एक नजर जशपुरिया सियासत पर : यहाँ सत्ता पर विपक्ष भारी है ! जानिए क्या रहा है यहाँ का इतिहास , सत्ता में रहकर भी कांग्रेस आखिर क्यों .....पढिये सियासत के नए दौर की मुनादी

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August 05, 2022



एक नजर जशपुरिया सियासत पर : यहाँ सत्ता पर विपक्ष भारी है ! जानिए क्या रहा है यहाँ का इतिहास , सत्ता में रहकर भी कांग्रेस आखिर क्यों .....पढिये सियासत के नए दौर की मुनादी

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सियासत के नए दौर की मुनादी।।

जशपुर के तीनों सीट से भाजपा भले ही हाथ धो बैठी हो लेकिन भाजपाईयो का जोश अभी तक कम होता नही दिख रहा है बल्कि बीजेपी अब पहले से भी ज्यादा एकजुट दिख रही है।इसका ताजा नमूना गुरुवार को जिला मुख्यालय में देखने को मिला । भाजपा के यूथ विंग भाजयुमो द्वारा सरकार की रोजगार नीति के खिलाफ रोजगार कार्यालय का किये गए घेराव के दौरान देखने को मिला। गुरुवार को सरकार की नीतियों और स्थानीय मुद्दों को लेकर भाजयुमो द्वारा किये गए घेराव में उमड़ी भीड़ और भीड़ की आक्रामकता यह बताने के लिए काफी है कि जिले में भाजपा विपक्ष में रहने के बावजूद सत्ता के खिलाफ पूरी तरह एकजुट है । पूलिस बैरिकेट को हटाकर घेरा के अंदर घुसकर जिस तरह से जवानों के साथ छीना झपटी का दौर चला इससे यह तो पता चलता है कि विपक्ष की तासीर में काफी गर्माहट है।

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यह बता दें कि भाजयुमो अभी लगातार सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है ।इससे पहले इनके द्वारा हर ब्लॉक मुख्यालयों में रोजगार नीति के खिलाफ एसडीएम का घेराव किया गया और गुरुवार को घेराव अभियान का उपसंहार रोजगार कार्यालय के घेराव से किया गया। हर घेराव में कार्यकर्ताओं की अपेक्षित भीड़ तो देखी ही गयी साथ ही साथ हर घेराव में सरकार से ज्यादा स्थानीय विधायको ओर सीधे सीधे हमला बोला गया।



इससे पहले फरसाबहार में हुए घेराव में भाजपा ने सीधे सीधे विधायक को टारगेट करते हुए विधायक पर सीधा हमला बोला ।यहां तक कि विधायक यू डी मिंज को भ्र्ष्टाचार का सरगना तक बता दिया ।गुरुवार को जिला रोजगार कार्यालय के घेराव के दौरान फिर से अली अब्बास का मुद्दा उठाकर विधायक विनय भगत पर सीधा हमला बोला गया ।


दरअसल जशपुर में भाजपा का इतिहास ही कुछ अलग रहा है। 2003 से पहले का इतिहास देखे तो प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी और अजीत जोगी प्रदेश के तत्कालीन मूख्यमंत्री थे लेकिन तब भी जशपुर में भाजपा का रुआब सत्ता पक्ष से कम नही था ।2003 के बाद प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी और विपक्ष के तौर पर  कांग्रेस ने मोर्चा सम्हाला।हांलाकि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी लेकिन कांग्रेस भाजपा से केवल 19 थी ।कांग्रेस तब भी कमजोर नहीं थी लेकिन जशपुर की बात करें तो यहाँ 15 वर्षो में कांग्रेस की भूमिका कभी भी सशक्त विपक्ष के रूप में नहीं दिखी ।2018 के बाद जिले में भाजपा के हाथ से तीनों सीट निकल गई और प्रदेश में भाजपा के विधायकों की संख्या अंगुली में गिनने के लायक हो गई बावजूद इसके भाजपा कम से कम जशपुर में कभी भी सत्ता के सामने झुकती हुई नही दिखी बल्कि सत्ता पर हाबी दिखी। जमीनी राजनीति की बात करें या सोशल मीडिया पॉलटिक्स की भाजपा पक्ष पर हाबी है। जब जब मौका मिला भाजपा सत्ता के खिलाफ खुलकर खड़ी हो गयी और सत्ता पर सीधा अटैक किया ।




जिले के बहुचर्चित घोटाले,रेप कांड, दिव्यांग केंद्र मामला,करप्शन या फिर और मुद्दे हो हर मुद्दे पर भाजपा पूरी ताकत से सत्ता के खिलाफ खड़ी दिखी जो कि 15 वर्षी में कांग्रेस कभी इतनी ताकत नहीं दिखा पाई।

सोशल मीडिया की बात करें तो सत्ता में रहने के बावजूद जिले में कांग्रेस की आईटी सेल फिसड्डी साबित हुई है । भाजपा सोशल मीडिया में हर दिन कांग्रेस पर हमलावर है लेकिन भाजपा के हमले का जवाब देने के लिए कांग्रेस आईटी सेल के पास हर वक्त कार्यकर्ताओ के अभाव दिखे ।हांलाकि कुछ लोग है जो भाजपा को भी मुहतोड़ जवाब देने में काफी सक्षम दिखते हैं लेकिन ऐसे इक्के दुक्के ही है और कहावत सुनी ही होगी अकेला चना भांड नहीं फोड़ता ।


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