ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 : भारत के सामने पदकों की बड़ी चुनौती

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July 22, 2026



ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 : भारत के सामने पदकों की बड़ी चुनौती

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सतीश शर्मा की मुनादी।। फुटबॉल विश्व कप की गहमागहमी खत्म होते ही भारतीय खेलप्रेमियों की निगाहें अब ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 पर टिक गई हैं।

ओलंपिक खेलों के बाद दुनिया के सबसे बड़े बहु-खेल आयोजनों में शामिल 23वें राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स) का आगाज गुरुवार (23 जुलाई) से स्कॉटलैंड के ग्लासगो में होगा। 2 अगस्त तक चलने वाले इन खेलों में 74 राष्ट्रमंडल देशों के तीन हजार से अधिक खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। 1994 के बाद  सबसे छोटे राष्ट्रमंडल खेलों का ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय और रानी कैमिला 23 जुलाई को ओवीओ हाइड्रो, ग्लासगो में 23वें राष्ट्रमंडल खेलों का आधिकारिक उद्घाटन करेंगे। 


बजट में कटौती के कारण इस बार प्रतियोगिता का स्वरूप पहले की तुलना में काफी छोटा रखा गया है। 19 खेलों के स्थान पर केवल 10 खेल शामिल किए गए हैं, जिससे भारत सहित कई देशों की पदक संभावनाएं प्रभावित होने की आशंका है।


96 वर्षों का गौरवशाली इतिहास 

राष्ट्रमंडल खेलों की शुरुआत 1930 में कनाडा के हैमिल्टन शहर में ब्रिटिश एम्पायर गेम्स के नाम से हुई थी। पहले संस्करण में 11 देशों के लगभग 400 खिलाड़ियों ने भाग लिया था।

समय के साथ इन खेलों का नाम बदलता रहा। 1950 में इसका नाम ब्रिटिश एम्पायर एंड कॉमनवेल्थ गेम्स, 1966 में ब्रिटिश कॉमनवेल्थ गेम्स और 1978 से आधिकारिक रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स (राष्ट्रमंडल खेल) रखा गया। सद्भावना और खेल भावना के कारण इन्हें "फ्रेंडली गेम्स" भी कहा जाता है।


द्वितीय विश्व युद्ध के कारण 1942 और 1946 में इन खेलों का आयोजन नहीं हो सका था।

वर्ष 2002 से पैरा खिलाड़ियों को मुख्य प्रतियोगिता में समान महत्व दिया गया, जबकि 2018 में राष्ट्रमंडल खेल पुरुष और महिला खिलाड़ियों के लिए समान पदक स्पर्धाओं वाला पहला वैश्विक बहु-खेल आयोजन बना।

ग्लासगो तीसरी बार मेजबान

ग्लासगो इससे पहले 1970 और 2014 में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी कर चुका है। 2026 के साथ यह तीसरी बार मेजबान शहर बनने जा रहा है।


ऑस्ट्रेलिया ने खींचे हाथ 

दरअसल कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया का विक्टोरिया शहर करने वाला था। उस समय इस बहुपक्षीय इवेंट में 21 खेलों को शामिल करने का योजना थी।   लेकिन खेलों के आयोजन की अनुमानित लागत 2.6 बिलियन डॉलर से बढ़कर 6-7 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक पहुंच जाने की वजह से विक्टोरिया सरकार ने 18 जुलाई 2023 को खेलों की मेजबानी से हाथ खींच लिया।

मार्च 2024 में कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन ने मलेशिया को मेजबानी करने के लिए 100 मिलियन यूरो का ऑफर दिया था।, लेकिन मलेशिया ने राशि पर्याप्त नही कहते हुए आयोजन से इनकार कर दिया। 


ग्लासगो ने ली जिम्मेदारी 

जब कोई मेजबान नहीं मिला, तो ग्लासगो ने अप्रैल 2024 में मेजबानी का प्रस्ताव रखा। . ग्लासगो ने आखिरी बार 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स का सफल आयोजन किया था। ग्लास्गो ने कम बजट और कम खेलों के आयोजन के शर्त पर हामी भरी। उसने 2014 में तैयार खेल सुविधाओं का ही दुबारा उपयोग करने का निर्णय किया। इस वजह से  इसबार सामान्य वर्ग के 10 खेल और पैरा वर्ग में छह खेलो का आयोजन किया जा रहा है। 


