रायगढ़ मुनादी।। केंद्र सरकार की जिस महत्वाकांक्षी योजना "अमृत सरोवर" को जल संरक्षण और ग्रामीणों की समृद्धि के लिए करोड़ों की लागत से तैयार किया गया था, उसे NHAI के भारतमाला सड़क परियोजना की निर्माण कंपनी दिलीप बिल्डकॉन के अनैतिक गतिविधियों में ने लील लिया है। मामला रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत सिसरिंगा के घाट का है, जहाँ अब "अमृत सरोवर" का नामोनिशान मिट चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस गंभीर गड़बड़ी पर सत्ता पक्ष के नेताओं ने पूरी तरह से चुप्पी साध रखी है।

विभागीय जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: ग्रामीणों का आरोप हुआ सच साबित
यह कोई हवा-हवाई आरोप या केवल ग्रामीणों का गुस्सा नहीं है, बल्कि खुद शासकीय तंत्र की आंतरिक जांच ने इस महाघोटाले पर मुहर लगा दी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए धरमजयगढ़ जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) एम. एल. साहू ने एक विस्तृत और आधिकारिक जांच की।
जांच के बाद जिला पंचायत सीईओ को भेजे गए प्रतिवेदन (रिपोर्ट) में जो सच सामने आया है, वह चौंकाने वाला है। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है:
"अमृत सरोवर के मेढ़ से मिट्टी काटकर भारतमाला सड़क निर्माण कार्य में उपयोग किया गया, जिसके कारण पूरा का पूरा अमृत सरोवर अब लुप्त (गायब) हो चुका है।"
इस सरकारी दस्तावेज ने साफ कर दिया है कि सड़क बनाने वाली कंपनी ने अपने फायदे के लिए सरकारी संपत्ति और जलस्रोत को पूरी तरह तबाह कर दिया।
दोषी कंपनी पर दर्ज हो FIR, वसूला जाए हर्जाना" – राजेश त्रिपाठी, सामाजिक कार्यकर्ता
अमृत सरोवर के इस तरह गायब होने के बाद क्षेत्र के पर्यावरण और सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला मुख्यालय के प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और उद्योगों की अनैतिक गतिविधियों के खिलाफ हमेशा मुखर रहने वाले राजेश त्रिपाठी ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है।
राजेश त्रिपाठी का कहना है कि किसी भी विकास कार्य के नाम पर सरकारी संपत्ति को नुकसान नहीं पहुँचाया जा सकता। यदि ऐसा हुआ है, तो यह सीधे तौर पर एक आपराधिक कृत्य है। उन्होंने मांग की है कि दोषी निर्माण कंपनी के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। सरकारी संपत्ति को नष्ट करने के एवज में कंपनी से कड़ी क्षतिपूर्ति (जुर्माना) वसूल की जाए। साथ ही इस लापरवाही में शामिल ज़िम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो।
बड़े चेहरों की चुप्पी पर सवाल: क्या मिलेगी प्रतिक्रिया?
इतने बड़े मामले के उजागर होने और सरकारी रिपोर्ट में पुष्टि होने के बाद भी अब तक ज़िम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक मुखिया की रहस्यमयी चुप्पी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पूरे घटनाक्रम में निम्नलिखित प्रमुख चेहरों की प्रतिक्रिया बेहद अहम और अपेक्षित है। राधेश्याम राठिया (सांसद): केंद्र सरकार की योजना के इस हश्र पर उनकी क्या प्रतिक्रिया होगी? उमेश पटेल (पूर्व शिक्षा मंत्री एवं वर्तमान खरसिया विधायक): विपक्ष के इस कद्दावर नेता का इस मुद्दे पर क्या स्टैंड है। लालजीत सिंह राठिया (स्थानीय विधायक): उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में ग्रामीणों के हक पर हुए इस डाके पर वे क्या कदम उठा रहे हैं? कलेक्टर (रायगढ़): आधिकारिक जांच रिपोर्ट टेबल पर आने के बाद ज़िला प्रशासन दोषी कंपनी पर क्या एक्शन लेता है?
इन सभी प्रमुख जनप्रतिनिधियों और ज़िला कलेक्टर से इस संबंध में संपर्क साधकर उनकी प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया जा रहा है। जैसे ही उनकी आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होगी, उसे आगामी रिपोर्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
बने रहिए हमारी अगली कड़ियों के साथ, जहाँ हम इस मामले से जुड़े हर प्रशासनिक अपडेट और कार्रवाई की हकीकत आप तक पहुँचाएंगे।