27-April-2020


Munaadi Breaking:-राहत कैम्प में आश्रय के साथ आजीविका के लिए भी बंदोबस्त किया जिला प्रशासन ने...अब ट्री गार्ड बनाएंगे प्रवासी मजदूर



प्रतापपुर मुनादी।। अन्य प्रदेश के प्रवासी मजदूरों को आश्रय देने के साथ अब उनकी आजीविका की फिक्र करते हुए जिला प्रशासन की पहल पर जजावल में मजदूरों को बांस से ट्री गार्ड बनाने के लिए कच्ची सामग्री उपलब्ध कराते हुए प्रशिक्षण आरम्भ करा दिया गया है। आज आरम्भ इस प्रशिक्षण में वन विभाग के प्रशिक्षकों ने उन्हें प्रशिक्षण दिया। इनमें से कई मज़दूरों ने आज ट्री गार्ड बनाने की शुरुवात कर दी है। एक ट्री गार्ड के एवज में वन विभाग की ओर से मजदूर को उसी दिन शाम को 200 रुपये का भुगतान कर दिया जाएगा।
ज्ञात हो कि लॉकडाउन के दौरान छत्तीसगढ़ में फंसे अन्य प्रान्त के प्रवासी मजदूरों को जिला कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर जजावल राहत कैम्प में आश्रय दिया गया है। इस समय इस राहत कैम्प में झारखंड के 97 मजदूर ठहरे हुए है। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि 3 मई तक जारी लॉक डाउन की अवधि तक इन्हें इस कैम्प में ठहराया जाएगा। इस बीच इन मजदूरों को आजीविका के लिए संसाधन उपलब्ध कराने की मंशा से कलेक्टर दीपक सोनी के निर्देश पर वन विभाग ने कैम्प में आश्रय लिए मजदूरों को बांस की सामग्री का प्रशिक्षण आरम्भ करा दिया है। वनमंडलाधिकारी जेआर भगत के निर्देश पर प्रतापपुर उपवनमंडलाधिकारी मनोज विश्वकर्मा व सीईओ जनपद पंचायत प्रतापपुर निजामुद्दीन ने जजावल पहुंचकर यहां पर कच्ची सामग्री बांस सहित मजदूरों को औजार व आवश्यक समान उपलब्ध कराया। इस दौरान जजावल के परिक्षेत्र सहायक सुरेंद्र सिंह पटेल, घुई परिक्षेत्र सहायक महेश कुमार मरावी के साथ अन्य वनकर्मियों ने मजदूरों को प्रशिक्षण भी दिया। मिली जानकारी के अनुसार आज शाम को कुछ मजदूरों ने अपना काम शुरू कर दिया है। बाकी कल अन्य मजदूर भी प्रशिक्षण के साथ ट्री गार्ड बनाने का कार्य आरम्भ कर देंगे। इस संबंध में जानकारी देते हुए एसडीओ मनोज विश्वकर्मा व सीईओ निजामुद्दीन ने बताया कि इस दौरान मजदूरों को प्रशिक्षण देने व निगरानी के लिए वन विभाग के कर्मचारी वहां मौजूद रहेंगे, साथ ही मांग के अनुसार बांस आदि उपलब्ध कराते रहेंगे। उन्होनें बताया कि मजदूरों द्वारा बनाये गए प्रति ट्री गार्ड के लिए दो सौ रुपये का भुगतान उन्हें उसी दिन कर दिया जाएगा। इस दौरान ग्राम सरपंच व सचिव को भी निर्देशित किया गया है कि वे कैम्प में मौजूद मजदूरों की जरूरत के हिसाब से व्यवस्था जारी रखे।








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