डेस्क मुनादी।।स्वास्थ विभाग में पदस्थ स्वास्थ अधीक्षकों (bmo) ने जिले के कलेक्टर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।जिले के 13 स्वास्थ अधीक्षकों ने कलेक्टर के विरुद्ध अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए चिकित्सा अधीक्षक पद से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है।
मामला उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले का का है।जिले के 13 ब्लॉक के चिकित्सा अधीक्षकों ने जिले के कलेक्टर पुलकित खरे के रूखे और अभद्र व्यवहार से तंग आकर अपने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।इनका कहना है कि वे एक सामान्य डॉक्टर की तरह ही काम करेंगे ।
चिकित्सा अधीक्षकों का आरोप है कि कलेक्टर पुलकित खरे द्वारा उनसे और उनके सीनियर अधिकारियों से अभद्र और अशोभनीय भाषा का इस्तेमाल करते है।छुट्टी के दिनों में भी काम करके निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने के बावजूद इन्हे 3 महीनो से वेतन नहीं दिए जा रहे हैं। कलेक्टर द्वारा सरकारी योजनाओं में प्रगति लाने के निर्देश दिए गए थे और इनके निर्देशों का अक्षरशः पालन करते हुए 60 से लेकर 90 प्रतिशत की प्रगति लाई गई है इन सब के बावजूद कलेक्टर के द्वारा 100 प्रतिशत कार्य नहीं करने पर रेड एंट्री लगाने की धमकियां दी जाती है।यहां तक कि जिला अस्पताल की महिला सी एम सी जो काफी उम्रदराज है उनसे भी अशोभनीय व्यवहार किया जाता है ।चिकित्सा अधीक्षकों का कहना है कि corona काल से अबतक वह लगातार छुट्टियों के दिनों में भी पूरी जिम्मेदारी से कार्य कर रहे है।याद भी नहीं है कि पिछले बार उन्होंने छुट्टी कब ली थी बावजूद इसके डी एम के ऐसे व्यवहार से वे काफी आहत है इसलिए वे अब बतौर चिकित्सा अधीक्षक कार्य नहीं कर सकते ।
इस पूरे मामले में मीडिया ने जब जिले के सीएमएचओ अजय वर्मा चिकित्सा अधीक्षकों द्वारा दिए गए सामूहिक इस्तीफा की पुष्टि की है और कहा है कि उन्होंने अभी तक इस्तीफा पत्र को ठीक से नहीं पढ़ा है लेकिन उनसे इस्तीफा वापस लेने कहा गया है ।उन्हे समझाने की कोशिश की जा रही है ।
वही कलेक्टर पुलकित खरे ने इस मामले में ज्यादा कुछ बोलने बताने से इंकार कर दिया है।मीडिया द्वारा पूछे जाने पर उन्होंने कहा -"सीएमओ से बात करो" इतना बोलकर उन्होंने फोन काट दिया।