
11 अगस्त को शिकायत, 12 अगस्त को जांच… घरमुंडा के राशन मामले में साय सरकार की त्वरित कार्रवाई
जशपुर (कुनकुरी)मूनादी।। गरीब के घर का चूल्हा सिर्फ लकड़ी और आग से नहीं जलता, उसमें सरकारी राशन की भी बड़ी भूमिका होती है। ऐसे में जब गरीबो के राशन में कटौती या वितरण में गड़बड़ी की शिकायत सामने आती है, तो यह महज एक सरकारी कागज का मामला नहीं रहता, बल्कि सीधे गरीब परिवारों की रसोई से जुड़ जाता है।
कुनकुरी क्षेत्र के ग्राम पंचायत घटमुंडा में राशन वितरण को लेकर सामने आई शिकायत ने अब प्रशासनिक स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। 11 अगस्त को मुख्यमंत्री के नाम शिकायत होती है और 12 अगस्त को उस शिकायत की जाँच करने पूरा अमला पहुंच जाता है।
ग्राम पंचायत घटमुंडा के ग्रामीणों की ओर से 11 अगस्त को मुख्यमंत्री के नाम शिकायत की गई थीशिकायत में आरोप लगाया गया था कि कुछ हितग्राहियों को पिछले दो माह का राशन नहीं मिला तथा राशन की मात्रा में भी कथित रूप से कटौती की गई। शिकायत में शक्कर और चावल के वितरण को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची और ठीक अगले ही दिन यानी 12 अगस्त को खाद्य विभाग की टीम गांव पहुंच गई।खाद्य विभाग द्वारा शासकीय उचित मूल्य दुकान का जांच एवं भौतिक सत्यापन किया गया। जांच के दौरान पंचायत प्रतिनिधियों, पंचों और ग्रामीणों की मौजूदगी में दुकान के स्टॉक तथा राशन वितरण से संबंधित रिकॉर्ड और EPOS मशीन की स्थिति का परीक्षण किया गया।जांच के दौरान खाद्य सामग्री के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। पंचनामा में चावल सहित अन्य खाद्यान्न के स्टॉक का उल्लेख किया गया है। वहीं राशन वितरण और EPOS मशीन में दर्ज प्रविष्टियों से संबंधित स्थिति की भी जांच की गई।
राशन दुकान की जाँच के बाद जाँच अधिकारी के द्वारा बनाये गए पंचनामे के मुताबिक राशन के स्टॉक में 86 क्विंटल चावल की गड़बड़ी पाई गई है ।ऑनलाइन में स्टॉक कुछ और बताया जा रहा है जबकि भौतिक तौर पर पाए गए खाद्यान ऑनलाइन दर्ज आंकड़ों से बहुत अलग है ।
पंचनामे के मुताबिक पीडीएस गोदाम में चावल 114 बोरी (87 क्विंटल), गेहूँ 7 बोरी (343 किलोग्राम), शक्कर 383 किलोग्राम एवं नमक 600 किलोग्राम उपलब्ध पाया गया एवं भंडारगृह में 14 बोरी (7 क्विंटल) चावल उपलब्ध पाया गया। इस प्रकार चावल कुल 94 क्विंटल उपलब्ध पाया गया।जबकि भंडारगृह स्टॉक रजिस्टर में चावल – 180.85 क्विंटल, शक्कर – 874 kg., नमक – 701 kg., गेहूँ – NIL दर्ज पाया गया।
इस प्रकार भंडारगृह स्टॉक से भौतिक स्टॉक मात्रा में भारी अंतर पाया गया।।ग्राम पंचायत के सरपँच निशा केरकेट्टा ने जाँच अधिकारी को बताया epos मशीन में तकनीकी खराबी के चलते कुछ हितग्राहियों को समय राशन वितरण नहीं किया गया।इस तकनीकी खराबी की शिकायत उन्होंने मई माह में ही फ़ूड इंस्पेक्टर और जिला खाद्य अधिकारी को कर दिया था लेकिन न तो तकनीकी खराबी ठीक हुई न ही उपर से उन्हें कोई मार्गदर्शन मिला इस वजह से राशन वितरण से कुछ हितग्राही वंचित रह गए ।जिस दिन तकनीकी खराबी ठीक हो जाएगी उस दिन सभी वंचित हितग्राहियों को राशन मिल जाएगा। तकनीकी खराबी ठीक करने की जिम्मेदारी विभाग की है न कि उनकी है।
बहरहाल जांच अधिकारी ने जांच कर पंचनामा और जाँच प्रतिवेदन बनाकर उपर के अधिकारियों को भेज दिया है लेकिन इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि कुनकुरी क्षेत्र के छोटे से गाँव से निकली शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय तक पहुंची और उसके अगले ही दिन सरकारी अमला गांव में जांच के लिए पहुंच गया।यही वह तस्वीर है जो बताती है कि सरकार के लिए राशन सिर्फ किसी दुकान का स्टॉक नहीं है।यह गरीब की थाली का सवाल है,यह मजदूर के घर के चूल्हे का सवाल है और यह उस परिवार का सवाल है जिसकी उम्मीद सरकारी राशन पर टिकी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं कुनकुरी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रदेश की कमान संभाल रहे हैं। ऐसे में उनके क्षेत्र से आई शिकायत पर अगले ही दिन खाद्य विभाग की टीम का गांव पहुंचना सरकार की त्वरित शिकायत-निराकरण व्यवस्था और गरीबों के राशन को लेकर गंभीरता का सकारात्मक संकेत माना जा सकता है
शिकायत के बाद जांच शुरू हो गई है। अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि कहीं गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदारी तय कर प्रभावित हितग्राहियों को उनका हक कब तक मिलता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ राशन की बोरी का नहीं है सवाल गरीब के चूल्हे का है।और इस मामले में मुख्यमंत्री के नाम शिकायत के अगले ही दिन जांच टीम का घरमुंडा पहुंचना निश्चित तौर पर साय सरकार की त्वरित कार्रवाई की एक तस्वीर सामने रखता है।