रायगढ़ मुनादी।। बस 15 दिन पहले की बात है झारसुगड़ा निवासी विमला देवी उम्र 75 साल अपनी जिंदगी से पूरी तरह निराश होकर बेमन से किसी के बताने पर रायगढ़ लोचन नगर के आरोग्य संजीवनी आयुर्वेद एवं पंचकर्म केंद्र में पहुंची थी।देश के नामी अस्पताल के बड़े से बड़े डॉ ने हाँथ खड़े कर दिए थे और विमला देवी को तुरंत उनके घुटने बदलवाने की सलाह दी जा चुकी थी।विमला देवी चलने फिरने में बहुत ज्यादा तकलीफ का सामना कर रहीं थी। परिवार की आर्थिक स्थिति और उनकी उम्र ऑपरेशन में बहुत बड़ी रुकावट थी।अपने जीवन से वो बुरी तरह नाउम्मीद हो चुकी थीं।ऐसे में उन्हें किसी रिश्तेदार ने रायगढ़ आरोग्य संजीवनी का पता दिया और डॉ पी सक्सेना से मिलने की सलाह दी।
मार्च के अंतिम सप्ताह में वो रायगढ़ आई और डॉ सक्सेना से मिलकर अपनी स्थिति से अवगत कराया और अपना इलाज करने का निवेदन किया।मरीज का झारसुगड़ा से रायगढ़ रोज आना जाना संभव नही था और मरीज को इलाज की बहुत ज्यादा जरूरत थी ऐसे में डॉ सक्सेना ने उन्हें क्लिनिक में ही रुकने की सुविधा प्रदान की और उनका इलाज प्रारंभ किया।विमला देवी को सीवियर ऑस्टेओरथेरिटिस के साथ साथ लिगामेंट टीरिंग की प्रॉब्लम थी साथ ही उनके घुटने का ग्रीस लगभग पूरी तरह से खत्म हो चुका था ऐसे में मरीज को थोड़ा भी आराम जल्दी दे पाना मुश्किल था। ऐसे में मरीज की स्थिति और उनकी गंभीर परेशानी को देखते हुए डॉ सक्सेना ने इसे एक चेलेंज की तरह लेते हुए साइंटिफिक अप्प्रोच के साथ साथ आयुर्वेद के मूल सिद्धांत को साथ मे लेकर विमला देवी जी का इलाज शुरू किया।
रॉयल कॉलेज ऑफ फिजिशियन से ऑस्टेओरथेरिटिस मैनेजमेंट में किया गया उनका कार्य और 20 साल का उनका कार्यानुभव विमला देवी के इलाज में संजीवनी की तरह काम किया और महज 15 दिनों के इलाज में विमला देवी के घुटनों की सूजन कम हो गयी ,उनके पैर आराम से मुड़ने लगे,वो 2 मंजिले मकान पर आराम से सीढियां चढ़कर जाने लगी और उनके घुटनों के दर्द बिना पेनकिलर लिए भी लगभग खत्म जैसा हो गया।
15 दिन इलाज के बाद 6 महीने की सावधानी और घरेलू इलाज का तरीका बताते हुए जब विमला देवी को विदा किया गया तो उनकी आंखें खुशी से भर आईं।उनके हाँथ आरोग्य संजीवनी के स्टाफ और डॉ को आशीर्वाद देते नहीं थक रहे थे।इस तरह आरोग्य संजीवनी स्पाइनल डिस्क ,जोड़ ,नर्व और लिगामेंट से जुड़ी समस्याओं के मरीजों के लिए भरोसे का दूसरा नाम बनते जा रहा है।

