आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन की लड़ाई में खामोश क्यों हैं सांसद राधेश्याम राठिया? — दीपक मंडल, आदिवासी हितों पर मौन और उद्योगपतियों के पक्ष में सहमति देने का लगाया आरोप

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May 24, 2026



आदिवासी समाज के जल, जंगल, जमीन की लड़ाई में खामोश क्यों हैं सांसद राधेश्याम राठिया? — दीपक मंडल, आदिवासी हितों पर मौन और उद्योगपतियों के पक्ष में सहमति देने का लगाया आरोप

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रायगढ़ मुनादी।। जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के संगठन प्रभारी महामंत्री  दीपक मंडल ने रायगढ़ सांसद राधेश्याम राठिया पर आदिवासी हितों की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि सांसद स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं, लेकिन आज जब रायगढ़ जिले के आदिवासी जल, जंगल और जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, तब सांसद की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।

महामंत्री दीपक मंडल ने कहा कि तमनार, गारे-पलमा और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में लगातार उद्योगों और कोयला परियोजनाओं का विस्तार हो रहा है। बड़े पैमाने पर जंगल काटे जा रहे हैं, कृषि भूमि अधिग्रहित की जा रही है और हजारों आदिवासी परिवार विस्थापन की आशंका में जी रहे हैं। इसके बावजूद सांसद राधेश्याम राठिया ने कभी प्रभावित ग्रामीणों के पक्ष में खुलकर आवाज नहीं उठाई।

उन्होंने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में जमीनों की खरीद-बिक्री बहुत कम होने के कारण वहां का सरकारी बाजार मूल्य बेहद कम तय होता है। इसी आधार पर उद्योगों द्वारा अधिग्रहित जमीनों का मुआवजा भी कम दिया जाता है, जिससे आदिवासी किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। जिन जंगलों और जमीनों पर पीढ़ियों से आदिवासी समुदाय की आजीविका निर्भर रही, आज वही जमीनें उद्योगपतियों को सौंपने की तैयारी हो रही है।

कांग्रेस महामंत्री दीपक मंडल ने आरोप लगाया कि सांसद राधेश्याम राठिया ने क्षेत्र की जनता की आवाज बनने के बजाय जिंदल और अडानी जैसे बड़े उद्योग समूहों के हितों के सामने मौन हो गए है। यही कारण है कि प्रभावित क्षेत्रों में लगातार विरोध प्रदर्शन, जनसुनवाई का बहिष्कार और ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिल रहा है, लेकिन सांसद ने न तो संसद में मजबूती से मुद्दा उठाया और न ही प्रभावित गांवों में जाकर लोगों के संघर्ष में साथ खड़े हुए।

उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने यह सोचकर राधेश्याम राठिया को संसद भेजा था कि वह जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए मजबूत आवाज बनेंगे, लेकिन आज आदिवासी समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है। प्रभावित ग्रामीण रोजगार, उचित मुआवजा, पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षण की मांग कर रहे हैं, मगर भाजपा सरकार और सांसद दोनों उद्योगपतियों के दबाव में दिखाई दे रहे हैं।

कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री ने कहा कि पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम (PESA), वन अधिकार कानून और ग्राम सभा की सहमति जैसे संवैधानिक अधिकारों  का रायगढ़ जिले में लगातार अनदेखी की जा रही है। कई स्थानों पर प्रशासनिक दबाव में जनसुनवाई कराने और विरोध करने वाले ग्रामीणों पर पुलिस कार्रवाई करने जैसी घटनाएं सामने आई हैं, जो लोकतंत्र और आदिवासी अधिकारों के खिलाफ है।

दीपक मंडल ने मांग की है कि आदिवासी क्षेत्रों में प्रस्तावित परियोजनाओं की निष्पक्ष समीक्षा हो, ग्राम सभाओं की वास्तविक सहमति ली जाए, प्रभावित परिवारों को बाजार दर के अनुरूप मुआवजा और स्थायी रोजगार दिया जाए तथा विस्थापन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की स्पष्ट नीति लागू की जाए। उन्होंने कहा कि यदि आदिवासियों की आवाज को दबाने का प्रयास जारी रहा तो कांग्रेस पार्टी सड़क से लेकर सदन तक बड़ा आंदोलन करेगी।


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