राउरकेला मुनादी।। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला का 24वां दीक्षांत समारोह शनिवार (12 सितंबर) को उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर कुल 2,033 विद्यार्थियों को विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर एवं शोध उपाधियां प्रदान की गईं। इनमें 508 छात्राएं और 1,525 छात्र शामिल हैं।


समारोह में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि एनआईटी वारंगल के निदेशक प्रो. बिद्याधर सुबुधि विशिष्ट अतिथि थे। एनआईटी राउरकेला के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष एस.एन. सुब्रह्मण्यन ने समारोह को संबोधित किया। संस्थान के निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने निदेशक की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की।
एआई के साथ मानवीय मूल्यों को बनाए रखें : करंदीकर
दीक्षांत भाषण में मुख्य अतिथि प्रो. अभय करंदीकर ने कहा कि भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में एक निर्णायक दौर से गुजर रहा है और आज के स्नातक इस भविष्य को आकार देने वाली पीढ़ी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के साथ विज्ञान एवं इंजीनियरिंग की मूलभूत अवधारणाओं तथा जिज्ञासा, रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और नैतिक निर्णय जैसे मानवीय गुणों को बनाए रखने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ज्ञान का उपयोग केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक मानवीय समस्याओं के समाधान और समाज पर सार्थक प्रभाव डालने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, जिम्मेदारीपूर्वक नवाचार करने और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की सलाह दी।
उत्कृष्टता और ईमानदारी को बनाएं सफलता का आधार : सुबुधि
विशिष्ट अतिथि प्रो. बिद्याधर सुबुधि ने विद्यार्थियों को सुविधा के बजाय उत्कृष्टता, अल्पकालिक सफलता के बजाय ईमानदारी, आत्मसंतोष के बजाय आजीवन सीखने और प्रतिष्ठा के बजाय उद्देश्य को प्राथमिकता देने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि डिग्री और पद किसी व्यक्ति की सफलता का अंतिम मापदंड नहीं हैं। वास्तविक सफलता उसके चरित्र और समाज तथा अन्य लोगों के जीवन पर उसके सकारात्मक प्रभाव से निर्धारित होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी उपलब्धियों का उपयोग दूसरों को आगे बढ़ाने के लिए करने का आह्वान किया।
11 स्वर्ण और 61 रजत पदक प्रदान
शैक्षणिक उत्कृष्टता के सम्मान में संस्थान ने इस वर्ष 11 इंस्टीट्यूट गोल्ड मेडल, 6 एंडोमेंट गोल्ड मेडल, 8 एंडोमेंट अवार्ड तथा 61 इंस्टीट्यूट सिल्वर मेडल प्रदान किए।
विभिन्न पाठ्यक्रमों में उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बीटेक के 911, बी.आर्क के 18, बीटेक-एमटेक ड्युअल डिग्री के 42, बीएससी (इंटीग्रेटेड मल्टीपल एंट्री-एग्जिट) के 10, इंटीग्रेटेड एमएससी के 77, एमटेक के 514, एमएससी (दो वर्षीय) के 182, एमबीए के 67, एमए के 19, एमटेक (रिसर्च) के 1, पीएचडी के 190 तथा एक्जीक्यूटिव पीएचडी के 2 विद्यार्थी शामिल हैं।
47 अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों ने भी हासिल की डिग्री
इस वर्ष के दीक्षांत समारोह की एक महत्वपूर्ण विशेषता 47 अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों का स्नातक होना रहा। इनमें नेपाल के 19, बांग्लादेश के 13, अमेरिका के 6, श्रीलंका के 5, भूटान के 3 और यमन का 1 विद्यार्थी शामिल है।
युवाओं को बड़े सपने देखने की सलाह
बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष एस.एन. सुब्रह्मण्यन ने कहा कि एआई, डिजिटलाइजेशन, सतत विकास और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों से प्रभावित दुनिया में विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, अनुकूलन क्षमता, ईमानदारी और उत्कृष्टता को अपनाना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और इंजीनियरिंग, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता तथा उद्यमिता के क्षेत्र में युवाओं के लिए बड़े अवसर उभर रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, असफलताओं से सीखने और 35 वर्ष की आयु से पहले कुछ सार्थक हासिल करने का प्रयास करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने उन्हें अपने माता-पिता और शिक्षकों के त्याग को हमेशा याद रखने तथा विनम्र और जमीन से जुड़े रहने की सलाह दी।
‘समस्याओं की पहचान ही नहीं, समाधान भी खोजें’
निदेशक प्रो. के. उमामहेश्वर राव ने अपने संबोधन में विशेष रूप से जेन-जी विद्यार्थियों को संदेश देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह उनके शैक्षणिक जीवन के समापन के साथ-साथ अवसरों, जिम्मेदारियों और चुनौतियों से भरे नए अध्याय की शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि वास्तविक दुनिया कक्षा की समय-सारिणी या परीक्षा की तरह हमेशा व्यवस्थित और पूर्वानुमानित नहीं होगी। जटिलताओं और अनिश्चितताओं के बीच विद्यार्थियों को सृजनकर्ता, समस्या-समाधानकर्ता और नेतृत्वकर्ता बनना होगा। उन्होंने कहा, “केवल समस्याओं की पहचान न करें, बल्कि उनका समाधान खोजने वाले बनें।”
प्रो. राव ने कहा कि नई पीढ़ी के हाथों में तकनीक, सोच में नवाचार और हृदय में भारत है। उन्होंने विद्यार्थियों से एनआईटी राउरकेला द्वारा दिए गए उत्कृष्टता, ईमानदारी और सेवा के मूल्यों को आगे बढ़ाने तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
विभिन्न क्षेत्रों में संस्थान का योगदान
एनआईटी राउरकेला 14 विभागों में 17 विषयों में बीटेक, योजना एवं वास्तुकला विभाग के माध्यम से बी.आर्क, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के माध्यम से एमबीए, 12 विभागों में 31 विशेषज्ञताओं में एमटेक, चार विभागों में चार बीटेक-एमटेक ड्युअल डिग्री कार्यक्रम तथा पांच विभागों में चार इंटीग्रेटेड एमएससी और सात एमएससी कार्यक्रम संचालित कर रहा है। संस्थान ने शिक्षा, अनुसंधान, तकनीक और राष्ट्र निर्माण के विभिन्न क्षेत्रों में लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
दो पूर्व छात्रों को विशिष्ट पूर्व छात्र सम्मान
समारोह में एनआईटी राउरकेला के दो पूर्व छात्रों को विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
उद्योग एवं प्रबंधन के क्षेत्र में राजर्षि गुप्ता, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ, ओएनजीसी विदेश लिमिटेड, तथा उद्यमिता एवं सार्वजनिक जीवन के क्षेत्र में ज्ञान रंजन महांती, प्रबंध निदेशक, कोरिसन प्रोटेक्शन लिमिटेड तथा सह-संस्थापक, बी. इंजीनियर्स व बिल्डर्स प्रा.लि.को सम्मानित किया गया।

