जशपुर मुनादी।। जिले के कांसाबेल के टंगरगाव में स्थापित होने वाले माँ कुदरगढी स्टील प्लांट की जमीन पर गांव के लोगों के ट्रैक्टर से जुताई कर धान बोने की रणनीति सफल नही हो पाई ।किसानों ने सिम्बोलिक तौर पर जमीन में धान के बीज छीट दिए लेकिन ट्रेक्टर से खेत की जुताई नहीं हो पाई ।स्थानीय नेताओं के आह्वान पर टंगरगाव में बुधवार को सैंकड़ो की संख्या में ग्रामीण इकट्ठे हुए ।ग्रामीणों की बैठक भी हुई लेकिंन खेत की जुताई नहीं हो पाई
आपको बता दें कि बीते वर्ष जबसे यहां स्टील प्लांट खोलने की बात सामने आयी तबसे यहाँ कुछ लोगो के नेतृत्व में प्लांट लगाने का विरोध शुरू हो गया ।इस विरोध को तब और हवा मिल गई जब पूर्व मंत्री गणेश रामभगत ने इस आंदोलन की अगुवाई शुरू कर दी ।इनके आगे आते ही आंदोलन को एक बड़ी ताकत मिल गयी और प्लांट लगने से पूर्व शासन के द्वारा रखी गयी जनसुनवाई की तारीख को आखिरकार जिला प्रशासन को टालना पड़ गया।
जनसुनवाई टलने के बाद भी विवाद खत्म नही हुआ बल्कि आंदोलन में और ज्यादा उबाल आने लगा ।हर रोज गाँव मे बैठके शुरू होनी शुरू हो गई ।कुछ ग्रामीण महिलाये डंडा लाठी लेकर मैदान में उतर गई ।ऐसे हालात को देखकर प्रशासन के द्वारा दुबारा जनसुनवाई की तारीख की घोषणा नहीं की गई ।
फिर से भड़की आग
अब फिर से इस आंदोलन में तेजी आनी शुरू हो गई है ।सोमबार को गाँव मे मुनादी करा दी गयी कि बुधवार को सभी गाँव के लोग टंगरगाव में जमा होंगे और माँ कुदरगढी स्टील प्लांट की सौ एकड़ जमीन पर धान की बोवाई की जाएगी । आंदोलन की अगुवाई कर रहै नेताओ ने बयान ढिये कि उंक्त जमीन उनके पूर्वजो की है इस जमीन पर केवल उनका हक है इसलिए बुधवार को 10 गाँव के लोग यहाँ जमा हो गए ।सभी ने उद्योव विरोधी नारे लगाते हुए गाँव मे बैठ रही फैक्ट्री का पुरजोर विरोध किया ।इनका कहना है कि इनके पूर्वजो की जमीन पर केवल गाँव वालों का हक़ चलेगा ।
यहां भारी संख्या में भेजे गए पुलिस जवान
ग्रामीणों के इस एलान के बाद कानून व्यवस्था को कायम रखने के लिए बुधवार को सुबह सुबह भारी संख्या में पुलिस बल को कांसाबेल भेज दिया गया। पूलिस बल हांलाकि टंगरगाव नहीं गई लेकिन कांसाबेल से ही हर गतिविधियों पर पूलिस नजर बनाए हुई थी ।पूलिस ने बताया कि ग्रामीणों की बैठक भी हुई और लोग जुटे भी लेकिन तो जमीन पर हल चला न धान की बोवाई हूई।
बताया जा रहा है कि पुलिस बुधवार को हर परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयाए बैठी थी और यह संदेश आंदोलन के अगुवा नेताओ तक पहुंच चुका था इस वजह से आंदोलन के रुख को बदलना पड़ गया ।जमीन की जुताई के लिए दूसरी रणनीति बनाने का एलान किया गया ।
मुख्य्मंत्री के सामने भी जताया था विरोध,सीएम ने कही थी ये बात-----
यह भी गौरतलब है कि बीते जून माह में मुख्य्मंत्री भुपेश बघेल के भेंट मुलाकात कार्यक्रम में टाँगर गाँव और आस पास के गाँव के कुछ लोगों ने अपने गाँव मे लग रहे स्टील प्लांट का विरोध किया था ।उन्होंने मुख्य्मंत्री से आग्रह किया था कि टंगरगाव में स्टील प्लांट न लगने दिया जाय।
"उद्योग लगेंगे तो रोजगार मिलेंगे"
ग्रामीणों की पूरी बात सुनने के बाद मुख्य्मंत्री ने ग्रामीणों को कहा था कि गांव में प्लांट तभी लगेगा जब गाँव के लोग चाहेंगे ।ग्राम सभा की अनुमति होगी तभी प्लांट लगने की अनुमति मिलेगी।हांलाकि सीएम ने ग्रामीणों को सम्बोधित करते हुए यह भी कहा था कि मिनरल के उद्योग आएंगे तो लोगो को रोजगार के अवसर मिलेंगे।उन्होंने रायगढ़ ,रायपुर,बिलासपुर एवं प्रदेश के अन्य शहरों का उदाहरण देते हुए कहा था कि इन शहरों में लोगो को रोजगार मिल रहे है।
विधायक रामपुकार ने कहीं थी ये बात
कांसाबेल के टाँगरगाव में लग रहे माँ कुदरगढी स्टील प्लांट का भाजपा ने भारी विरोध किया था।भाजपा सांसद और भाजपा नेताओं की एक जाँच कमेटी भी इसके लिए बनाई गई थी।पर्यावरण को भारी नुकसान का हवाला देते हुए भाजपा नेताओं ने कहा था कि जशपुर को रायगढ़ नहीं बनने देंगे ।विपक्षी पार्टी भाजपा के विरोध के बाद काँग्रेस के जनप्रतिनिधि भी प्लांट के बिरोध में आ गए ।हांलाकि इस क्षेत्र के विधायक रामपुकाद सिंह की ओर से प्लांट के विरोध में कोई बयान नहीं आया बल्कि उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि जनसुनवाई होनी चाहिए तभी जनभावना का पता चलेगा और जनभावना के अनुरूप ही काम होगा।
पूलिस मदद नही कर रही -उद्योग मालिक
इधर इस मामले में जमीन मालिक सुनील अग्रवाल का कहना है कि उनकी रजिस्ट्री की जमीन पर कोई कब्जा कैसे कर सकता है। उद्योग लगाने का विरोध कर सकते है परंतु कोई हमारी जमीन पर हमें खेती करने से मना कैसे कर सकता है ?उन्होंने बताया कि उनके द्वारा जमीन पर प्लांट तबतक नहीं लगाया जा सकता जबतक की जनसुनवाई नहीं हो जाती इसलिए उन्होंने अपनी जमीन पर खेती करने का फैसला लिया लेकिन यहाँ उन्हें खेती भी करने नही दी जा रही है और पुलिस प्रशासन उनकी कोई मदद नहीं कर रहा है ।