चुपके चुपके दबे पांव बना दिया पत्रकार भवन ! 3 साल बाद हुआ हुआ खुलाशा तो पत्रकारों के उड़े होश ! पत्रकारों के साथ हो गया "बड़ा खेला" !

munaadi news image
October 23, 2026



चुपके चुपके दबे पांव बना दिया पत्रकार भवन ! 3 साल बाद हुआ हुआ खुलाशा तो पत्रकारों के उड़े होश ! पत्रकारों के साथ हो गया "बड़ा खेला" !

munaadi news image

जशपुर मूनादी ।। अधिवक्ता संघ की लाइब्रेरी  विवाद के बाद  अब पत्रकारों के लिए बनाया गया पत्रकार भवन भी  विवादों के व्यूह में फँसकर रह गया है ।कहा जा रहा है कि जनपद द्वारा कुनकुरी जनपद कार्यालय कैम्पस में पत्रकार भवन बनाया गया है । भवन 3 साल से बनकर तैयार भी है लेकिन पत्रकार संघ को  न तो पत्रकार भवन बनाने की जानकारी दी गई न ही पत्रकारो को भवन बनने के बाद भवन बनने की जानकारी दी गई याने प्रेस क्लब कुनकुरी को यह पता भी नहीं था कि उनका भवन बन रहा है । उससे भी बड़ी बात ये कि भवन जब 3 वर्षो से बनकर तैयार है तो भी पत्रकारों को न तो इसकी जानकारी दी गई न ही उन्हें भवन सुपुर्द किया गया । 

Advertisement

प्रेस क्लब के सदस्यों ने बताया कि अगर भवन पत्रकारों के लिए बनाया जा रहा था तो प्रेस क्लब कुनकुरी को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई ? 3 वर्षो तक भवन की जानकारी पत्रकारों से क्यों छिपा कर रखा गया ? 3 वर्षो से भवन बनकर तैयार होने के बावजूद आखिर पत्रकारों को भवन सुपुर्द क्यों नहीं किया गया ?  

      

मूनादी चौपाल ने जब इस  खबर को प्रमुखता से  प्रसारित किया तो प्रशासन की नींद खुली और पत्रकारों को पत्रकार भवन की चाबी सुपुर्द करने कहा गया लेकिन प्रेस क्लब ने पत्रकार भवन की चाबी लेने से इनकार कर दिया । प्रेस के सदस्यों का कहना है कि प्रेस क्लब के साथ धोखा हुआ है । 2023 के विधानसभा चुनाव से पूर्व प्रदेश के तात्कालीन मुख्यमन्त्री भूपेश बघेल ने प्रेस क्लब कुनकुरी की मांग पर 10 डिसमिल जमीन और भवन के लिए 15 लाख की घोषणा की थी । पत्रकारों को सलिहा टोली में 10 डिसमिल जमीन दिखाया गया था लेकिन  रजिस्ट्री के लिए शासन द्वारा निर्धारित राशि जमा करने को लेकर बात फँस गई थी लेकिन सवाल यह है कि जिस जमीन पर पत्रकार भवन बनाया गया उस जमीन का रजिस्ट्री शुल्क किसने जमा कर दिया ? और अगर बगैर रजिस्ट्री शुल्क के ही भवन के लिए  जमीन मिलना था तो पत्रकारों से सलिहाटोली  की जमीन के लिए रजिस्ट्री शुल्क का नियम क्यों बताया गया ? और सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि चुपके चुपके दबे पांव पत्रकार भवन बनाने के पीछे क्या मजबूरी थी?  किसके इशारे पर पत्रकारों को धोखे में रखा गया? या फिर पत्रकार भवन भी कमीशनखोरी की भेंट चढ़ गया ?


munaadi news image
munaadi news image
munaadi news image
munaadi news image

Related Post

Advertisement

Samvad Advertisement
× Popup Image




Trending News