रायगढ़ मुनादी।। जिले के दूरस्थ और आदिवासी अंचलों से चुनकर जिला और प्रदेश की राजनीति में पहुंचे जनप्रतिनिधियों के सामने एक ऐसी समस्या है, जिसका सीधा असर उनसे मिलने पहुंचने वाली जनता पर पड़ रहा है।


जिला मुख्यालय में आवास की सुविधा नहीं होने के कारण आदिवासी समाज से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से मिलने आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब इस मुद्दे को पूर्व भाजपा नेता रवि भगत ने उठाते हुए कलेक्टर से इन जनप्रतिनिधियों के लिए जिला मुख्यालय में शासकीय आवास उपलब्ध कराने की मांग की है।
रवि भगत ने कलेक्टर रायगढ़ को दिए पत्र में आदिवासी समाज से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की पात्रता और लागू शासकीय नियमों के अनुसार जिला मुख्यालय में उचित शासकीय आवास उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
पत्र में सांसदों और जिला पंचायत उपाध्यक्ष का उल्लेख
कलेक्टर को दिए पत्र में रवि भगत ने कहा है कि रायगढ़ जिले के आदिवासी समाज से निर्वाचित जनप्रतिनिधि लगातार जिले के विकास और आम जनता की समस्याओं के समाधान के लिए काम कर रहे हैं। पत्र में लोकसभा सांसद राधेश्याम राठिया, राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह और जिला पंचायत रायगढ़ के उपाध्यक्ष दीपक सिदार का उल्लेख किया गया है।
पत्र के मुताबिक जिला मुख्यालय में इन जनप्रतिनिधियों के लिए शासकीय आवास की सुविधा अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके कारण उनसे मिलने के लिए आने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
दूर गांव से आए लोग किस दरवाजे पर जाएं?
रायगढ़ जिले का बड़ा हिस्सा दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में फैला हुआ है। ऐसे में अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों से मिलने के लिए ग्रामीणों और आम नागरिकों को जिला मुख्यालय तक पहुंचना पड़ता है। लेकिन जब जिला मुख्यालय में ही जनप्रतिनिधियों के लिए स्थायी आवास की व्यवस्था न हो, तो उनसे सहज मुलाकात और अपनी समस्या रखने में लोगों को दिक्कत होना स्वाभाविक है।
रवि भगत ने अपने पत्र में इसी पहलू को प्रमुखता से उठाते हुए कहा है कि शासकीय आवास की सुविधा केवल जनप्रतिनिधियों की व्यक्तिगत सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह जनता और उसके निर्वाचित प्रतिनिधि के बीच सहज संपर्क से भी जुड़ा हुआ विषय है।
जिस मुद्दे की जरूरत थी, उसे रवि भगत ने कलेक्टर तक पहुंचाया


दिलचस्प बात यह है कि जिन जनप्रतिनिधियों के लिए जिला मुख्यालय में आवास की मांग की जा रही है, वे स्वयं इस विषय को लेकर सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। ऐसे में पूर्व भाजपा नेता रवि भगत ने पत्र के जरिए इस मुद्दे को प्रशासन के सामने रखकर एक अलग राजनीतिक-सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है।
अब सवाल प्रशासन के सामने है कि क्या जिले के निर्वाचित आदिवासी जनप्रतिनिधियों को नियमानुसार जिला मुख्यालय में शासकीय आवास उपलब्ध कराया जाएगा? और अगर आवास उपलब्ध कराया जाता है तो क्या इससे दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाली जनता के लिए अपने प्रतिनिधियों तक पहुंच आसान होगी?
फिलहाल गेंद जिला प्रशासन के पाले में है।