जशपुर मुनादी।। कितना खूबसूरत होता है वो पल जब जिस स्कूल के मैदान में कभी एक बच्ची ने बैठकर पढ़ाई की हो, उसी स्कूल के मंच पर एक दिन वही बच्ची मुख्य अतिथि बनकर लौटे।यह सिर्फ सम्मान नहीं यह एक सफर की कहानी है।



तपकरा के मिशन स्कूल में पढ़ीं सोनम लकड़ा। ग्राम साजबहार से आगे बढ़ीं, पढ़ाई पूरी की और फिर अपने गांव की राजनीति में कदम रखा। सोनम को गांव की सबसे कम उम्र की सरपंचों में पहचान मिली और जनता ने उन्हें दो बार सरपंच चुना लेकिन सोनम की कहानी सिर्फ सरपंच बनने तक सीमित नहीं है।सरकारी व्यवस्था की विसंगतियों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाने वाली सोनम ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी और इस मामले में छत्तीसगढ़ सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगा। यानी सोनम की पहचान किसी राजनीतिक सहारे की मोहताज नहीं उन्होंने अपनी लड़ाई और अपने संघर्ष से अपनी पहचान बनाई।
और फिर आया 15 अगस्त का वो दिन, जब तपकरा मिशन ग्राउंड में हजारों लोगों की मौजूदगी में उसी मिशन स्कूल ने सोनम लकड़ा को मुख्य अतिथि बनाया, जहां से उन्होंने कभी अपनी शुरुआती शिक्षा हासिल की थी।
सोचिए,जिस स्कूल से एक बच्ची पढ़कर निकली थी, आज उसी स्कूल के मंच पर हजारों लोगों के सामने वही बच्ची सम्मानित अतिथि बनकर खड़ी थी।
लेकिन इस कहानी का एक और पहलू है सियासत।
क्योंकि यह तपकरा है कुनकुरी विधानसभा का बेहद महत्वपूर्ण इलाका। और कुनकुरी सिर्फ एक विधानसभा नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह क्षेत्र के तौर पर भी खास राजनीतिक महत्व रखता है।
तपकरा की मिशनरी संस्था का इलाके की सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में लंबे समय से प्रभाव माना जाता है। ऐसे माहौल में सोनम लकड़ा को स्वतंत्रता दिवस जैसे बड़े आयोजन में मुख्य अतिथि बनाया जाना महज एक सम्मान है या इसके पीछे बदलते सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों की भी कोई कहानी है?यही सवाल अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन सकता है।क्योंकि जिन इलाकों को आम तौर पर एक खास राजनीतिक विचारधारा के समर्थक सामाजिक आधार के तौर पर देखा जाता रहा है, वहां से सोनम लकड़ा की इस मंच पर हुई सियासी मौजूदगी को कई लोग एक नए संकेत के तौर पर भी देख सकते हैं।


क्या यह सिर्फ स्कूल और अपनी छात्रा के रिश्ते का सम्मान है?या फिर सोनम की बढ़ती राजनीतिक स्वीकार्यता का संकेत?फिलहाल जवाब किसी के पास नहीं है।लेकिन इतना जरूर है कि स्कूल की उस बच्ची का सफर अब सरपंच की कुर्सी से निकलकर कुनकुरी की बड़ी राजनीतिक तस्वीर तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।और तपकरा के इस मंच से सोनम लकड़ा की हुई एंट्री ने अगर राजनीतिक हलचल पैदा की है तो आने वाले वक्त में इसके मायने और भी बड़े हो सकते हैं।