सतीश शर्मा की मुनादी।। ओडिशा की राजनीति में सोमवार को एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया, जब वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद देबाशीष सामंतराय ने बीजू जनता दल (बीजेडी) की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के बाद उनके जल्द ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं।
लंबे समय से नवीन पटनायक के करीबी माने जाने वाले सामंतराय ने अपना इस्तीफा बीजद अध्यक्ष को सौंपा। इसके साथ ही उन्होंने नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा सभापति सी पी राधाकृष्णनण से मुलाकात कर राज्यसभा सदस्यता से भी त्यागपत्र दे दिया।
देबाशीष सामंतराय, ममता महंत,और सुजीत कुमार के बाद बीजेडी छोड़ने वाले तीसरे राज्यसभा सांसद बन गए हैं।
देबाशीष के इस्तीफे के बाद बीजद राज्यसभा में बीजद सांसदों की संख्या छः से घटकर पांच हो गई है।
अपने इस्तीफे में सामंतराय ने कहा कि पार्टी में उन्हें लगातार “अपमानित” किया जा रहा था और अब पार्टी को उनकी सेवाओं की आवश्यकता नहीं रह गई है। उन्होंने नवीन पटनायक को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें अविभाजित कटक जिले तथा ओडिशा के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने का अवसर मिला।
सामंतराय ने पूर्व आईएएस अधिकारी वी के पांडियन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वही अब भी बीजद को नियंत्रित कर रहे हैं। उनका आरोप था कि पिछले एक वर्ष से उन्हें नवीन पटनायक से मिलने तक नहीं दिया गया।
उन्होंने बीजू नवीन इंस्पिरेशनल फाउंडेशन को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि बीजू पटनायक की नई दिल्ली स्थित संपत्ति ट्रस्ट को सौंपे जाने का उन्होंने शुरू से विरोध किया था।
मुझे पांडियन ने एक वर्ष से नवीन पटनायक से मिलने नहीं दिया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए भाजपा में शामिल होने के संकेत दिए। कहा मेरी एक राष्ट्रीय दल से बातचीत हुई है मैं सम्मान सहित वंहा जा रहा हूं।
बताया जा रहा है कि नई दिल्ली में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल की मौजूदगी में उनका भाजपा में प्रवेश हो सकता है।
इससे 2024 विधानसभा चुनाव में हार के बाद आंतरिक कलह से जूझ रही बीजेडी को एक और बड़ा झटका लगा है।
पार्टी के भीतर बढ़ते गुटबाजी और असंतोष के बीच कई वरिष्ठ नेता पहले ही संगठन से दूरी बना चुके हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद एन भास्कर राव पूर्व मंत्री लाल बिहारी हिमिरिका वरिष्ठ विधायक प्रफुल्ल कुमार मल्लिक तथा युवा नेता हरि शंकर राउत्त जैसे नेताओं ने भी पार्टी संगठन और नेतृत्व शैली पर सवाल उठाए हैं।
देबाशीष सामंतराय ने वर्ष 2000 में त्रितोल विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया था। इसके बाद वे 2009 और 2014 में बाराबती-कटक विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। हालांकि 2019 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस नेता मोहम्मद मोकिम से हार का सामना करना पड़ा।
वर्ष 2024 में नवीन पटनायक ने उन्हें राज्यसभा भेजा था। अपने इस्तीफे पत्र में सामंतराय ने उन्हें यह अवसर देने के लिए आभार भी व्यक्त किया।
सामंतराय का राज्यसभा कार्यकाल वर्ष 2030 तक है। ऐसे में यदि वे भाजपा में शामिल होते हैं, तो इससे उच्च सदन में भाजपा की स्थिति और मजबूत हो सकती है।