28-April-2020


Munaadi Breaking: मुख्य मार्ग के करीब हाथियों ने दो ग्रामीणों को मार डाला.....ग्रामीण व वन अमले के बीच झड़प,मौके पर पहुंचे डीएफओ



भटगांव मुनादी।। अम्बिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग के समीप ही बीतीरात गजदल ने दो ग्रामीणों को कुचलकर मार डाला। इसमें से एक व्यक्ति कोरंधा व दूसरा बंशीपुर का रहने वाला है। दोनों की मौत पर ग्रामीणों ने जमकर हंगामा मचाया, इस दौरान मौके पर पहुंची भटगांव पुलिस बल के हस्तक्षेप से मामला शांत हो सका। ग्रामीण इस जिद पर अड़े हुए थे कि इस मामले में गैरजिम्मेदाराना ढंग से कार्य कर रहे वन विभाग के लोगों को तत्काल हटाया जाए। मौके पर पहुँचे सूरजपुर डीएफओ जेआर भगत ने घटना का जायजा लिया। उन्होंने गजदल से मौत की पुष्टि की, साथ में उन्होनें यह भी माना कि हाथी में रेडियो कॉलर लगे होने से उनके विचरण की स्थिति की सही जानकारी मिल जाती है। इधर भटगांव पुलिस ने ग्रामीणों को समझाकर फिलहाल मामला शांत करा दिया है।

https://youtu.be/Hk9-K4GHYzs
मुनादी से विशेष बातचीत में डीएफओ ने बताया यह बात........

पिछले कुछ दिनों से 15 हाथियों का दल प्रतापपुर व सूरजपुर परिक्षेत्र के सोनगरा व तमोर सर्किल में विचरण कर रहा है, जिससे आसपास के एक दर्जन से ज्यादा गांव सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे है। यह दल रात में कई मर्तबा दो अलग-अलग दलों में बंटकर अलग-अलग क्षेत्र में विचरण कर रहा है, जिससे इनके विचरण की सही जानकारी ग्रामीणों को नहीं मिल पा रही है। 27 अप्रैल की रात में भी यह गजदल सोनगरा के आसपास के क्षेत्र में मौजूद था। बीती रात अम्बिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग से बेहद करीब इस गजदल ने दो ग्रामीणों को मार डाला। यह घटना मुख्य मार्ग से कुछ सौ मीटर अंदर घटित हुई है, जो शिवानी कोयला खदान के सामने ईंट भट्ठे के पास की है। मिली जानकारी के अनुसार हाथी के हमले में कोरंधा निवासी सीता पिता शिवभजन रजवार व बंशीपुर निवासी चेतन पिता घुरवा रजवार का शव खेत व सामने बहने वाली केंदली नदी के पास मिली है। मृतकों का घर घटनास्थल से डेढ़ से दो किमी की दूरी पर ही है। इस बात की पुष्टि नहीं हो पा रही है कि रात में दोनों ग्रामीण जंगल की तरफ किसलिए गए थे ? आज घटना की जानकारी होने पर दोनों गांव के ग्रामीणों ने मौके पर पहुचकर जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाये कि इस क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी पिछले कई दिनों से है, लेकिन विभाग इसके लिये गांव में न तो मुनादी करा रहा है और न ही गश्ती कर रहा है, जिससे ग्रामीण हाथी की मौजूदगी से सजग हो सके। ग्रामीणों के अनुसार उनका आसपास का क्षेत्र हाथियों के लगातार हमले से काफी परेशान है। इस दौरान फसल क्षति का मुवावजा सहित अन्य राहत वन विभाग द्वारा नहीं दिए जा रहे है। ग्रामीण इस दौरान इतने आक्रोशित थे कि वन अमले के साथ उनकी झड़प भी हुई, जिसे मौके पर पहुंचे भटगांव पुलिस अमले ने हस्तक्षेप करते हुए शांत कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पर किसी इंसान की मौत के बाद ही वन अमला नजर आता है बाकी दिन विभाग के अधिकारी नदारद रहते है। गजदल से अत्यंत प्रभावित इस क्षेत्र को कुछ छोटे कर्मचारी के भरोसे छोड दिया गया है। यहां हाथी से बचाव के समुचित उपाय भी नही है। ग्रामीणों ने हाथी प्रभावित क्षेत्र में सोलर फेंसिंग लगाए जाने की भी मांग की है।

मौके पर पहुंचे सूरजपुर डीएफओ

हाथी से दो ग्रामीणों की मौत की सूचना पर आज सुबह सूरजपुर जिले के डीएफओ जेआर भगत मौके पर पहुंचे। उन्होनें स्थिति का जायजा लेते हुए बताया कि दोनो ग्रामीणों की मौत हाथी से हुई है। उनके अनुसार अभी यह स्पष्ट नही है कि दोनों ग्रामीण रात में जंगल की ओर क्यों गए थे ? प्यारे हाथी के संदर्भ में पूछे जाने पर उन्होनें बताया कि अभी उन्हें यह ज्ञात नहीं है कि दोनों की मौत किस हाथी के द्वारा की गई है। उन्होनें यह जरूर स्पष्ट किया कि घटनास्थल पर एक हाथी के पैर के निशान है, बाकी विभाग इसकी पड़ताल में लगा हुआ है। इस दौरान रेडियो कॉलर के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि रेडियो कॉलर अच्छा है, इससे हाथी के विचरण की जानकारी विभाग को मिल जाती है। हाथियों के अलग-अलग दल में बंटकर विचरण करने के सवाल पर उन्होनें कहा कि अभी जंगल व रेवेन्यु क्षेत्र में चारे की कमी हो गई है, जिसके कारण हाथी गांव की ओर आ जा रहे है। उन्होनें पीड़ित परिवार को राहत के लिए निर्देश देने की बात भी कही।

बनारस मार्ग के बेहद करीब है दल

15 हाथियों का दल अम्बिकापुर-बनारस मुख्य मार्ग के बेहद करीब है। यह दल सोनगरा व तमोर सर्किल में लगातार भ्रमण कर रहा है। जिस कारण हाथी इस मुख्य मार्ग को लगातार पर कर रहे है। इसलिए वन विभाग को चाहिए कि इस मार्ग पर लगातार विभाग गश्ती करते हुए आवाजाही करने वाले लोगों को हाथी के खतरे से बचाने का प्रयास करे।

एलीफेंट प्रूफ ट्रेंज से की जाएगी सुरक्षा।

वन मंडल अधिकारी सूरजपुर ने बताया कि जल्दी जंगल से लगे गांव के सरहदी इलाकों में एलीफेंट प्रूफ ट्रेंज के माध्यम से हाथियों को जंगल में ही रखने की कार्य योजना बन रही है इस कार्य योजना के क्रियावयन के उपरांत हाथियों का दल रिहायशी इलाकों तक नहीं पहुंच सकेगा। लॉकडाउन के पश्चात मनरेगा के तहत इस कार्य को किया जाएगा संपन्न।








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