जशपुर मुनादी।। एक तरफ सरकार वन भूमि पर वर्षो से काबिज लोगो को पट्टा देकर उन्हें व्यवस्थित करने में लगी है तो दूसरी ओर जशपुर में वन विभाग आदिवासियों की निजी जमीन पर कब्जा करके उन्हें उनके पट्टे से बेदखल करने में लगा हुआ है । आपको यह सुनकर अजीब जरूर लग रहा होगा लेकिन जशपुर के नागलोक में एक आदिवासी परिवार के साथ वन विभाग कुछ ऐसा ही करने पर तुला हुआ है।
तपकरा गांव से लगे ग्राम पंचायत बलुआ बहार के रहने वाले विलोकन सोरेंग नाम के आदिवासी परिवार देश की आजादी के 3 साल बाद से याने 1950 से अपने पूर्वजों के नाम के पट्टे की जमीन की लड़ाई वन विभाग से लड़ रहा है। विभाग से लड़ते लड़ते इस परिवार की 2 पीढियां खत्म हो गई लेकिन इन्हे आज तक इनकी जमीन वापस नहीं मिली।
इनका कहना है कि 1950 के बाद जब जंगल वन भूमि को सुपुर्द किया गया तब वन विभाग द्वारा इनके पूर्वजों की जमीन( तकरीबन 4 एकड़ जमीन)को वन विभाग ने विभाग की जमीन बताकर अपने कब्जे में कर लिया और आज तक यह जमीन वन विभाग के कब्जे में ही है। इनके पास इनकी जमीन के सारे दस्तावेज मौजूद है ।यहां तक कि उस जमीन की ऋण पुस्तिका,किसान किताब और बी वन नक्शा खसरा भी उनके पास है लेकिन वन विभाग इन दस्तावेजों को मानने के वजाए इनकी जमीन का पट्टा निरस्त करने में लगा हुआ है । विलोकान ने बताया कि इनके पट्टे को निरस्त करने के लिए वन विभाग कलेक्टर को पत्र भी लिख चुका है लेकिन तत्कालीन कलेक्टर और एसडीएम ने साफ साफ लिखा है कि आज की तारीख में किसी के निजी पट्टे को निरस्त नहीं किया जा सकता लेकिन वन विभाग इन सबके बावजूद न तो इनकी जमीन छोड़ने को तैयार है न ही इन्हे जमीन के बदले में इन्हे मुआवजा दिया जा रहा है। इनका कहना है कि वन विभाग अगर इनकी जमीन को वापस नहीं कर सकता तो विभाग उनकी जमीन और उनकी जमीन पर उगे वन संपदाओ का मुआवजा दे दे ।मुआवजे की मांग को लेकर बीते दिनों इन्होंने फिर से कलेक्टर जनदर्शन में एक आवेदन लगाया जिसकी सुनवाई करते हुए 4 दिन पहले फिर से वन विभाग की एक टीम को जांच के लिए बलुआ बहार भेजा गया लेकिन जांच में क्या कुछ निकला इन्हे नहीं पता । विलोकन का कहना है कि वह जांच पंचनामा की प्रति मांगने रेंज ऑफिस tapkara भी गए लेकिन उन्हें पंचनामा की प्रति नहीं दी गई ।
वर्षो की इस लड़ाई के साक्षी रहे बलुआ बहार गांव के पूर्व सरपंच भुवनेश्वर सोरेंग का कहना है कि सरपंच होने के नाते वह खुद भी इन्हे जमीन वापस दिलाने का प्रयास कर चुके हैं और आज भी वह इनकी लड़ाई में इनके साथ है । न केवल उन्हें बल्कि पूरा गांव और जिले के सारे अधिकारियो को यहां तक कि वन विभाग के लोगो को भी पता है कि जिस जमीन की वन विभाग वन भूमि बता रहा है वो जमीन विलोकण के पिता नैन सुख सोरेंग और नैन सुख के पिता के पर्चे पट्टे की जमीन है लेकिन फिर भी इन्हे न तो जमीन वापस दी गई ना ही जमीन का इन्हे कोई मुआवजा मिला ।
इस मामले में डी एफ ओ जशपुर का कहना है कि जनदर्शन में आवेदन आया है इस मामले की मुझे जानकारी है ।साथ साथ यह भी जानकारी है कि उनके पास जमीन का पूरा पर्चा पट्टा भी है लेकिन टेक्निकल बात यह है कि उक्त जमीन वन क्षेत्र में दर्ज हो चुका है इसलिए तहसीलदार एसडीएम के साथ बैठकर पूरे मामले को समझना होगा फिर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
