21-April-2020


Munaadi Breaking - 14 VIP पुत्रों को कोटा से वापस लाने पर बवाल, अभिभावकों ने पूछा - हमारे बच्चे कब आएंगे, अधिकारियों का अजीब जवाब ……. पढ़िए पूरी खबर



बिलासपुर मुनादी।।

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कोटा से प्रदेश के छात्रों को अपने प्रदेश में लाने की कवायद की समाचार काल से शुरू ही हुई थी बिलासपुर से आई एक खबर ने सबको आंदोलित कर दिया। खबर में बताया गया की कोटा से 15 छात्र जो कथित रूप से रसूखदार घरों के हैं उन्हें तो 8 दिन पहले ही बुलाया जा चुका है जबकि प्रदेश के 800 से ज्यादा बच्चे लॉक डाउन में राजस्थान के कोटा में फंसे हुए हैं।

राजस्थान का कोटा एजुकेशन हब के रूप में स्थापित है और वहां देश भर के हजारों छात्र पढ़ने जाते हैं। 24 मार्च को केंद्र सरकार द्वारा देशव्यापी लॉक डाउन की घोषणा के बाद सभी प्रदेश के बच्चे वहीं फंस गए। बच्चों के अभिभावकों द्वारा समय समय पर उन्हें वापस लाने की मांग भी उठाई जाने लगी। इसी बीच लॉक डाउन को सरकार ने 3 मई तक और बढ़ दिया। 19 अप्रैल को जब उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री ने वहां के छत्रों को निकालने के लिए बस भेजने की बात कही तब उसका भी कतिपय पार्टीज द्वार विरोध किया गया। लेकिन छ्त्तीसगढ़ प्रदेश के अभिभावकों द्वारा भी सरकार के समक्ष यह मांग रखी गई जिसपर मुख्यमंत्री ने अभिभावकों को आश्वस्त किया कि वहां के मुख्यमंत्री से बात हुई है उनका वहीं पर बेहतर खयाल रखा जाएगा किसी को वहां से आने की जरूरत नहीं है।

इसी बीच एक खबर आई कि कोटा से 14-15 बच्चों को लेकर पहली बस आ गई है। लेकिन जब इसकी तहक़ीक़ात की गई तब पता चला कि ये बच्चे 8 दिन पूर्व ही आ चुके हैं। तब यह सवाल उठना लाजमी था कि जब मुख्यमंत्री ने स्वयं बच्चों को वापस लाने से मना कर दिया तो बच्चे कैसे वापस आ गए ? बताया गया ही कि बच्चों को 8 दिन से गौरेला के आश्रम छात्रावास में 8 दिन रखा गया था अब इन्हें सदर बाजार के ही एक लॉज में क्वारंटाइन किया गया है। इसपर जिम्मेदार अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों ने अलग अलग बातें मुनादि को बताई।

जब मुनादी ने इस संबंध में जिला शिक्षाधिकारी एके भार्गव से इस मामले में जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि मुंह सिर्फ इतनी जानकारी है कि 14 या 15 बच्चे कोटा से लाये गए हैं उन्हें गौरेला में क्वारंटाइन किया गया है। यह पूछने पर की बच्चे किस जिले से हैं उन्होंने बताया कि बच्चे रायगढ़, कोरबा, बिलासपुर सहित कई जिलों के हैं।

इस संबंध में जब मुनादी ने बिलासपुर विधायक शैलेश पाण्डेय से बात की (क्योंकि यह कहा जा रहा था कि स्थानीय विधायक के प्रयास से उन्हें लाया गया है) तब उन्होंने बताया कि यह उनके प्रयास से नहीं हुआ है। राजस्थान सरकार ने इन छात्रों को मरवाही में 8 दिन पूर्व छोड़ दिया था जिन्हें में कल देखने गया था।

अब यह सवाल उठना लाजमी है कि इन छात्रों को ही राजस्थान सरकार ने क्यों बॉर्डर पर छोड़ा और बाकी बच्चे क्यों अभी भी वहीं हैं ? अभिभावक इस बात को लेकर आक्रोशित हैं कि सरकार ने आखिर ऐसा क्यों किया ? क्या VIP के बच्चे ही बच्चे होते हैं, हमारे नहीं ? अब देखना यह है कि सरकार की ओर से इस घटना पर क्या जवाब दिया जाता है।








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