जशपुर मुनादी।। बगीचा गौरव पथ निर्माण को लेकर अब बगीचा में विवाद तेज हो गया है, जहां शोसल मीडिया इस समय प्रशासन के त्यौहारों के बीच एकतरफा सुबह 4 बजे कार्यवाही करने से आक्रोश तो फैला ही, वहीं स्थानीय प्रतिनिधियो की भी खूब खिंचाई की जा रही है। जिसको लेकर बगीचा का शोसल मीडिया इस समय पटा पड़ा है।

क्या कह रहे लोग..
कुछ तो यहां तक लिख रहे हैं, कि स्थानीय भाजपा नेता इस समय बगीचा को 2004-08 तक कि स्थिति में लाकर खड़ा कर दिए हैं, जहाँ लोगों को भयाक्रात कर राजनीती करने की फितरत शामिल है। अब यह 2008 के बाद वाली भाजपा नही रही, वहीं लोग यह भी कह रहे कांग्रेस के स्थानीय ठेकेदारों से भाजपाई प्रतिनिधियों की मिलीभगत कर इस हाल में बगीचा को खड़ा किया जा रहा। ये वही लोग हैं जो 2004 से 8 तक स्थापित थे, और आज फिर उन्हें ही मालिकाना हक संगठन ने दे दिया है।
क्या है विवाद...
लोगों की माने तो उनका कहना था कि, जो भी अतिक्रमण है, वह हटाने को सहर्ष तैयार हैं, जिसके लिए दिवाली तक का समय दिया जाए, जिसके लिए प्रतिनिधिमंडल अधिकारियों से भी मिला, पर उधर क्या फेर था क्या समझ थी, प्रशासन अचानक शनिवार को सुबह 4 बजे पहुंचकर तोड़ फोड़ करना प्रारम्भ कर दिया। जिसके लिए न तो विधिवत मुनादी एक दिन पहले तक भी न कराई गई, और लोगों को न आभाष होने दिया गया।
मंदिरों को तोड़ने पर खूब हुआ गतिरोध..
प्रशासन सुबह 4 बजे आकर जहां सर्वेश्वरी आश्रम नवरात्रि पूजा की तैयारी में जुटा था, वहीं सुबह 4 बजे सर्वेश्वरी मंदिर के अहाते को ढहा दिया गया। उसके बाद जैन मंदिर की बारी आई, और वहां धर्मावलम्बी 3 दिन की मोहलत मांगते रहे, पर उनकी भी नही सुनी गई, और बुलडोजर चढ़ा दिया गया, लोगो की माने तो मंदिर बस रॉड के बीच से 30 फ़ीट के दायरे में एक फ़ीट ही फंस रहा था।
लोगों ने पोस्ट कर दी डिजाइन...
लोगों ने गौरव पथ की जो डिजाइन शोसल मीडिया में पोष्ट कर दिया, और बताया कि गौरव पथ का पूरा निर्माण नाली समेत, पोल शिफ्टिंग वगैरह 28.5 फ़ीट में होना है, तो तीस फ़ीट तक जाकर तोड़ फोड़ क्यों कि गयी।
टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से ही गौरव पथ रहा विवादों में..
गौरव पथ की बात अगर की जाए तो जब से टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, 4 बार टेंडर निरस्त किया गया, उतने बार नियम भी बदलते रहे, लोगों की माने तो एक चहेते ठेकेदार, जो स्थानीय भाजपा नेता और कांग्रेस के गठजोड़ की परिणीति बनी है, कई जोर जुगत के बाद टेंडर उसे दिला भी दिया गया, जिसको लेकर भी खूब हायतौबा मची रही।
13 करोड़ का है गौरव पथ..
यह गौरव पथ पूरे 13 करोड़ का बनना है, जिसका टेंडर और जोर जुगत, में 4 बार निरस्तीकरण ने 1 साल का वक्त लगा दिया है, वहीं लोग यह कह रहे जब दिवाली तक का समय प्रशासन के पास नही था, तो कार्य अब शुरू क्यों नही किया जा रहा।
स्थानीय नेताओं की अनुपस्थिति ने लोगों का बढ़ाया गुस्सा..
कार्यवाही के दौरान स्थानीय नेताओं की अनुपास्थिति ने धरमावलम्बियों के गुस्से को सातवें आसमान पर चढ़ा दिया, कि 3- से 9 दिन का समय भी न मिल पाया।
कुछ ने छप्पर के नीचे छोटे बच्चों के साथ बिताई रात..
इस कार्यवाही के बाद कुछ मार्मिक तस्वीरें भी सामने आई, जिसमे मस्जिद के सामने 1 कमरे का घर के सामने की दीवाल टूटने के बाद बगीचा की ठंड में अपने छोटे बच्चों के साथ रात बिताते नजर आये। अब तक इनके लिए कोई व्यवस्था भी न हो सके।
अब जो जैसा हुआ पर अतिक्रमण हटा तो लोग कह रहे कि जल्द अब कार्य शुरू करे, वहीं कह रहे स्थानीय कमिटी ग्रामीण और सामाजिक संगठनों की एक गौरवपथ के लिए कमिटी बनाई जाए, जो इस कार्य के गुणवत्ता पर सतत निगरानी रखे वहीं वो कलेक्टर को डायरेक्ट रिपोर्टिग करे।