जशपुर मुनादी।। लगातार सरकारी दावे हैं, प्रशासन की कोशिशों की अपनी कहानी है। पर क्या वास्तव में ऐसा हो पा रहा है।
आज हम उस गांव पहुंचे, जो जिले के साथ बग़ीचा के भी दूरस्थ ग्राम पण्डरापाठ में थे। जो हमने देखा वाकई दयनीय स्थिति थी। एक पहाड़ी कोरवा वृद्धा, वो भी अकेली, जिसके आगे पीछे कोई भी नहीं। उसे अपनी पेट की आग बुझाने के लिए भी कभी मांगना पड़ता है, तो कभी दूसरे के घरेलू काम कर देने से उसका पेट की क्षुधा को शांत करने के लिए कुछ भोजन मिल जाता है।
न पेंशन, न राशन और न ही घर! पर मलाल उसे बस इतना ही कि उसका राशन कार्ड बन जाता तो उसके पेट की आग बुझाने के लिए कुछ सहारा बन जाता। वो प्रयास करती है पर पंच्यायत से यही बता दिया जाता है कि बग़ीचा जाओ राशन कार्ड बनवा लो, तो राशन देंगे।
अब व्यथा देखिये, इस पहाड़ी कोरवा वृद्धा की अगर उसे इतना ही सब कुछ आता तो पंच्यायत में आकर क्यों बोलती, की मुझे भी चावल दो, मेरी भूख मिटाने के लिए तो दो। पर टका से जवाब मिलता है, मन मसोस कर लौट आती है।
उसने हमसे ऑफ कैमरा तो सब बता दिया, पर कैमरे के सामने झिझक रही थी तो दूर के नाते रिश्ते में लगने वाली अपनी एक बेटी को सहयोग के लिए बुला लिया, कि उसकी व्यथा सामने आ जाये। और हुक्मरानों को ये पता चल सके कि ये दशा है, और रोज तुम्हारे दिशा बदलने के दावे आते हैं।
सवाल यह भी योजनाएं अगर इनके लिए नही तो किसके लिए हैं, पेट किसका भरा जा रहा, कुहक तो इस चीज की भी कि, अगर कोई दावा करे कि इसे राशन मिलता है, तो जाता कहाँ है।
जनपद पंचायत बगीचा सीईओ विनोद सिंह ने बताया कि उनकी जानकारी में सभी के राशन कार्ड बने हैं क्योंकि उन्होंने सभी पंचायतों के सरपँच सचिब को छूटे हुए लोगो का फार्म भरवाने के निर्देश दिए है और पहाड़ी कोरवाओं का तो तत्काल राशन कार्ड बनाया जा रहा है । सरपँच सचिव से चर्चा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले में जब पंचायत के सचिव गणेश यादव से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि उन्हें बताया कि सभी के राशन कार्ड बने है ।बुधनी बाई का नाम अगर छूट गया होगा तो तत्काल राशन कार्ड बनवाया जाएगा ।
वही पंडरा पाठ क्षेत्र के जनपद सदस्य बिपिन सिंह का का कहना है कि आज ही उन्हें जनसम्पर्क के दौरान पता चला है कि बुधनी बाई के पास न तो घर है ,न उसे पंचायत से चावल मिलते हैं न ही उसका राशन कार्ड ही बना है । सरपँच सचिव को बोलकर तत्काल बुधनी बाई की मदद की जाएगी उसे शसकीय योजनाओं से जोड़ा जाएगा।
क्यों हमसे यह सब बताना पड़ रहा है, सीधा सा जवाब यही कि जब किसी असहाय की उम्मीदें टूटती है, तो हम भी अपनी Voice of Voiceless की थीम के साथ काम करते हैं, पत्रकार नहीं मददगार बनकर!
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