जशपुर मूनादी ।। छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा सवाल जो सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहा है।45 दिन पहले जिस मरीज की मौत हो चुकी उसे मेडिकल कॉलेज ने बताया स्वस्थ और स्वस्थ होकर घर लौटने की बधाई भी दे डाली।
जशपुर जिले की एक सरकारी स्टाफ नर्स सीमा कुजूर के सोशल मीडिया पोस्ट ने छत्तीसगढ़ की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और आयुष्मान भारत योजना पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि सरकारी अस्पतालों की पारदर्शिता और मरीजों के रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ दिखाई दे रहा है।
सरकारी नर्स सीमा कुजूर ने अपने फेसबुक पोस्ट में दावा किया है कि उनके पति देवनारायण राम को 26 जून 2026 को गंभीर बीमारी के बाद राजमाता श्रीमती देवेंद्र कुमारी सिंहदेव शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान 30 जून 2026 को उनके पति की मृत्यु हो गई।
लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि 6 अगस्त 2026 को उनके मोबाइल पर आयुष्मान सारथी की ओर से एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें लिखा था कि "हमें खुशी है कि आप स्वस्थ होकर अपने घर लौट गए हैं।" संदेश में डिस्चार्ज की तारीख 6 अगस्त 2026 और अस्पताल में 42 दिन भर्ती रहने का भी उल्लेख है।
यही वह बिंदु है जिसने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।
सरकारी नर्स ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाया है—
"मेरे पति की मौत हो चुकी है, फिर यह डिस्चार्ज मैसेज किस आधार पर भेजा गया? इसका जिम्मेदार कौन है?"
क्या आयुष्मान कार्ड का दुरुपयोग हुआ है?
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के जानकार कई गंभीर आशंकाएं जता रहे हैं। यदि पोस्ट में किए गए दावे और मैसेज का विवरण सही पाया जाता है, तो यह जांच का विषय बन सकता है कि—
क्या मरीज का रिकॉर्ड समय पर अपडेट नहीं किया गया?
क्या अस्पताल के डिस्चार्ज रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई?
क्या आयुष्मान योजना के पोर्टल पर गलत जानकारी दर्ज हुई?या फिर मृत मरीज के नाम पर इलाज अथवा क्लेम की प्रक्रिया जारी रही?
इन सभी सवालों के जवाब केवल आधिकारिक जांच के बाद ही सामने आ सकते हैं। फिलहाल आयुष्मान कार्ड घोटाले का दावा सिद्ध नहीं हुआ है, लेकिन परिस्थितियां गंभीर जांच की मांग जरूर कर रही हैं।
राज्य स्तर का मुद्दा क्यों?
यह मामला इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि—
शिकायत करने वाली स्वयं सरकारी नर्स हैं।
मामला सरकारी मेडिकल कॉलेज से जुड़ा है।
प्रश्न आयुष्मान भारत योजना और सरकारी स्वास्थ्य डेटा की विश्वसनीयता पर उठ रहे हैं।
यदि रिकॉर्ड में गड़बड़ी साबित होती है, तो इसका असर पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ सकता है।
उठ रहे बड़े सवाल
मौत के बाद डिस्चार्ज का संदेश कैसे जारी हुआ?
मरीज के रिकॉर्ड में मृत्यु दर्ज क्यों नहीं हुई?
यदि हुई, तो फिर सिस्टम ने "स्वस्थ होकर घर लौटने" का संदेश क्यों भेजा?
क्या इस मामले में आयुष्मान योजना के क्लेम की जांच होगी?
स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन क्या कार्रवाई करेंगे?
यह मामला अब केवल एक परिवार की पीड़ा नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही का प्रश्न बनता जा रहा है। पूरे मामले में मेडिकल कॉलेज, आयुष्मान प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया तथा निष्पक्ष जांच का इंतजार रहेगा।