जशपुर मूनादी ।। जिले के कुनकुरी ब्लॉक के बेहराखर में बनी 10 लाख की सड़क की तस्वीर देखकर आप यह सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि सड़क कमजोर है या सिस्टम? कहने को तो ये 10 लाख रुपये की लागत से बनी करीब ढाई सौ मीटर की CC रोड है लेकिन सड़क की हालत देखकर सवाल उठता है कि क्या ये सड़क बनी है या सिर्फ सरकारी पैसा खर्च हुआ है?सड़क से अभी से गिट्टियां और मैटेरियल बाहर झांकने लगे हैं।स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान यहां न तो कारीगर दिखे न मिस्त्री और न ही जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर कभी यहाँ झांकने आये ।लोगों के मुताबिक सड़क बनाने का काम सिर्फ मजदूरों और ठेकेदार के भरोसे छोड़ दिया गया।
बेहराखर पंचायत के सचिव सुखराम ने "मूनादी डॉट कॉम" को फोन पर बताया कि ग्राम पंचायत बेहराखार के शंकर नगर बिरहोर बस्ती में 10 दिन पहले RCC सड़क का निर्माण पूर्ण हुआ है लेकिन तेज बारिश होने के कारण ढलाई का ऊपरी हिस्सा पानी मे बह गया इसलिए सडक खराब दिख रही है। ताज्जुब करने वाली बात यह है कि पंचायत सचिव को न तो सड़क की लंबाई की जानकारी है न ही लागत कि ।उन्होंने बताया कि ठीक से उन्हें याद नहीं है लेकिन साढ़े 9 या 10 लाख की सड़क है। साथ साथ यह भी बताया कि इंजीनियर सिर्फ शुरू दिन इस काम को देखने आए थे उसके बाद कोई नहीं आया ।
अब सवाल ये है कि अगर सड़क निर्माण में तकनीकी गुणवत्ता की निगरानी ही नहीं हुई, तो 10 लाख रुपये की इस सड़क की गुणवत्ता की गारंटी कौन देगा?और इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू देखिए कि ये सड़क किसी आलीशान कॉलोनी के लिए नहीं,बल्कि विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुदाय बिरहोर समाज के लोगों के लिए बनाई गई है।
बेहराखर में बिरहोर समाज की बड़ी आबादी रहती है।
इन्हीं लोगों के उत्थान और उनकी समस्याओं को समझने के लिए करीब तीन महीने पहले राज्यपाल भी यहां पहुंचे थे।यानी एक तरफ सरकार और संवैधानिक पदों पर बैठे लोग बिरहोर समाज के विकास और उत्थान की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ उसी समाज के लिए बनी 10 लाख की सड़क सवालों के घेरे में है।
स्थानीय लोगों ने सड़क का वीडियो बनाकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 में शिकायत भी दर्ज कराई है।
अब देखना ये है कि शिकायत सिर्फ हेल्पलाइन के रिकॉर्ड में दर्ज होकर रह जाती है या फिर सड़क की गुणवत्ता, लागत और निर्माण प्रक्रिया की बाकायदा जांच होती है।
क्योंकि सवाल सिर्फ ढाई सौ मीटर सड़क का नहीं है…
सवाल उन लोगों के भरोसे का है।जिनके नाम पर विकास की योजनाएं बनाई जाती हैं।
दस लाख की सड़क अगर कुछ ही समय में अपना मैटेरियल दिखाने लगे…
तो सवाल उठेगा ही—
“सड़क कमजोर है… या सिस्टम की नींव?”