रायगढ़ मुनादी।। नटवर स्कूल गैस कांड में एक नया एंगल सामने आ रहा है। घटना के ठीक 10 मिनट पहले बच्चे मिड डे मील खा रहे थे। इस दौरान हादसा होता तो यह और भी ज्यादा भयावह हो सकता था। इस बात को लेकर लोगों के मन में थोड़ी राहत भी है कि हादसा कुछ देर से हुआ।
शनिवार को हुए हादसे के बाद पूरा शहर दहशत में है। हादसे में कई तरह की लापरवाहियां सामने आ रही है। 3 गैस की टंकियां लेकर लोग स्कूल परिसर में ही गुब्बारा फुलाने का काम कर रहे थे। लेकिन इसपर किसी की नजर नहीं पड़ी। आयोजक जिन्होंने आंख बंद कर सबकुछ सही मान लिया था। जिनमें अग्रसेन महोत्सव आयोजन समिति, स्कूल प्रशासन, जिला प्रशासन सहित सभी के गैर जिम्मेदाराना रवैए के कारण यह हादसा हुआ।
हादसे में अभी तक दो लोगों ही घायल हुए हैं। यह खुशकिस्मती रही की घटना के कुछ देर पहले ही बच्चो ने अपना मिड डे मील समाप्त किया था। ऐसे में बच्चों के परिजन इस घटना के परिणाम को सोचकर ही बार - बार घबरा जाते हैं। फिलहाल सबको प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार है जिसमें जिम्मेदारों को सामने लाकर उनके विरुद्ध कठोर करवाई की जाएगी।
स्कूल में गैस सिलेंडर से काम प्रशासन को पता भी नहीं
इस मामले में स्कूल प्रशासन की गलती सामने आ रही है। डीईओ आरपी आदित्य का कहना है की उन्होंने स्कूल प्रांगण में कोई अनुमति नहीं दी थी। दूसरी तरफ 3 गैस सिलेंडर लेकर मजदूर स्कूल परिसर में ही काम कर रहे थे। लेकिन स्कूल प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्कूल की प्रिंसिपल आर एस वर्गीस भी मीडिया के सामने बयान देने से बच रही हैं। जबकि काम उनके स्कूल में उपस्थित रहने के दौरान ही हो रहा था।
जिला प्रशासन ने मान लिया सब ठीक होगा
जिला प्रशासन से एसडीएम गगन शर्मा ने इस घटना को बेहद दुखद बताया है। लेकिन घटना से पहले जब आयोजन समिति ने उनसे परमिशन मांगी तो आंख मूंदकर अनुमति दे दी गई। एक बार भी आयोजन स्थल और वहां चल रहे काम का मुयाआना नहीं किया गया। अब जांच के लिए टीम बनाई जा रही है। मामले में तत्काल जिम्मेदारों पर करवाई करने की बात कही जा रही है।
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आयोजन समिति ने कहा हमने बस गुब्बारा फुलाने का काम दिया
आयोजन समिति के सदस्य मीडिया से बात कर रहे थे। उनका कहना है की हमने एक हजार गुब्बारा फुलाने का काम दिया था। लेकिन मजदूर गुब्बारा फुलाने का काम कहां कर रहे थे। इस बात की जानकारी उन्हें नहीं थी। जबकि कोई भी आयोजन हो वहां होने वाली गतिविधियों की जिम्मेदारी आयोजन समिति की ही होती है। जैसा कोरोना के दौरान पंडालों में भीड़ की जिम्मेदारी भी समितियों को दी जाती थी। तब ऐसे घटना में आयोजन समिति से प्रशासन कैसे डील करेगा। यह देखने योग्य होगा।