सभी प्रतियोगिताएं ग्लासगो शहर के चार प्रमुख स्थलों पर लगभग 12.8 किलोमीटर के दायरे में आयोजित होंगी।


10 खेल, 215 स्वर्ण पदक 

इस बार 10 खेलों में कुल 215 स्वर्ण पदक दांव पर होंगे। प्रतियोगिता में एथलेटिक्स, तैराकी, ट्रैक साइक्लिंग, मुक्केबाजी, कलात्मक जिम्नास्टिक, जूडो, इंडोर बाउल्स, नेटबॉल, भारोत्तोलन और 3×3 बास्केटबॉल शामिल हैं।

पैरा खिलाड़ियों के लिए पैरा एथलेटिक्स, पैरा तैराकी, पैरा ट्रैक साइक्लिंग, 3×3 व्हीलचेयर बास्केटबॉल, पैरा बाउल्स और पैरा पावरलिफ्टिंग की स्पर्धाएं आयोजित होंगी।


भारत का 92 वर्षों का सफर 

भारत ने पहली बार 1934 के लंदन राष्ट्रमंडल खेलों में भाग लिया था। भारतीय दल में केवल छह खिलाड़ी थे। पहलवान राशिद अनवर ने पुरुषों की 74 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का पहला पदक दिलाया।

भारत अब तक केवल चार संस्करणों—1930, 1950, 1962 और 1986—में हिस्सा नहीं ले सका। बाकी सभी संस्करणों में भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार बेहतर प्रदर्शन किया है।

1934 से 2022 तक भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में 564 पदक जीते हैं, जिनमें 203 स्वर्ण, 190 रजत और 171 कांस्य पदक शामिल हैं। पदक तालिका में भारत चौथे स्थान पर है।

महान धावक मिल्खा सिंह 1958 में कार्डिफ राष्ट्रमंडल खेलों में 440 यार्ड दौड़ में जीतकर स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने। वहीं, निशानेबाज जसपाल राणा 15 पदकों के साथ राष्ट्रमंडल खेलों के सबसे सफल भारतीय खिलाड़ी हैं।


दिल्ली 2010 रहा स्वर्णिम अध्याय


भारत ने 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों की सफल मेजबानी की थी। यह भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा, जब भारतीय खिलाड़ियों ने 38 स्वर्ण, 27 रजत और 36 कांस्य सहित कुल 101 पदक जीतकर पदक तालिका में दूसरा स्थान हासिल किया था।


