प्रतापपुर मुनादी ।। मुकेश गोयल की रिपोर्ट
राजधानी से आये 26 प्रवासी मजदूरों ने आज भेड़िया कैम्प में रखे जाने का विरोध शुरू कर दिया ।है। मजदूर इस बात पर अड़े हुए है कि उन्हें 14 दिन के कवारेंटीन में रखे जाने के बाद घर क्यों नहीं जाने दिया जा रहा है ? मजदूर प्रशासन से उन्हें बेवजह रोकने का आरोप लगा रहे है। इस दौरान कई मजदूर भूख हड़ताल पर भी बैठ गए, जिन्हें बाद में उच्चाधिकारियो ने समझा लिया।

25 मार्च को अचानक हुए लॉकडाउन के बाद काफी तादाद में प्रवासी मजदूर छत्तीसगढ़ से झारखंड, मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की ओर अपने घरों की ओर लौट रहे थे। उसी दौरान शासन के निर्देश पर प्रवासी मजदूरों को रोकते हुए स्थानिय तौर पर ही उनकी व्यवस्था की गई। ये मजदूर 30 मार्च से भेड़िया स्थित राहत कैम्प में रखे गए है। सभी मजदूर इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि 14 अप्रैल को लॉकडाउन खुलने के बाद वे अपने घरों की ओर जा सकेंगे। इसी बीच लॉकडाउन को आगामी 3 मई तक बढ़ाने की घोषणा होने के बाद आज मजदूरों का धैर्य जवाब दे गया। यहां रुके 26 मजदूरों में से आज 14 मजदूरों ने दोपहर में खाना नहीं खाया और भूख हड़ताल पर बैठ गए। वे इस बात पर अड़े रहे कि जब उन्होनें उन्होंने 14 दिन की क़वारेंटीन अवधि पूर्ण कर ली है तो अब आखिर उन्हें क्यों रोका जा रहा है। उनका यह भी कहना था कि उनमें संक्रमण की संभावना को देखते हुए 14 दिन के क़वारेंटीन में रखा गया है तो अब 14 दिनों के बाद उन्हें छोड़ा क्यों नही जा रहा है। इस बात का समर्थन बाकी मजदूर भी कर रहे थे। इधर इसकी जानकारी पंचायत सचिव व सरपंच ने अपने अधिकारियों को दे दी है। जिसपर जिले से अपर कलेक्टर एनएस मोटवानी व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर मौके पर पहुंचे और उन्हें समझाते हुए शांत कराया।
सभी ने खाना खा लिया है -एसडीएम
इस बारे में एसडीएम सीएस पैकरा से पूछे जाने पर उन्होनें कहा कि सभी मजदूर खाना खा लिए है। उन्हें लग रहा है कि यहां पर उन्हें बेवजह रखा गया है। उन्हें 3 मई तक के लॉकडाउन के बारे में बता दिया गया है। इन मजदूरों को छोड़े जाने के अभी कोई निर्देश हमारे पास नही है। यहां मजदूर अच्छे ढंग से रह रहे है।

