रायगढ़ मुनादी।। छत्तीसगढ़ में पुलिस व्यवस्था कितनी सुदृढ़ है, यह जानना हो तो रायगढ़ पुलिस का यह कारनामा जान लीजिए। बच्चों से गुंडों ने छेड़छाड़ की। किडनैप करने कोशिश की। जब इसकी शिकायत लेकर बच्चे और परिजन थाने पहुंचे तो एफआईआर करने की बजाए उन्हें घुमाया जाने लगा।
मामला धरमजयगढ़ थाने का है। शिक्षक दिवस के दिन बच्चे स्कूल से वापस आ रहे थे। इस दौरान बिट्टू सरकार और नरेंद्र मंडल अपनी कार में आए और बच्चियों से अभद्रता करने लगे। जब बच्चियों ने इसका विरोध किया तो उन्हें गाड़ी में जबरन बिठाने की कोशिश की गई। बच्चे किसी तरह जान बचाकर भागने लगे इसी बीच एक बच्चे का परिजन भी वहां पहुंचे। उन्होंने मदद करने की कोशिश की तो उनसे झड़प हुई। कॉलर पकड़कर धमकी दी गई। बात यहीं खत्म नहीं हुई। बच्चे के परिजन किसी तरह हिम्मत जुटाकर धर्माज्यगढ़ थाने में पहुंचे। बच्चे के एक परिजन ने बताया कि थाना प्रभारी नंदलाल पैंकरा ने पहले एफआईआर लिखने से मना कर दिया। बाद में थाने में बच्चों को रात 12 बजे तक बिठाकर रखा गया। इसके बाद सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत लिखी गई। परिजन के अनुसार शिकायत भी गलत लिखी गई। अब दो दिनों से परिजन थाने के चक्कर काट रहे हैं।
75 किलोमीटर दूर बच्चियों को पुलिस जीप में रायगढ़ पहुंचाया
बच्चों के परिजनों को पहले तो घुमाया गया। इसके बाद उन्हें घरघोडा जाने के लिए कहा गया। इसके बाद कहा गया की आप रायगढ़ जाइए। रायगढ़ में मजिस्ट्रेट के सामने बयान होगा। सुबह 6 बजे से बच्चों को थाने बुलाया गया। इसके बाद बच्चो को 75 किलोमीटर दूर रायगढ़ पुलिस जीप में लाया गया। अब रायगढ़ के थाने में सुबह से लेकर दोपहर 1.10 तक कोई कारवाई शुरू नहीं हुई थी। 1.20 में अजाक थाने में महिला अधिकारी सरस्वती महापत्रे बयान ने बयान लेना शुरू किया।
एक बच्चे की तबियत बिगड़ी थाने में ही अचेत
दो दिनों के आपाधापी में एक बच्ची की तबियत बिगड़ गई है। बच्ची उल्टी करते हुए रायगढ़ पहुंची। अब रायगढ़ के अजाक थाने में अचेत पड़ी हुई है। परिजन बताते हैं की बच्चे दो दिनों से सो नहीं पा रहे हैं। रह रह कर बच्चों को वह घटना याद आ रही है।
सीडब्ल्यूसी को सूचना तक नहीं
पुलिस का पूरे घटनाक्रम में यह कहना था कि धरमजयगढ़ में बयान लेने के लिए महिला अधिकारी नहीं है। लेकिन रायगढ़ से जानकारी लेने पर पता चला की एएसआई मंजू मिश्रा के पास धर्मज्यगढ़ का प्रभार है। ऐसे में जब रायगढ़ लाया भी गया तो सीडब्ल्यूसी को सूचना तक नहीं दी गई। हमने बाल संरक्षण अधिकारी दीपक डनसेना से बात की है। उन्होंने मामले में किसी तरह की कोई जानकारी नहीं होने की बात कही।
पुलिस का यह है पक्ष
इस संबंध में जब मुनादी ने धर्मजयगढ़ के टिआई से उनका पक्ष भी जाना, उनके अनुसार पीड़ित बच्चियों को रात में थाने नहीं बुलाया गया था और उन्हें निजी वाहन से रायगढ़ भेजा गया है ताकि सीडब्ल्यूसी के समक्ष उनका बयान हो सके। हालांकि उनके पास इस बात का जवाब नहीं था कि FIR में छेड़छाड़ की रिपोर्ट क्यों नहीं लिखी गई और बयान दो दिन बाद क्यों लिया जा रहा है। थानेदार ने बताया की पीड़ितों को सीडब्ल्यूसी के पास बयान के लिए भेजा गया है जबकि सीडब्ल्यूसी को इस घटना की जानकारी तक नहीं है।
