जशपुर मुनादी।। जशपुर नगरपालिका में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल सड़क, नाली या सफाई नहीं है सबसे बड़ा सवाल है सीएमओ साहब आखिर हैं कहाँ? और किस बड़े आदमी के आदमी हैं?
कहते हैं, साहब का राजनीतिक नेटवर्क इतना मजबूत है कि घड़ी 10 बजा दे, कलेक्टर पहुंच जाएं, अधिकारी लाइन लगाकर खड़े हो जाएं लेकिन साहब का "एंट्री सीन" फिर भी शुरू ही नहीं होता!
आज भी कुछ ऐसा ही हुआ।
नगरपालिका के विकास कार्यों का निरीक्षण होना था। कलेक्टर समय पर पहुंचे, अधिकारी समय पर पहुंचे लेकिन सीएमओ साहब? वे फिर अपने "रहस्यमयी मिशन" पर निकले हुए थे।
बस फिर क्या था
कलेक्टर का पारा चढ़ा और एसडीएम को आदेश मिला—सीएमओ कार्यालय पर ताला लगा दीजिए।लेकिन कहानी में ट्विस्ट अभी बाकी है।दफ्तर सील हो गया मगर साहब फिर भी नहीं पहुंचे।न कोई सफाई न कोई जवाब ।मानो साहब ने साफ साफ कह दिया हो "ऑफिस बंद है तो बंद रहे हमें क्या!"
अब सुनिए राजनीति का दूसरा अध्याय ----
स्थानीय भाजपा नेताओं की नाराज़गी भी किसी से छिपी नहीं है। नगरपालिका अध्यक्ष का दावा है कि सीएमओ साहब अक्सर खुद को प्रदेश की एक बड़ी मंत्री का बेहद करीबी बताते हैं। यही वजह है या कुछ और यह तो जांच का विषय है, लेकिन आरोपों के बीच सवाल लगातार उठ रहे हैं।अब जशपुर की गलियों में चर्चा सिर्फ एक ही है ,आखिर ऐसा कौन-सा "पावर बैंक" है, जिससे सीएमओ साहब की बैटरी कभी डाउन नहीं होती?
क्या वाकई किसी बड़े राजनीतिक संरक्षण का असर है?या फिर पूरी कहानी कुछ और है?इन सवालों के जवाब संबंधित जांच और आधिकारिक तथ्यों से ही सामने आएंगे।
जशपुर एसडीएम ने "मूनादी डॉट कॉम "से चर्चा के दौरान बताया कि सीएमओ बगैर सूचना छुट्टी के 10-10 दिनों तक गायब रहते हैं जिसके चलते आम जनता का काम नहीं हो पाता और लोग भटकते रहते हैं।आये दिन यही देखने को मिलता है कि सीएमओ दफ्तर में ही नहीं है।उन्होंने यहॉ तक बताया कि नोटिस भी कैसे और किसको जारी करें जब वह दफ्तर में ही नही बैठते ।
बहरहाल , इस मामले में आगे और भी कुछ अपडेट आएगा तो हम पाठकों को उस अपडेट से अवगत कराते रहेंगे
तब तक जशपुर में चर्चा जारी है, ताला (सील)भी जारी है और इंतज़ार भी जारी है कि सीएमओ साहब आखिर कब सामने आएंगे!