रायगढ़ मुनादी।। चक्रधरनगर थाने की पुलिस पूरे प्रदेश के लिए मिशाल पेश कर रही है। कोई भी कार्रवाई करनी हो पुलिस गवाहों को हमेशा अपने साथ लेकर चलती है। जुआ सट्टा शराब हर तरह के केश के लिए इनके पास पहले से विटनेस तैयार होते हैं। केस बना ही नहीं लेकिन विटनेस पहले से तैयार बैठे होते हैं।
पॉकेट विटनेस का खेल कर कानून के आंखों में धूल झोंका जा रहा है। जी हां दरअसल हम ऐसा किसी धारणा से प्रेरित होकर नहीं कह रहे हैं। बल्कि 6 महीनों के केस रिकॉर्ड देखने के बाद कह रहे हैं। चक्रधर नगर पुलिस ने एक ही गवाह का इस्तेमाल सैंकड़ों केस में कर रखा है। चाहे ओडिशा के बॉर्डर में करवाई की गई हो या शहर के भीतर अंबेडकर कॉलोनी में। चाहे शराब तस्कर हो या शराब या फिर सट्टा,जुआ खेलते जुआरियों को सभी जगह कुछ चुनिंदा गवाहों के नाम ही देखने को मिलते हैं।
ऐसा भी नहीं है की ऐसा केवल चक्रधर नगर पुलिस कर रही है। अधिकतर जगहों में यही होता है। सालों से एक ही नाम को केस में गवाह के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन चकरधरनगर पुलिस की फेहरिस्त थोड़ी लम्बी है। कानून के जानकार इस खेल को पॉकेट विटनेस के नाम से बुलाते हैं। जैसे आदतन अपराधियों को छुड़ाने के लिए कोर्ट में पट्टेदार दलाल काम करते हैं। इसी तरह किसी केस को खड़ा करने में पुलिस की मदद ऐसे पॉकेट विटनेस करते हैं। जिन्हें पुलिस ही पालती है।

ये नाम हर दूसरे केश में मिल जायेंगे
सुरेश ठाकुर
रवि देवांगन
अनिल देवांगन
मोनू ठाकुर
खेमसागर ओगरे
महेंद्र साव
शेख इनायत
उदाहरण के लिए ये केश नंबर हैं जिनमें जाकर आप गवाहों के नाम का मिलान कर सकते हैं, यह नंबर उदाहरण के लिए दिए गए है हालांकि इनकी भी लिस्ट बड़ी लंबी हो सकती है।
355
403
404
383
481
471
एक्सपर्ट view-
आज की स्थिति में कोई गवाह देने के लिए तैयार नहीं होता। यही कारण है की पुलिस ऐसे पाॅकिट विटनेस का सहारा लेकर केश बनाती है। नियमत यह पूरी तरह गलत है। जिस स्थान पर कार्रवाई की जा रही है। गवाह वहां से स्थानीय होना चाहिए। पुलिस की ऐसी कारवाई को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ऐसे पुराने कुछ केश के नकल निकालकर वकील चाहे तो गवाह को आदतन बता सकता है। इसके बाद जज अपने विवेकाधिकार से उसकी गवाही को अमान्य कर सकते हैं।
विजय सराफ
सीनियर एडवोकेट, रायगढ़
160 सीआरपीसी के तहत गवाह बुलाने का अधिकार
सीआरपीसी की धारा 160 में गवाहों की हाजिरी की अपेक्षा करने की पुलिस अधिकारी की शक्ति को परिभाषित किया गया है। दंड प्रक्रिया संहिता (Code of Criminal Procedure 1973) की धारा 160 में पुलिस अधिकारी की उस शक्ति के बारे में प्रावधान किया गया है, जिसके अधीन वह गवाहों की हाजिरी की अपेक्षा करता है। CrPC की धारा 160 के अनुसार-
(1) कोई पुलिस अधिकारी, जो इस अध्याय के अधीन जांच कर रहा है, अपने थाने की या किसी पास के थाने की सीमाओं के अन्दर विद्यमान किसी ऐसे व्यक्ति से, जिसकी दी गई इत्तिला से या अन्यथा उस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों से परिचित होना प्रतीत होता है, अपने समक्ष हाजिर होने की अपेक्षा लिखित आदेश द्वारा कर सकता है और वह व्यक्ति अपेक्षानुसार हाजिर होगा।
परन्तु किसी पुरुष से जो पन्द्रह वर्ष से कम आयु का है या पैंसठ वर्ष से अधिक आयु है का या किसी स्त्री से या शारीरिक या मानसिक रूप से निर्योग्य किसी व्यक्ति से, ऐसे स्थान से जिसमें ऐसा पुरुष या स्त्री निवास करती है, भिन्न किसी स्थान पर हाजिर होने की अपेक्षा नहीं की जाएगी।
(2) अपने निवास स्थान से भिन्न किसी स्थान पर उपधारा (1) के अधीन हाजिर होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति के उचित खर्चों का पुलिस अधिकारी द्वारा संदाय कराने के लिए राज्य सरकार इस निमित्त बनाए गए नियमों द्वारा उपबन्ध कर सकती है।