रायगढ़ मुनादी।। (घायल सुरेश चौहान ने जैसा मुनादी को बताया)

सुबह मेरे पास सुशील आया और बोला की नटवर स्कूल में काम है। गुब्बारे फुलाकर रखने है। 1000 गुब्बारे फुलाने का टारगेट है। मैं (सुरेश चौहान) और सुशील पटेल दोनों सुबह से ही गुब्बारे में गैस डालने के काम में व्यस्त थे। दो गैस की टंकियां गर्म हो चुकी थी। दोनों को ठंडा करने के बाद तीसरे में काम चल रहा था। तीसरा भी अत्यधिक गर्म हो गया था। जिसे ठंडा करने जल्द ही उसमे पानी डालने वाले थे। कुछ ही देर में लगभग 2.30 बजे अचानक से धमाका हुआ। मेरे सामने सुशील का पैर अलग हो गया। मुझपर भी गर्म पानी की बूंदें पड़ी थी। सुशील तड़प रहा था। मैं उसकी मदद करना चाह रहा था लेकिन अचानक बम जैसे धमाके से मैं अचेत हो गया था। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था। इसी बीच एंबुलेंस आई और हम दोनों को अस्पताल लेकर आ गई।
नटवर स्कूल परिसर में हुए हादसे के बाद मुनादी की टीम ने अस्पताल में इलाजरत सुरेश चौहान से बात की। सुशील पटेल को ओटी (ऑपरेशन थिएटर) में ले जाया गया था। सुरेश को होश आ चुका था। उसे बस मामूली चोट ही आई थी। मुनादी की टीम ने सुरेश से बात करने की कोशिश की। डॉक्टर विनोद एक्का ने बताया की वह बात करने की स्थिति में है। सुरेश से बात करने पर पता चला की वह पहली बार इस काम के लिए आया था। वह जानता था की सुशील काफी दिनों से आयोजनों में गुब्बारे सजावट करने का काम लेता है। शनिवार को दोनों रायगढ़ के नटवर स्कूल में काम कर रहे थे। इसी दौरान यह हादसा हो गया। सुरेश को थोड़ा भी अंदाजा नहीं था की इस काम में इतना खतरा हो सकता है। जब उसने सुशील को अपने सामने तड़पते देखा तो उसका दिल दहल गया। घटना के बाद से वह लगातार अपने साथी सुशील के सलामती की दुआ कर रहा है। सुरेश ने मुनादी को बताया की वह ठीक है। उसके हाथों में थोड़ी चोट आई है। वह इस वक्त फिक्रमंद है तो बस सुशील को लेकर। क्योंकि डॉक्टरों से उसे अच्छी खबर नहीं मिल रही है।
अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं
घटना के बाद से अभी तक घायल की स्थिति स्पष्ट नहीं की जा रही है। शुरुआत में डॉक्टरों की टीम ने कहा था की घाल की स्थिति चिंता जनक है। लेकिन अभी डॉक्टर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। दूसरी तरफ सुनील लेंध्रा द्वारा 5 लाख की सहायता राशि देने की घोषणा के बाद परिजनों को थोड़ी राहत मिली है।
बुजुर्ग पिता और नाबालिग बेटा भगवान के सामने मन्नत कर रहे
मेकाहारा में घायल के पिता और नाबालिग बेटे दोनों से मुनादी ने बात की। पिता इस घटना से स्तब्ध हैं। 14 साल का बेटा किसी तरह अपने पिता को घर ले जाना चाहता है। गांव से भी कई लोग शाम तक अस्पताल पहुंच चुके थे। आपातकाल स्थिति के लिए बनाए गए वार्ड के बाहर पूरा गांव घायल की सलामती के लिए दुआएं मांग रहा था। पिता बार बार रोकर अपने बेटे को एक बार देखने की जिद कर रहे थे। लेकिन ओटी में होने के कारण उन्हें अस्पताल प्रबंधन से स्टाफ आकार सांत्वना देने में लगे हुए थे।