रायगढ़/खरसिया मुनादी।। खरसिया के टाउन हॉल मैदान में संचालित मीना बाजार में झूले से गिरकर हुई नकुल निषाद की मौत का मामला और कथित राजीनामे तक सिमटता नजर आ रहा है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नोटरी के सामने समझौता हो जाने भर से मामला खत्म नहीं होगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर मीना बाजार संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हादसे के बाद झूलों की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन की निगरानी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
घटना 20 अक्टूबर 2026 की बताई गई है। जानकारी के मुताबिक, पुसौर निवासी और वर्तमान में खरसिया में रह रहे नकुल निषाद अपने बच्चों को मीना बाजार में झूला झुलाने लेकर गए थे। इसी दौरान झूले का लॉकिंग सिस्टम खुलने से वह ऊंचाई से नीचे गिर गए। हादसे में उनकी मौत हो गई और परिवार की खुशियां मातम में बदल गईं।
दो लाख रुपये में राजीनामे की चर्चा, लेकिन क्या खत्म हो गई जिम्मेदारी?
हादसे के बाद मृतक के परिवार और मीना बाजार संचालक दीपक मौर्य के बीच दो लाख रुपये में राजीनामा होने की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि घटना के अगले ही दिन मृतक की पत्नी को नोटरी के समक्ष ले जाकर समझौता कराया गया। हालांकि, इस समझौते की परिस्थितियों और इसके कानूनी प्रभाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
एक मजदूर परिवार के लिए दो लाख रुपये की रकम उसके जीवन में आए स्थायी खालीपन की भरपाई नहीं कर सकती। मृतक के बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आपसी समझौते के आधार पर हादसे की जिम्मेदारी और सुरक्षा संबंधी संभावित चूक की जांच को समाप्त माना जा सकता है?
पुलिस के बयान से स्पष्ट है कि फिलहाल ऐसा नहीं है। हादसे की परिस्थितियों और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर किया जाएगा।
हादसे के बाद भी जारी रहा मीना बाजार का संचालन, सुरक्षा पर सवाल
इस घटना के बाद मीना बाजार के झूलों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हादसे में लॉकिंग सिस्टम खुलने की बात सामने आई है, ऐसे में यह जांच जरूरी है कि झूले का संचालन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हो रहा था या नहीं। झूले की तकनीकी स्थिति, सुरक्षा उपकरणों और संचालन में बरती गई सावधानियों की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे क्या कारण थे।
स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि जब एक व्यक्ति की जान चली गई, तो जांच पूरी होने तक झूलों और अन्य उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए? क्या सभी झूलों की तकनीकी जांच की गई और क्या संचालन की अनुमति से संबंधित जरूरी दस्तावेजों का सत्यापन हुआ?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे। फिलहाल, हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और जिम्मेदारी तय करने की मांग महत्वपूर्ण हो गई है।
गरीब परिवार की बेबसी और जवाबदेही का सवाल
घटना के अगले ही दिन दो लाख रुपये में समझौता होने की चर्चा ने मामले को और गंभीर बना दिया है। यदि परिवार ने आर्थिक या अन्य दबावों के बीच समझौता किया हो, तो उसकी परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है। हालांकि, दबाव में समझौता कराने का आरोप अभी स्वतंत्र रूप से प्रमाणित नहीं है।
मृतक की पत्नी और बच्चों के लिए आर्थिक सहायता तत्काल राहत दे सकती है, लेकिन उससे हादसे की जिम्मेदारी अपने-आप समाप्त नहीं हो जाती। सार्वजनिक स्थल पर संचालित मनोरंजन के साधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और लापरवाही पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करना प्रशासन की जवाबदेही का हिस्सा है।
एसडीओपी का बयान: पीएम रिपोर्ट और जांच के बाद होगी कार्रवाई
खरसिया के एसडीओपी सतीश भार्गव ने कहा कि नोटरी के सामने राजीनामा करा लेने से मामला समाप्त नहीं हो जाता। इस मामले में मर्ग कायम किया गया है। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। वहीं, एसडीएम द्वारा जांच कमेटी भी गठित की गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद मीना बाजार संचालक के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अब जांच पर टिकी निगाहें
नकुल निषाद की मौत के मामले में अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रशासनिक जांच महत्वपूर्ण होंगी। जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि झूले का लॉकिंग सिस्टम कैसे खुला, सुरक्षा में कोई चूक हुई या नहीं और हादसे के लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है। पुलिस और प्रशासन की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की स्थिति साफ होगी।
सवाल सिर्फ दो लाख रुपये के राजीनामे का नहीं, बल्कि यह है कि क्या हादसे की पूरी जांच होगी, जिम्मेदारी तय होगी और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी?
