सतीश शर्मा की मुनादी।। ओडिशा में सियासी घमासान के बीच विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने अपने फैसले से विपक्ष को निराश किया है। अध्यक्ष ने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के आरोप में बीजद के 8 और कांग्रेस के 3 विधायकों को अयोग्य घोषित करने वाली याचिकाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी ने राज्यसभा चुनाव में कथित क्रॉस-वोटिंग के मामले में बड़ी राहत देते हुए बीजू जनता दल (बीजद) और कांग्रेस की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में कुल 11 विधायकों—बीजद के आठ और कांग्रेस के तीन—को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की गई थी।
याचिकाओं में कहा गया था कि विधायकों की यह कार्रवाई दल-बदल विरोधी प्रावधानों का उल्लंघन है और इसलिए उन्हें विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाओं को खारिज कर दिया।
बीजद की याचिकाओं का हवाला देते हुए ओडिशा विधानसभा सचिवालय ने 19 जून की अधिसूचना में कहा, ये याचिका छोटी, अस्पष्ट, बिना ठोस आधार के और कानूनी जरूरतों को पूरा नहीं करती है, इसलिए इसे गुण-दोष के आधार पर विचार के लिए स्वीकार नहीं किया जा सकता।
अधिसूचना के मुताबिक, इस याचिका में गंभीर गलतियां हैं और यह विचार योग्य नहीं हैं.
जांच के बाद, अध्यक्ष ने पाया कि विधायकों के खिलाफ पेश साक्ष्य संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(1)(ए) के तहत स्वेच्छा से त्यागपत्र देने या दल-बदल को प्रमाणित नहीं करते हैं। बाद में विधानसभा अध्यक्ष ने पत्रकारों से कहा कि याचिकाएं पूरी नहीं थीं और उनमें साक्ष्यों की कमी थी। उन्होंने कहा, यह फैसला कानून के मुताबिक लिया गया है.
इस फैसले से संबंधित 11 विधायकों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, राजनीतिक दल अपने स्तर पर उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई जारी रख सकते हैं। बीजद और कांग्रेस पहले ही संबंधित विधायकों के विरुद्ध संगठनात्मक कार्रवाई कर चुके हैं।
दोनों दलों ने आरोप लगाया था कि इन विधायकों ने 16 मार्च को हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी व्हिप का उल्लंघन करते हुए आधिकारिक निर्देशों की अवहेलना की और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हुए। इसी आधार पर पार्टी ने संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की थी। बीजद और कांग्रेस का दावा था कि संबंधित विधायकों ने पार्टी व्हिप की अवहेलना करते हुए भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय के पक्ष में मतदान किया था।
किन विधायकों की थी सदस्यता खत्म करने की मांग
बीजद ने आठ विधायकों की सदस्यता खत्म करने की मांग की थी।. इनमें बालिगुड़ा से चक्रमणि कंहर, बांकी से देवी रंजन त्रिपाठी, पटकुरा से अरविंद महापात्रा, चंपुआ से सनातन महाकुड, बस्ता से सुभासिनी जेना, जयदेव से नब किशोर मलिक और कटक-चौद्वार से सौविक बिस्वाल शामिल हैं। कांग्रेस ने भी अपने विधायकों-बाराबती-कटक से सोफिया फिरदौस, सनाखेमुंडी से रमेश जेना और मोहना से दशरथ गमांग की अयोग्यता की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।
विवाद की पृष्ठभूमि
राज्यसभा की चार सीटों के लिए 16 मार्च को हुए चुनाव में बीजद ने कांग्रेस और माकपा के साथ मिलकर प्रसिद्ध यूरोलॉजिस्ट डॉ. दत्तेश्वर होता को संयुक्त उम्मीदवार बनाया था। विधानसभा में पर्याप्त समर्थन होने के बावजूद डॉ. होता चुनाव हार गए।
वहीं भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार और पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप राय चौथी सीट पर विजयी रहे। बताया गया कि बीजद के आठ और कांग्रेस के तीन विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर उनके पक्ष में मतदान किया था। भाजपा ने दो सीटें जीतीं, जबकि बीजद को एक सीट मिली।
इस परिणाम के बाद बीजद और कांग्रेस दोनों ने संबंधित विधायकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए उन्हें निलंबित किया और विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता समाप्त करने की मांग की।
अध्यक्ष द्वारा याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद सभी आठ विधायक ओडिशा विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला बीजद के लिए झटका है और राज्यसभा चुनावों में क्रॉस-वोटिंग, पार्टी व्हिप तथा दल-बदल विरोधी कानून की प्रभावशीलता को लेकर नई बहस छेड़ सकता है।