जशपुर मुनादी।। पंचायत की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाने वाली युवा आदिवासी सरपंच सोनम लकड़ा अब राजनीति की दूसरी और बड़ी पारी खेलने की तैयारी में हैं। चर्चा है कि आदिवासी समाज के लोग भी उन्हें बड़ी राजनीतिक और सामाजिक जिम्मेदारी सौंपने के पक्ष में हैं। यही वजह है कि इन दिनों आदिवासी युवा समाज के कार्यक्रमों में सोनम लकड़ा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा रहा है। वह युवाओं को एकजुट करने के साथ सामाजिक मुद्दों पर आगे आकर लड़ने और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा दे रही हैं।

सोनम की यह बढ़ती सक्रियता केवल सामाजिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे उनके राजनीतिक भविष्य से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या सोनम लकड़ा अब सरपंची से आगे बढ़कर आदिवासी समाज की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने जा रही हैं?
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची सरपंची की लड़ाई, सरकार पर लगा था एक लाख का जुर्माना
सोनम लकड़ा की राजनीतिक यात्रा किसी सामान्य पंचायत प्रतिनिधि की कहानी नहीं है। साल 2019 में पहली बार सरपंच निर्वाचित होने के बाद उन्हें धारा 40 के तहत पद से हटा दिया गया था। सोनम ने इस फैसले को चुनौती देने का रास्ता चुना और अपनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाई।
सुप्रीम कोर्ट से उन्हें राहत मिली और उनकी सरपंची वापस मिली। इतना ही नहीं, सरपंच पद से गलत तरीके से हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर छत्तीसगढ़ सरकार को एक लाख रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ा। इस पूरे घटनाक्रम ने सोनम को जिले में एक अलग पहचान दिलाई।
इसके बाद 2024 के पंचायत चुनाव में सोनम एक बार फिर अपने गांव से सरपंच निर्वाचित हुईं। यानी राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपनी जमीन नहीं छोड़ी।
पढ़ाई, खेल और नेतृत्व क्षमता का अनोखा संगम
सोनम लकड़ा की पहचान सिर्फ एक सरपंच के रूप में नहीं है। उन्होंने अधिवक्ता की पढ़ाई पूरी कर ली है । खेलों में भी उनकी उपलब्धियां कम नहीं हैं। फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट, हॉकी और बास्केटबॉल जैसे खेलों में उनकी रुचि और महारत रही है। वह राष्ट्रीय स्तर पर भी खेल चुकी हैं। इसके अलावा जूडो-कराटे में भी कई पुरस्कार हासिल कर चुकी हैं।
एक तरफ कानून की पढ़ाई, दूसरी तरफ खेलों का अनुभव और तीसरी तरफ पंचायत की राजनीति में संघर्ष का लंबा अनुभव। इन तमाम खूबियों को देखते हुए आदिवासी समाज के कुछ लोग सोनम में एक मजबूत नेतृत्व की संभावना देख रहे हैं।
मुख्यमंत्री के गृह विधानसभा क्षेत्र से आती हैं सोनम
इस पूरे घटनाक्रम को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि सोनम लकड़ा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह विधानसभा क्षेत्र कुनकुरी से आती हैं। ऐसे में अगर सोनम को आदिवासी समाज की ओर से कोई बड़ी जिम्मेदारी मिलती है तो इसका असर केवल सामाजिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र की राजनीति में भी इसकी चर्चा हो सकती है।
फिलहाल सोनम की अगली राजनीतिक पारी को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि उनकी भूमिका और जिम्मेदारी क्या होगी, यह आने वाला समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि एक युवा आदिवासी महिला सरपंच के रूप में सोनम लकड़ा ने अपनी पहचान बना ली है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि सरपंची की पारी के बाद सोनम लकड़ा राजनीति के किस मैदान में उतरती हैं और उनकी अगली भूमिका जशपुर की राजनीति को कितना प्रभावित करती है?