भारत का प्रदर्शन 

प्रथम हैमिल्टन 1930 भाग नहीं लिया 

लंदन 1934 - 1 कांस्य 12वां स्थान  

सिडनी 1938 शून्य पदक 

1950 भाग नहीं लिया 

वैंकूवर 1954  शून्य पदक

-

कार्डिफ 1958

2 स्वर्ण  1 रजत आठवां स्थान 

1962 भाग नहीं लिया 

किंग्स्टन 1966 छठा स्थान

3 स्वर्ण, 4 रजत, 3 कांस्य


एडिनबरा 1970 छठा स्थान

5 स्वर्ण, 3 रजत, 4 कांस्य 

क्राइस्टचर्च 1974 छठा स्थान

4 स्वर्ण, 8 रजत, 3 कांस्य 

एडमंटन 1978 छठा स्थान

5 स्वर्ण, 4 रजत, 6 कांस्य


ब्रिस्बेन 1982 छठा स्थान

5 स्वर्ण, 8 रजत, 3 कांस्य 

1986 में भाग नहीँ लिया


ऑकलैंड 1990 पांचवां स्थान

13 स्वर्ण, 8 रजत, 11 कांस्य


विक्टोरिया 1994 छठा स्थान

6 स्वर्ण, 11 रजत, 7 कांस्य


क्वालालंपुर 1998 सातवां स्थान 

7 स्वर्ण, 10 रजत, 8 कांस्य


मैनचेस्टर 2002 चौथा स्थान

30 स्वर्ण, 22 रजत, 17 कांस्य


मेलबोर्न 2006 चौथा स्थान

22 स्वर्ण, 17 रजत, 11 कांस्य


नई दिल्ली 2010 दूसरा स्थान

38 स्वर्ण, 27 रजत, 36 कांस्य


ग्लासगो 2014 पांचवां स्थान

15 स्वर्ण, 30 रजत, 19 कांस्य


गोल्ड कोस्ट 2018 तीसरा स्थान

26 स्वर्ण, 20 रजत, 20 कांस्य


बर्मिंघम 2022 चौथा स्थान

22 स्वर्ण, 16 रजत, 23 कांस्य 


कुल- 203 स्वर्ण, 190 रजत, 171 कांस्य

कुल 564


भारत की उम्मीद 

 ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत के सामने पिछली बार जैसा प्रदर्शन दोहराने की बड़ी चुनौती होगी। इस बार खेलों की संख्या 20 से घटाकर 10 कर दी गई है, जिससे भारत के पारंपरिक पदक दिलाने वाले कई खेल कार्यक्रम से बाहर हो गए हैं। ऐसे में भारतीय दल की सबसे बड़ी उम्मीदें एथलेटिक्स, मुक्केबाजी, भारोत्तोलन और पैरा स्पोर्ट्स पर टिकी हैं।

बर्मिंघम 2022 में भारत ने 61 पदक जीतकर पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया था। इनमें से लगभग 30 पदक कुश्ती, निशानेबाजी, बैडमिंटन, हॉकी और टेबल टेनिस जैसे खेलों से मिले थे, जिन्हें इस बार प्रतियोगिता में शामिल नहीं किया गया है। इसके चलते भारत का कुल पदक आंकड़ा पिछली बार की तुलना में कम रहने की संभावना जताई जा रही है।

भारत ने इस बार 125 खिलाड़ियों का दल भेजा है, जिसमें 101 खिलाड़ी मुख्य स्पर्धाओं और 24 पैरा स्पर्धाओं में भाग लेंगे। सबसे बड़ा दल एथलेटिक्स का है। ओलंपिक चैंपियन नीरज चोपड़ा, लंबी कूद के मुरली श्रीशंकर, पारुल चौधरी, भारोत्तोलन में मीराबाई चानू तथा मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन जैसे अनुभवी खिलाड़ियों से स्वर्ण पदकों की उम्मीद की जा रही है। जूडो और आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स में भी भारत के पदक जीतने की संभावना है, जबकि पैरा एथलीटों से 5 से 6 पदक मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

खेल मंत्रालय ने खिलाड़ियों की तैयारियों, विदेशी प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं पर 53 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, ताकि सीमित स्पर्धाओं के बावजूद भारतीय खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

विशेषज्ञों का मानना है कि खेलों की संख्या कम होने और भारत के मजबूत खेलों के बाहर होने के कारण इस बार 61 पदकों का आंकड़ा दोहराना आसान नहीं होगा। फिर भी एथलेटिक्स, भारोत्तोलन, मुक्केबाजी और पैरा स्पोर्ट्स में मजबूत प्रदर्शन के दम पर भारत के लगभग 40 से 45 पदक जीतने और पदक तालिका में शीर्ष पांच देशों में स्थान बनाए रखने की उम्मीद है।

2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी भारत के अहमदाबाद को मिली है। ऐसे में ग्लासगो 2026 भारतीय खिलाड़ियों के लिए केवल पदक जीतने का अवसर ही नहीं, बल्कि घरेलू राष्ट्रमंडल खेलों की तैयारी का भी महत्वपूर्ण पड़ाव होगा। हालांकि, कई पारंपरिक खेलों की अनुपस्थिति के कारण इस बार भारत के लिए शीर्ष-5 में स्थान बनाए रखना आसान नहीं होगा।


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