रायगढ़ मुनादी।। शहर के ऐतिहासिक शैक्षणिक संस्थान किरोड़ीमल शासकीय पॉलिटेक्निक संस्थान का नाम बदलकर छत्तीसगढ़ इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कर दिया गया है। नाम परिवर्तन के निर्णय के बाद शहर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।
यह संस्थान फरवरी 1955 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल द्वारा उद्घाटित किया गया था। लंबे समय से यह संस्थान सेठ किरोड़ीमल के नाम से जुड़ा रहा है और रायगढ़ की पहचान का हिस्सा माना जाता रहा है।
सरकार के फैसले पर उठे सवाल
विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि सरकार नए भवन या आधारभूत सुविधाओं के विस्तार में अपेक्षित प्रगति नहीं कर सकी, लेकिन नाम बदलने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी गई। आलोचकों का कहना है कि वर्ष 2011 से सेठ किरोड़ीमल के नाम से जुड़े संस्थानों में बदलाव की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे उनकी स्मृतियों के साथ “खिलवाड़” हो रहा है।
सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय के विरोध में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई नागरिकों ने रायगढ़ के दानवीर सेठ किरोड़ीमल की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए नाम परिवर्तन पर पुनर्विचार की मांग की है।
सेठ किरोड़ीमल की सामाजिक पहचान
रायगढ़ में सेठ किरोड़ीमल को प्रमुख दानवीर के रूप में याद किया जाता है। शिक्षा और सामाजिक कार्यों में उनके योगदान का उल्लेख स्थानीय इतिहास में प्रमुखता से मिलता है। नागरिकों का एक वर्ग मानता है कि ऐसे व्यक्तित्वों के नाम पर स्थापित संस्थानों का नाम बदला जाना उचित नहीं है।
अशरफी देवी महिला चिकित्सालय का मामला भी उठा
नाम परिवर्तन के मुद्दे के साथ ही शहर में अशरफी देवी महिला चिकित्सालय का मामला भी चर्चा में है। आरोप है कि तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया के कार्यकाल में अस्पताल को ट्रस्ट से लेकर प्रशासनिक नियंत्रण में लिया गया था। विरोध करने वाले पक्ष का दावा है कि समय के साथ अस्पताल की मूल संरचना और सेवाएं प्रभावित हुईं, जबकि प्रशासनिक पक्ष की ओर से पूर्व में इसे बेहतर प्रबंधन की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा
इस पूरे प्रकरण पर सत्तारूढ़ दल की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान अभी तक सामने नहीं आया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा स्थानीय राजनीति में प्रमुख स्थान ले सकता है।
फिलहाल, नाम परिवर्तन को लेकर रायगढ़ में बहस जारी है और नागरिकों की निगाहें सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।