जशपुर मूनादी ।। जिले के कुम्हार समाज का चक्र पूजा खत्म हुए कई महीने हो गए मगर चक्र पूजा के दौरान शासन से मिले दो लाख रुपये के चेक का चक्र अभी भी घूम रहा है और इस चक्र के चक्कर मे समाज के बड़े नेता और माटी कला बोर्ड के अध्यक्ष बुरी तरह फँसते नज़र आ रहे है।



मामला नवंबर महीने में जिले के नारायणपुर में आयोजित विशेष चक्र पूजा से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि शासन की ओर से कुम्हार समाज के लिए दो लाख रुपये की अनुदान राशि जारी की गई थी। लेकिन रकम समाज के खाते में जाने के बजाय कथित तौर पर माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष शम्भूनाथ चक्रवर्ती के निजी खाते में पहुंच गई।समाज के लोगो को जब इसकी भनक लगी तो समाज मे बवाल मच गया और सवाल ये उठने लगे कि अगर रकम समाज के लिए थी, तो समाज को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?यही सवाल अब पूरे कुम्हार समाज में हलचल पैदा कर रहा है।मामले की भनक समाज के लोगों को लगी तो सामाजिक व्हाट्सएप ग्रुपों में सवालों की ऐसी बौछार शुरू हुई कि दो लाख रुपये का हिसाब-किताब देखते-देखते सामाजिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया।समाज के कुछ लोगों का आरोप है कि उन्हें अंधेरे में रखकर शासन से अनुदान राशि ली गई और समाज को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। कुछ लोगों ने इसे समाज के साथ दगाबाजी तक करार दिया है।
मूनादी डॉट कॉम को समाज के सूत्रों से मिले व्हाट्सएप ग्रुप के स्क्रीनशॉट्स में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। यानी दो लाख की रकम छोटी जरूर है, लेकिन सवाल बड़े-बड़े खड़े हो गए हैं।हालांकि इस पूरे विवाद पर माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष शम्भूनाथ चक्रवर्ती का अपना पक्ष बिल्कुल अलग है।मूनादी डॉट कॉम से दूरभाष पर बातचीत में उन्होंने कहा कि दो लाख रुपये की राशि का उनके पास पूरा हिसाब है। उनका कहना है कि उन्होंने समाज के लोगों को हिसाब बताने के लिए बुलाया था, लेकिन कोई नहीं आया।
अध्यक्ष ने यह भी कहा कि कुछ लोग उनकी छवि खराब करने के लिए बेवजह आरोप लगा रहे हैं और उनके सारे आरोप निराधार हैं।समाज जब चाहे मैं रकम का हिसाब देने को तैयार हैं।
सवाल है कि सरकार ने पैसा किस उद्देश्य से दिया था? पैसा किस खाते में जाना था? अगर पैसा निजी खाते में गया तो उसकी वजह क्या थी? और उस रकम का इस्तेमाल आखिर किस मद में हुआ?
क्योंकि सरकारी पैसा हो या समाज का पैसा—हिसाब साफ हो तो सवाल भी जल्दी खत्म हो जाते हैं।
लेकिन यहां तो मामला कुछ ऐसा है कि चक्र पूजा खत्म हो गई, मगर दो लाख रुपये का चक्र अभी भी घूम रहा है!
अब समाज हिसाब मांग रहा है और अध्यक्ष कह रहे हैं कि हिसाब उनके पास तैयार है।


तो फिर इंतजार किस बात का?हिसाब सामने आए, सवाल खत्म हों और दो लाख रुपये की पूरी कहानी साफ हो, आखिर मामला समाज के भरोसे का जो है।