Breaking jashpur गुस्साए ग्रामीणों ने पूरे कलेक्टर कार्यालय में मचा दिया हड़कम्प, कार्यालय का गेट हुआ बंद , फिर ग्रामीणों ने सड़क पर दिया धरना ,रात 8 बजे तक..

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June 17, 2026



Breaking jashpur गुस्साए ग्रामीणों ने पूरे कलेक्टर कार्यालय में मचा दिया हड़कम्प, कार्यालय का गेट हुआ बंद , फिर ग्रामीणों ने सड़क पर दिया धरना ,रात 8 बजे तक..

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जशपुर मूनादी ।।बड़ी खबर जशपुर से आ रही है जहाँ कोरवा समाज के लोग रात 8 बजे तक कलेक्टर कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे रहे । इनका कहन पहाड़ी और दिहाड़ी कोरवा में भेदभाव के चलते पहाड़ी कोरवाओं की सूची में इनका नाम दर्ज नहीं हो रहा है ।इनके साथ भेदभाव किया जा रहा है । इसी मुद्दे को लेकर मनोरा क्षेत्र के कोरवा समाज के लोग आज सहायक आयुक्त कार्यालय पहुँचे थे । उन्हें लगा कि उनके मुद्दों पर कोई समाधान नहीं होगा तो समाज के लोग धरने पर बैठ गए । मामला तब और गम्भीर हो गया जब कलेक्टर कार्यालय बंद होने के बाद समाज के लोग कलेक्टर कार्यालय के सामने सड़क पर धरने पर बैठ गए ।


जशपुर में आज एक पुराना विवाद फिर सड़कों पर उतर आया और इस बार मामला इतना गंभीर हो गया कि महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग तक कलेक्ट्रेट पहुंच गए।

बुधवार की सुबह जैसे ही मनोरा ब्लॉक के विभिन्न गांवों से आए कोरवा समाज के लोग सहायक आयुक्त कार्यालय के सामने धरने पर बैठे, पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में हलचल मच गई।

हाथों में मांगें.चेहरों पर गुस्सा और दिल में एक ही सवाल

"आखिर पहाड़ी कोरवा और दिहाड़ी कोरवा में भेदभाव क्यों?"

धरने पर बैठे ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी विभाग इन दिनों विशेष संरक्षित जनजाति पहाड़ी कोरवा का ऑनलाइन पंजीयन कर रहा है, लेकिन इस प्रक्रिया में कई परिवारों के साथ अन्याय हो रहा है।इनका कहना है कि उनसे पहाड़ी कोरवा होने के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।लेकिन सवाल यह है कि जब वर्ष 2002 के सर्वे में नाम शामिल होने के बावजूद आज तक सूची में उनका नाम दर्ज ही नहीं हुआ, तो वे प्रमाण पत्र लाएं कहां से?जिन परिवारों को सरकार पहाड़ी कोरवा बता रही है, उनसे उनके पीढ़ियों पुराने रिश्ते हैं ।यहां तक कि वैवाहिक संबंध भी हैं।फिर आखिर दोनों परिवारों के बीच यह अंतर किस आधार पर किया जा रहा है?

धरने पर बैठे लोगों की मांग साफ है कि यदि उनसे पहाड़ी कोरवा होने का प्रमाण मांगा जा रहा है, तो पहले यह भी बताया जाए कि पहले से सूची में शामिल लोगों को किस आधार पर पहाड़ी कोरवा माना गया था?कोरवा समाज का कहना है कि वे वर्षों से इस भेदभाव को खत्म करने की लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन सरकार और प्रशासन की ओर से अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।

यही वजह है कि उन्होंने साफ शब्दों में ऐलान कर दिया है...

"जब तक पहाड़ी और दिहाड़ी कोरवा विवाद का समाधान नहीं होगा, तब तक धरना खत्म नहीं होगा।"

स्थिति को संभालने के लिए सहायक आयुक्त संजय सिंह और एसडीएम वीआर मस्के लगातार प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर रहे हैं।

इस बीच सहायक आयुक्त संजय सिंह ने भरोसा दिलाया है कि सर्वे में छूट गए लोगों को सूची में शामिल करने के लिए प्रस्ताव तैयार कर संभाग मुख्यालय भेज दिया गया है।

उनका कहना है कि जल्द ही प्रक्रिया शुरू होगी और जो भी पात्र व्यक्ति अपना नाम पहाड़ी कोरवा सूची में दर्ज करवाना चाहता है, वह आवेदन कर सकेगा।


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