मैं छलनी होता जशपुर हूं ! बेखौफ अपराधी, गरजती पिस्टल और गिरती लाशों से सहमा हुआ, आखिर जिम्मेदार कौन ? पढ़िए पूरा विश्लेषण

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July 26, 2022



मैं छलनी होता जशपुर हूं ! बेखौफ अपराधी, गरजती पिस्टल और गिरती लाशों से सहमा हुआ, आखिर जिम्मेदार कौन ? पढ़िए पूरा विश्लेषण

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मुनादी नजरिया ।। अमूमन शांत रहने वाला जिला जशपुर कुछ महीनों से बेखौफ अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है। जहां पिस्टल होना बड़ी खबर होती थी वहां पिस्टल चलाकर हत्याएं की जा रही है। एक ही पैटर्न से अब तक तीन अलग - अलग जगह महिलाओं की हत्या किए जाने से पूरे जिले में दहशत का माहौल है। जिले की पुलिसिंग पर सवाल तो नहीं उठाए जा रहे लेकिन इन वारदातों ने लोगों के भरोसे को बुरी तरह हिलाकर रख दिया है।

यह बता दें कि एक वक्त में जशपुर ने  नक्सलगढ़ का रूप ले लिया था। आरा चौकी में हुए नक्सली हमले से भला कौन वाकिफ नहीं है । एक नही 4 पुलिसकर्मियी की मौत हो गयी थी।झारखण्ड की सीमा से लगे होने के कारण जिले के चिन्हित क्षेत्रो में प्रतिबंधित और अघोषित रूप से नक्सलियों के कई संगठन और कई गिरोह संचालित हो रहे थे। कई दफे व्यापारियों का अपहरण भी हुआ और कई दफे बस्तर के तर्ज पर सरकारी कामो में लगे वाहनों में आग लगा दी गयी ।लेकिन एक वक्त ऐसा भी आया कि यहाँ की पुलिस ने एक एक करके सभी गिरोहों और नक्सली संगठनों का सफाया कर दिया ।

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2017 में तत्कालीन सरकार ने जिले को नक्सवाद मुक्त जिला घोषित कर दिया काफी दिनों तक अपराधों के ग्राफ नियत पारे पर स्थिर रहे लेकिन अचानक फिर से जिले में  अपराधों की बाढ़ आ गयी । रेप,गैंग रेप, गाँजे की तस्करी ,लूट,हत्या ,गोली बारी ऐसी घटनाये आम हो गयी ।ऐसे में केवल विपक्ष ही नही आम जनता भी सवाल पूछने का हक रखती है कि आखिर इन सबका जिम्मेदार कौन ?


नक्सलवाद के कलंक से बमुश्किल उबरे जशपुर इन दिनों शहरी किस्म के अपराधों और अपराधियों के गिरफ्त में आता हुआ दिख रहा है।एक के बाद एक गोलीकांड  यह बताने के लिए पर्याप्तहै कि झरखंड की सीमा से लगे जशपुर में को पड़ोसी राज्य की काली साया ने अपने आगोश में लेना शुरु कर दिया है।


राविवार को आरा इलाके में 65वर्षीय महिला की गोली मारकर की गई हत्या का यह कोई पहला मामला नहीं है।आज के कुछ ही दिनों पहले दोकड़ा  इलाके भी एक महिला और उसके पति को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।इससे भी पहले एक और महिला को गोली का निशाना बनाया गया था ।तीनो वारदातों में समानता यह है कि बदमाश शराब माँगने के बहाने घर मे घुसते है और गोली कांड हो जाता है । बीते वर्ष आस्ता में दम्पति की हत्या कर दी गयी थी यह भी सर्वविदित है । ऐसा नहीं है कि पुलिस सुस्त है और अपराधी पकड़े नहीं जा रहे है।पुलिस एक्टिव होकर ऐसे मामलों को सुलझा रही है आरोपी गिरफ्तार भी हो रहे है लेकिन बावजूद इसके यह बात समझ से परे है कि अपराधी इतने बेखौफ कैसे हो गए ।


कानून का भय इन्हें छू तक नहीं रहा है। अभी राविवार को भी एक 18 साल के युवक की शहरी अंदाज में हत्या की खबर आई थी ।हांलाकि इस मामले में भी पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन अपराध के ग्राफ बेलगाम कैसे हो गए यह सवाल हर जषपुरिया के जेहन में तैर रहा है ।झारखण्ड क
के तर्ज पर यहाँ भी दहशतगर्दो के पौ बारह हो गए है।




इसी माह दोकड़ा में दम्पत्ति की हत्या के बाद विपक्ष ने पूरी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया था।विपक्ष के नेताओ ने कहा-जशपुर को अपराधपूर बनाया जा रहा है ।एक एक करके भाजपा के हर बड़े नेताओ ने जिले की कानून व्यस्था पर तंज कसे ।अभी उस मामले से उबरे भी नही थे कि आज फिर से एक महिला को गोली मारकर हत्या कर दी गयी। जाहिर है विपक्ष फिर से मुखर होगा और सरकार की फिर से किरकिरी होगी।



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राजनीति से परे हटकर भी सोंचे तो यह भी एक सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर महिलाये ही क्यों निशाने पर है।लगातार महिलाओ की ही हत्या हो रही है । दैहिक शोषण के मामले यहाँ पहले से आते रहे है ।गैंग रेप जैसे मामलों में कई बार विपक्ष मुखर हो चुका है । विपक्ष को यह बोलने का मौका तो मिल ही गया कि महिलाएं असुरक्षित है।पहले आबरू पर शामत आती थी अब महिलाओं के जान पर भी सामत आ गई है ।


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