प्रतापपुर मुनादी ।। मुकेश गोयल की रिपोर्ट
अन्य जिले से 4 बसों में आये लगभग 100 से ऊपर मजदूरों को चन्दौरा थाना अंतर्गत ग्राम जजावल में भेजा गया है। देर रात मजदूरों को इस प्रकार गांव में लाये जाने से जजावल के ग्रामीण सशंकित है। मजदूरों को इस प्रकार लाये जाने के पीछे आखिर क्या वजह है ? इसका खुलासा नहीं हो सका है। इधर मजदूरों की देखरेख में ग्राम सरपंच समेत पूरा अमला मुस्तैद है।

प्रतापपुर के जजावल गांव में काफी तादाद में मजदूरों के पहुंचने पर गांव व आसपास क्षेत्र में चर्चा का माहौल है।ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार की रात 11 बजे के लगभग 100 से ऊपर मजदूरों से भरी 4 बसों को प्रतापपुर नगर से जजावल की ओर पहुंचाया गया है। ये सभी बसे यहां की नहीं थी। इन बसों में इस प्रकार देर रात को इतनी संख्या में मजदूरों को मुख्य मार्ग से लगभग 10 किमी अंदर इस जंगली क्षेत्र में क्यों पहुंचाया गया है, यह स्पष्ट नहीं हो सका है। इस संबंध में एसडीएम सीएस पैकरा से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, परंतु उनसे चर्चा नही हो सकी।ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार गुरुवार की शाम से ही जजावल में स्थित पुराने एसएएफ कैम्प के पीछे वाले हिस्से में गांव के सरपंच, सचिव सहित कई अन्य लोग बड़ी संख्या में लोगों को रोकने की व्यवस्था कर रहे थे। ग्रामीणों के अनुसार यहां पर रात 11 बजे 4 बसों के माध्यम से 100 से ऊपर मजदूरों को लाया गया। उनके रात में भोजन व ठहरने की व्यवस्था भी की गई थी। बड़ी तादाद में प्रवासी मजदूरों को जजावल कैम्प में लाये जाने को लेकर ग्रामीण असमंजस के साथ सशंकित भी है। उनका कहना है कि यह तो स्पष्ट है कि मजदूर इस प्रदेश के नहीं है तो फिर इन्हें मुख्य अंतर्राज्यीय मार्ग से अलग 10 किमी अंदर जंगली क्षेत्र में क्यों रखा गया है ? ग्रामीणों के अनुसार इन मजदूरों को यहाँ तक बसों से लाये जाने के दौरान कई बैरियर पड़े होंगे तो फिर आखिर इन्हें रोका क्यों नही गया ? इन तमाम चर्चाओं के बीच ग्रामीण इन मजदूरों को लेकर यह भी सवाल उठा रहे है कि अगर इसमें किसी प्रकार का प्रशासनिक हस्तक्षेप है तो मजदूरों को फिर सीमा पार क्यों नहीं करा दिया गया ? इतनी बड़ी तादाद में प्रवासी मजदूरों के यहां पहुंचने पर जजावल क्षेत्र के ग्रामीण सशंकित भी है। फिलहाल अभी तक इन मजदूरों के जजावल पहुंचने का कारण स्पष्ट नही हो सका है।

