मसाला उद्योग से माधुरी निकुंज बनीं लखपति दीदी, सालाना डेढ़ लाख रुपये की कर रहीं आमदनी, बिहान योजना से मिला आत्मनिर्भरता का अवसर, बैंक लिंकेज और पीएमएफएमई योजना के सहयोग से शुरू किया स्वरोजगार

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November 01, 2026



मसाला उद्योग से माधुरी निकुंज बनीं लखपति दीदी, सालाना डेढ़ लाख रुपये की कर रहीं आमदनी, बिहान योजना से मिला आत्मनिर्भरता का अवसर, बैंक लिंकेज और पीएमएफएमई योजना के सहयोग से शुरू किया स्वरोजगार

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 रायपुर मुनादी।। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन "बिहान" और केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के सहयोग से महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार के नए अवसर अपना रही हैं। अपने हुनर, मेहनत और उद्यमशीलता से वे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि लखपति दीदी के रूप में अपनी नई पहचान भी बना रही हैं। जशपुर जिले के फरसाबहार विकासखंड अंतर्गत ग्राम खुटगांव निवासी श्रीमती माधुरी निकुंज इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं। उन्होंने शासकीय योजनाओं से मिले आर्थिक सहयोग का सदुपयोग कर मसाला उद्योग स्थापित किया और आज प्रतिवर्ष लगभग डेढ़ लाख रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।

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बिहान से जुड़कर माधुरी ने बढ़ाए आत्मनिर्भरता की ओर कदम 

श्रीमती माधुरी निकुंज वर्ष 2017 में बिहान योजना से जुड़ीं। स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें बचत, बैंक लिंकेज और स्वरोजगार के लिए उपलब्ध वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठाने का अवसर मिला। उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के उद्देश्य से मसाला निर्माण व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया।


बिहान योजना के माध्यम से बैंक लिंकेज के तहत उन्हें 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत 1 लाख 40 हजार रुपये का सहयोग मिला। इस प्रकार दोनों योजनाओं के माध्यम से कुल 4 लाख 40 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त कर उन्होंने मसाला उद्योग की शुरुआत की।


मसाला उद्योग से सालाना डेढ़ लाख रुपये की आय, बनीं लखपति दीदी 

शासकीय योजनाओं से मिले सहयोग और अपनी मेहनत के बल पर माधुरी निकुंज ने मसाला उद्योग को आजीविका का साधन बनाया। व्यवसाय से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 1 लाख 50 हजार रुपये की आय हो रही है। इस आमदनी से वे परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में योगदान दे रही हैं और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।


मसाला निर्माण जैसे खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय को अपनाकर माधुरी ने यह उदाहरण प्रस्तुत किया है कि ग्रामीण महिलाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अवसरों का उपयोग कर स्वयं का उद्यम स्थापित कर सकती हैं। उनकी इस उपलब्धि ने उन्हें लखपति दीदी के रूप में नई पहचान दिलाई है।


बिहान और पीएमएफएमई योजना से ग्रामीण उद्यमिता को मिल रहा प्रोत्साहन 

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन "बिहान" के माध्यम से महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर बचत, ऋण और आजीविका संवर्धन के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन योजना के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े छोटे उद्यमों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।


इन योजनाओं के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं पारंपरिक आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़कर मसाला निर्माण, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य लघु उद्योगों में अपनी भागीदारी बढ़ा रही हैं। इससे महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में योगदान देने का अवसर मिल रहा है।


ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बनीं माधुरी 

श्रीमती माधुरी निकुंज की सफलता दर्शाती है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाले वित्तीय सहयोग, मेहनत और उद्यमशीलता के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल कर सकती हैं। वर्ष 2017 में बिहान से जुड़ने के बाद मसाला उद्योग स्थापित करने और सालाना डेढ़ लाख रुपये की आय अर्जित करने तक का उनका सफर अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है।


मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तीकरण और स्वरोजगार को दिए जा रहे प्रोत्साहन से जशपुर जिले की महिलाएं आजीविका के नए अवसरों की ओर आगे बढ़ रही हैं। माधुरी निकुंज जैसी लखपति दीदियों की सफलता यह संदेश देती है कि उचित अवसर और योजनाओं का सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को सफल व्यवसाय में बदलकर परिवार की खुशहाली और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।


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