जशपुर मुनादी।। जिले के नगर पंचायत बगीचा में इन दिनों कुछ लोगों का झुंड वार्ड वार्ड वार्ड घूम रहा है, और प्रत्येक घर से 100-100 रुपये की उगाही की जा रही है, और यह उगाही इसलिए कि जा रही है जिससे घर पर मकान नम्बर और नाम एपीसी सीट पर दर्ज कर घरों में चिपकाया जाए, और इस कार्य का आदेश नगरपंचायत बगीचा के सीएमओ ने एक निजी व्यक्ति के नाम कर रखा है। जो जिले का न होकर बिलासपुर जिले से सम्बन्ध रखता है, और अब वह और उसकी टीम नगर पंचायत के प्रत्येक घर से घूम घूमकर 100-100 रुपये की उगाही कर रहा है।
अब इसकी आवश्यकता नगर पंचायत को क्यों पड़ी, ये तो समझ से परे है, पर जो हो रहा है वह कहीं न कहीं इस आदिवासी जिले के इस नगर पंचायतों में लोगों के ऊपर बोझ से कम नही है। सरकारें जहां अपनी नीतियों में आम लोगों पर टैक्स का बोझ कम पड़े, इस को लेकर रोज कवायदें करती रहती है। पर जो नगर पञ्चायत बगीचा में किया जा रहा है, लोगों से लूट से कम नही।
क्या कहते हैं लोग
इस मामले को लेकर लोग अपनी प्रतिक्रिया भी शोसल मीडिया पर जाहिर कर रहे है कोई कह रहा है कि रिश्वत टैक्स से त्राहिमाम् जनता के बीच ये भ्रष्टाचार का नया तरीका ईजाद किया है, अधिकारी इस जनता को लूटने के लिए नया तरीका ईजाद कर ही लेते हैं, चाहे वो आदेश संवैधानिक हो या असंवैधानिक! भले अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर अधिकारी आदेश करें, पर लूटना जनता को ही है।
सीएमओ के आदेश को दिखाकर लोगो को दिखाया जा रहा डर-
लोगों ने बताया कि ये घरों में जा रहे हैं और सीएमओ के आदेश को दिखाकर यह कह रहे कि इसको करवाना ही पड़ेगा नही तो राशन कार्ड से नाम कट जाएगा, महतारी वंदन का पैसा नही मिलेगा वगैरह, मतलब की इस मकान नम्बर की सीट को नही लगवाने से सरकारी योजनाओं से मिलने वाले लाभ से उन्हें वंचित कर दिया जाएगा।
आठ से दस लाख का है पूरा खेल-
लोगों की माने तो यह पूरा खेल लगभग 8 से 10 लाख है, जहां एपीसी सीट पर नाम और मकान नम्बर लगाने वाले को 5 से 7 रुपये का खर्च आता है, पर जिसके लिए सीएमओ के आदेश से 100 रुपये की उगाही की जा रही है। अगर नगर पञ्चायत बगीचा में 1000 घर है तो पूरा खेला 10 लाख का हो जाता है।
जिला प्रशासन ने पहले भी पंचायतों इस तरह के कार्य पर सख्ती से रोक लगायी है--
पिछले वर्षों में जिले के कई ग्राम पंचायतों में इसी तरह मकान नम्बर के बिल्ला लगाने के नाम पर लोगों से उगाही करने की कोशिश होती रही है, जिसको लेकर जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए रोक लगायी है, पर अब तक आदेश करने वालों पर कोई कार्यवाही नही हुई है, जिसका असर यह है कि यह खेला अब नगर पंचायत में करने की कोशिश हो रही है। खेला चाहे जो भी हो पर इन सबमे पीस तो आम लोग ही रहे हैं, और लूटने का आम शिकार होती जनता ही दिख रही है।