 के मतदाता सूचियों का मिलान किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची में इस तरह की कमियां खत्म हो जाएगी। हालांकि इस प्रक्रिया को लेकर ही कई सवाल खड़े हुए हैं, सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप कर आधार कार्ड को इनके पहचान पत्र की सूची में शामिल कराया है, अन्यथा जिन 11 दस्तावेजों की मांग केंद्रीय चुनाव आयोग ने की थी उसे देना आम आदमी के लिए मुश्किल हो रहा था। अब सवाल उठता है कि इस तरह के समस्या का समाधान क्या SIR है तो जवाब यह है कि हो भी सकता है लेकिन इस प्रक्रिया के भी साइड इफेक्ट हमें बिहार में देखने को मिले हैं जहां 65 लाख लोगों के नाम कट गए , बवाल हुआ, कई अनियमितता दिखी लेकिन फिर भी इसका सकारात्मक इंपैक्ट भी है और मतदाता सूची के कुछ गड़बड़ियों पर रोक भी लग सकती है।


जिला उप निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा  

इस संबंध में जब मुनादी ने जिला उप निर्वाचन अधिकारी डॉ प्रियंका वर्मा से बात की और इसके बारे उनका पक्ष जानना चाहा तो उन्होंने इसका आधिकारिक जवाब देने से मना कर दिया। उनका कहना था कि मुझे ज्वाइन किए मात्र 1 माह हो रहा है इसलिए न तो मेरे पास मतदाता सूची में गड़बड़ी की मुझे जानकारी है न जो सत्रह की कोई शिकायत कभी मेरे पास आई लिहाजा इस विषय पर वे कोई जवाब नहीं दे सकती हैं। संबंधित दस्तावेज मुनादी के पास उपलब्ध है जिसके आधार पर पूरी स्टोरी की गई हैं।


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