रायगढ़ मुनादी।। जनशताब्दी अब लेट शताब्दी बन चुकी है। 4-5 घंटे की सीमा को लांघते हुए अब जनशताब्दी ने नया रिकॉर्ड बना लिया है। अब ट्रेन 12-13 घंटे विलंब से ट्रेन रायगढ़ पहुंच रही है। बीते चार दिनों से जनशत्ब्दी का यही हाल है। इसलिए अब यात्रियों का भरोसा भी उठने लगा है। जहां पहले ट्रेन में कन्फर्म बर्थ के लिए मारामारी होती थी। अब स्थिति यह है की 1890 बर्थ वाली ट्रेन में 250 यात्री भी सफर नहीं कर रहे हैं।

शुक्रवार को जनशताब्दी रायगढ़ में 12 घंटे देर से अपने निर्धारित समय गुरुवार रात 10.30 की बजाए दूसरे दिन सुबह 10.30 बजे पहुंची। यह पहली बार नहीं है। बीते चार दिनों से जनशत्ब्दी का यही हाल है। रेलवे बीते 1 साल से ट्रैक नवीनीकरण के नाम पर ट्रेनों को रद्द करते जा रही है। दूसरी ओर जो ट्रेनें चल रही है वे भी अपने निर्धारित समय से घंटों विलंब से रायगढ़ में पहुंच रही है। सबसे ज्यादा परेशानी जनशताब्दी ट्रेन को लेकर हुई है। कम दर में यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने वाली ट्रेन से यात्रियों का भरोसा उठ चुका है। लोग अब जनशताब्दी की बजाए सड़क मार्ग के रास्ते जाने में अपनी भलाई समझ रहे हैं। बिलासपुर डिवीजन की कमाई पूत कही जाने वाली ट्रेन में अब यात्री मिलना मुश्किल हो गए हैं। यात्रियों से लेकर टीटीई तक इस ट्रेन में सफर करने से कतरा रहे हैं। मुनादी ने यात्रियों से बात की। ट्रेन में गिने चुने ही यात्री सफर कर रहे हैं। यात्रियों का कहना है की वे मजबूरी में इस ट्रेन में सफर कर रहे हैं। भविष्य में वे कभी भी इस ट्रेन से सफर नहीं करेंगे।
रेलमंत्री से अपील ट्रेन का नाम बदलकर लेट शताब्दी करें
रायगढ़ में ट्रेन आने के बाद मुनादी की टीम ने यात्रियों से बात की। रायगढ़ से रायपुर के लिए सफर कर रहे परिवार ने कहा की वे सुबह 6 बजे से स्टेशन पर है। एक परिवार ने बताया की उन्हें रायपुर दोपहर तक किसी भी हाल में पहुंचना था। लेकिन ट्रेन ही रायगढ़ से 11.30 बजे छूट रही है। ऐसे में वे अपने गंतव्य तक कभी नहीं पहुंच पाएंगे। कुछ यात्रियों ने कहा की उनकी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से एक ही मांग है की इस ट्रेन का नाम बदलकर जनशताब्दी की जगह लेट शताब्दी कर दिया जाए ।
मालगाड़ियों को पास करने रोकी जा रही सुपरफास्ट
शुक्रवार को आजाद हिंद और अहमदाबाद दोनो ही ट्रेन को जमगांव और बेलपहाड़ के पास रोक कर रखा गया। जब रेलवे के अफसरों से मुनादी ने बात की तो उन्होंने इस बारे में कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया। आजाद हिंद, हावड़ा अहमदाबाद में ट्रेन में सफर कर रहे शशांक पांडे और मनीष शुक्ला ने बताया की मालगाड़ी को पास देने के लिए ट्रेनों को उक्त स्टेशनों में घंटों रोककर रखा गया है।
ऐसे समझे पूरा गणित
जनशताब्दी ट्रेन में कुल 20 डिब्बे हैं। 14 डिब्बों में हर कोच की क्षमता 103 यात्रियों की है। इस तरह से 14 डिब्बों में 1442 यात्री सफर करते हैं। इसी तरह एसी के 4 डिब्बों में हर कोच की क्षमता 73 है। मतलब 4 डिब्बों में 292 यात्री। इसी तरह बचे दो डिब्बे डी 1 और डी 15 में 206 यात्रियों की क्षमता होने के बावजूद केवल 156 यात्रियों की ही बुकिंग की जाती है। इस तरह से यह ट्रेन हर रोज 1890 यात्रियों को लेकर सफर करती थी। लेकिन ट्रेन की लेटलाटिफी के कारण अब इसमें सफर करने वाले यात्रियों की संख्या घट गई है।
हर रोज 400 यात्री करा रहे टिकट कैंसल
कुछ महीनों पहले तक ट्रेन के घंटों देर से चलने के बावजूद भी हर दिन 1500 से अधिक टिकट की बुकिंग हो रही थी। लगभग 1600 से अधिक यात्री ट्रेन में सफर कर रहे थे। लेकिन रेलवे की लगातार लापरवाही के कारण अब ट्रेन में टिकट बुकिंग की बजाए 400 से 500 यात्री टिकट रद्द कर रहे हैं। यह केवल टीटीई से रद्द करवाई गई टिकट की संख्या है। जबकि कई यात्री ऐसे हैं जो टिकट का रिफंड लेना ही नहीं चाहते। यही कारण है की अब ट्रेन में यात्रा करने वालों की संख्या 200-250 तक रह गई है।
तीन दिनों में कुल 985 यात्रियों ने किया सफर
248
310
427
तीन दिनों में कुल 1196 ने अपनी यात्रा रद्द की
345
364
487
टिकट काउंटर से कैंसिलेशन में परेशानी
हर रोज लगभग 400 टिकट रद्द हो रही है। लेकिन टिकट काउंटर से बमुश्किल 2-3 टिकट ही कैंसल हो रही है। यात्रियों का कहना है की टिकट काउंटर से उन्हें सही जानकारी नहीं दी जाती है। काउंटर में बैठे क्लर्क उन्हें भागा देते हैं। ऐसे में यात्री सफर करने को मजबूर होते हैं। या फिर उन्हें अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ती है। सबसे ज्यादा दिक्कत टिकट कैंसल करने में रायगढ़ के टिकट काउंटर में हो रही है। काम से बचने के लिए क्लर्क ऐसा करते हैं।