"सियासत के बदलते दौर की मूनादी" ।। जंतर-मंतर का आंदोलन,धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और अब सोशल मीडिया की एक पोस्ट ने छत्तीसगढ़ के कुनकुरी को राष्ट्रीय बहस के बीच ला खड़ा किया है।सवाल आंदोलन का नहीं सवाल अभिव्यक्ति की आज़ादी और उसकी मर्यादा का है। क्या सरकार का विरोध करते-करते देश के प्रधानमंत्री के लिए अपशब्द लिखना लोकतंत्र है या फिर कानून की सीमा पार करना?
"वीवीआई विधानसभा कुनकुरी की एक युवती के इंस्टाग्राम अकाउंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए कथित तौर पर अमर्यादित भाषा लिखे जाने का मामला सामने आया है। इसके बाद भारतीय जनता युवा मोर्चा कुनकुरी ने थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दी है और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
भारतीय जनता युवा मोर्चा, मंडल कुनकुरी के अध्यक्ष रंजीत सोनी ने आज थाना कुनकुरी पहुंचकर सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबंध में कथित आपत्तिजनक पोस्ट किए जाने की शिकायत दर्ज कराते हुए थाना प्रभारी को लिखित आवेदन सौंपा।आवेदन में कहा गया है कि इंस्टाग्राम पर एक सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री के विरुद्ध आपत्तिजनक एवं अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए पोस्ट एवं स्टोरी पोस्ट की गई है। शिकायत के साथ संबंधित पोस्ट के स्क्रीनशॉट एवं सोशल मीडिया अकाउंट का विवरण भी पुलिस को उपलब्ध कराया गया है।
रंजीत सोनी ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर मौजूद सबूतो का परीक्षण किया जाए और यथोचित कार्रवाई की जाय।
देखा जाय तो Gen-Z की राजनीति अब सिर्फ सड़क पर नहीं मोबाइल स्क्रीन पर भी लड़ी जा रही है। लेकिन याद रखने वाली बात यह है कि वायरल होने और कानून के दायरे में रहने के बीच सिर्फ एक पोस्ट का फ़ासला होता है।जंतर-मंतर से उठी सियासी आग अब सोशल मीडिया की टाइमलाइन तक पहुंच चुकी है। सवाल यह है कि क्या विरोध की भाषा लोकतांत्रिक रहेगी या नफरत और गाली की भाषा इस आंदोलन की पहचान बन जाएगी?
बहरहाल देखने वाली बात यह है कि अब इस मामले क्या कार्रवाई होती है और सोचने वाली बात यह है कि क्या सोशल मीडिया की आज़ादी की भी कोई सीमा है? और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनीति अब पूरी तरह Instagram Reels और वायरल पोस्ट के भरोसे चलने लगी है?