जशपुर मुनादी।। आदिम जाति विकास विभाग में हुई फर्जी नियुक्ति के मामले में विभागीय कार्रवाई के अलावे राजनीति भी जमकर हो रही है। कांग्रेस विधायक से लेकर भाजपा के सांसद तक इस मामले में एक होकर फर्जीवाड़े में संलिप्त लोगो के विरुद्ध एफआईआर करवाने में जुट गए है ।इस मामले में कहीं न कहीं जशपुर जिले के तात्कालीन सहायक आयुक्त संतोष वाहने को दोषी मानकर राजनीतिक दल उन्ही पर निशाना साधने में लगे है ।लेकिन इस बीच संतोष वाहने ने भी मुनादी डॉट कॉम से दूरभाष पर बात की और अपना पक्ष रखा ।संतोष वाहने फिलहाल कोरबा जिले में पदस्थ हैं।
उन्होंने मुनादी डॉट कॉम से फोन पर औपचारिक रुप से अपना पक्ष रखते हए बताया है कि इस फर्जी नियुक्ति के मामले में उनकी कहीं कोई भूमिका नहीं है।जबतक वह जिले में पदस्थ थे तबतक इस तरह की कोई बात सामने नहीं आयी थी और जैसे ही उनका तबादला हुआ उनके विरुद्ध षड्ययन्त्र रचा गया और विभाग के ही कर्मचारियों से कूट रचना कराकर उंन्हे फंसाया जा रहा है ।इस मामले की उंन्हे जैसे ही जानकारी मिली उन्होंने तात्कालीन कलेक्टर महादेव कावरे को लिखित में बताया कि जिस नियुक्ति आदेश को लेकर उनके विरुद्ध आरोप लगाए जा रहे हैं उस नियुक्ति पत्र में न तो उन्हें हस्ताक्षर हैं न ही उन्होंने इस तरह के कोई आदेश जारी किए।उन्होंने बताया-"मैने कलेक्टर को लिखित में दिया है और स्वयं इसकी जांच कराने की मांग की है ।कम्यूटर टेक्नोलॉजी दुरुपयोग करते हुए मेरे हस्ताक्षर से छेड़छाड़ की गई है ।"
उन्होंने आगे कहा कि जिन अभ्यर्थियों ने जिनको पैसे दिए है सीधे उनसे बुलाकर पूछताछ करनी चाहिए ।जिन्होंने पैसे लिए उनसे पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है।उनसे पूछताछ न करके सीधे एक आदमी को टारगेट करना यह बताता है कि इस मामले में कार्रवाई की मंशा नही है बल्कि कुछ लोग अपना खुन्नस निकाल रहे है । उ होने यह भी बताया कि जिन नियुक्ति पत्रों को लेकर इतना बड़ा बखेड़ा खड़ा किया जा रहा है ऐसे नियुक्ति पत्रों के आधार पर 2007 से ही नियुक्तियां हो रही है और लोग अभी भी काम कर रहे है ।उन नियुक्तियो की जाँच क्यों नहीं की गई । उन्होंने एक बात और कही जो कि काफी अहम है।ऊन्होने बताया कि नियुक्ति पत्रों के कई ऐसे लिफाफे मिले है जो जिले के नामचीन जनप्रतिनिधियों के नाम के है ।
आपको बता दें कि आदिवासी विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति दिए जाने का झांसा देकर 1 से 3 लाख रूपए तक की मांग की गयी थी। पीड़ितों के अनुसार उन्होनें इस मांग की गई राशि को सम्बंधित लोगों को दे भी दिया और उंन्हे नियुक्ति पत्र भी मिल गया।नियुक्ति पत्र के आधार पर उंनसे 2 माह तक काम भी कराए गए लेकिन एक दिन अचानक उंन्हे पता चलता है कि उनके नियुक्ति आदेश फर्जी है और मंडल संयोजक ने उन्हें काम पर आने से मना कर दिया।इसके बाद न तो उन्हें 2 माह के वेतन दिये गए न ही नियुक्ति के एवज में लिए गए रुपये लौटाए गए।बीते वर्ष इस मामले का खुलासा होने के बाद मामले की जांच शुरू हो गयी ।संसदीय सचिव यूडी मिंज ने भी इस मामले को गम्भीर बताते हुए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने की बात कही थी लेकिन अभी तक इस मामले में न तो जांच पूरी हुई न ही किसी तरह का कोई एफआईआर हुआ ।अब इस मामले की जांच भाजपा द्वारा गठित जांच टीम कर रही है।सांसद गोमती साय के अगुवाई में सोमबार को एक जांच टीम जशपुर में थी ।भाजपा जांच दल द्वारा पीडितो के बयान लिए गए ।