रायगढ़ मुनादी।। रामधारी सिंह दिनकर की कालजयी कृति रश्मिरथी की प्रसिद्ध पंक्तियाँ —“दम ठोंक ठेलता है जब नर, पर्वत के जाते पांव उखड़।जब मानव जोर लगाता है, पत्थर पानी बन जाता है।”आज Raigarh की पुलिसिंग पर बिल्कुल सटीक बैठती दिखाई देती हैं। जिले में Shashimohan Singh के पदभार संभालने के बाद अपराध, सट्टा और अवैध कारोबारों के खिलाफ जिस तरह की लगातार और आक्रामक कार्रवाई हुई है, उसने अपराध जगत में खलबली मचा दी है।
जिस शहर में कभी खुलेआम सट्टा-पट्टी की दुकानें संचालित होने लगी थीं, वहां अब बड़े-बड़े सटोरिये गिरफ्तार हो रहे हैं। कई अपराधी खुद थाने पहुंचकर आत्मसमर्पण करने लगे हैं। रायगढ़ पुलिस की हालिया कार्रवाई को जिले के अब तक के सबसे बड़े सट्टा विरोधी अभियानों में से एक माना जा रहा है।
एक करोड़ नगद के साथ बड़े सटोरिये गिरफ्तार
हाल ही में रायगढ़ पुलिस को बड़ी सफलता तब मिली जब पुलिस ने लगभग एक करोड़ रुपये नकद रकम के साथ तीन बड़े सटोरियों को गिरफ्तार किया। सामान्य तौर पर “आसान जमानत वाले अपराध” माने जाने वाले सट्टा नेटवर्क पर इस बार ऐसी सख्ती दिखाई गई कि पूरे गिरोह में भय का माहौल बन गया है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार लगातार निगरानी, दबिश और नेटवर्क तोड़ने की रणनीति के कारण अब कई आरोपी खुद सामने आने लगे हैं। शहर में संगठित अपराधों के खिलाफ चल रही कार्रवाई को पुलिस की निर्णायक रणनीति माना जा रहा है।
कबाड़ के साम्राज्य पर भी बड़ी कार्रवाई
Raigarh लंबे समय से झारखंड, ओड़िशा और छत्तीसगढ़ के बड़े कबाड़ केंद्र के रूप में पहचाना जाता रहा है। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा लंबे समय से रही कि यहां अवैध कबाड़ का कारोबार सैकड़ों करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। आसपास के राज्यों से कबाड़ लाकर यहां खपाया जाता था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले कबाड़ कारोबार से जुड़े लोगों का प्रभाव इतना बढ़ चुका था कि उनके खिलाफ कार्रवाई मुश्किल मानी जाती थी। लेकिन एसपी शशिमोहन सिंह के कार्यभार संभालने के बाद अवैध कबाड़ कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चलाया गया। परिणाम यह हुआ कि शहर में खुलेआम संचालित होने वाला यह नेटवर्क लगभग ठप होता दिखाई दे रहा है
आदतन अपराधियों की परेड और सीधा संदेश
होली के अवसर पर एसपी शशिमोहन सिंह ने जिले के आदतन और निगरानीशुदा अपराधियों को बुलाकर सख्त चेतावनी दी थी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा:
> “यदि तुम लोगों का इतिहास है, तो मेरा भी इतिहास है। मैं अपराध बर्दाश्त नहीं करता।”
इस चेतावनी को पुलिस की आगामी रणनीति का संकेत माना गया। इसके बाद शहर में अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई और निगरानी तेज कर दी गई।
“मैं वर्दी का रागी हूं”
Shashimohan Singh केवल पुलिस अधिकारी ही नहीं, बल्कि साहित्य और कला से भी गहरा जुड़ाव रखते हैं। वे कवि, लेखक और कलाकार के रूप में भी पहचान रखते हैं तथा छत्तीसगढ़ी और भोजपुरी फिल्मों में अभिनय भी कर चुके हैं।
उनकी लिखी कविता “मैं वर्दी का रागी हूं” उनके व्यक्तित्व और कार्यशैली की झलक मानी जाती है। वे अक्सर कहते हैं कि पुलिस का वास्तविक उद्देश्य केवल अपराध दर्ज करना नहीं, बल्कि समाज में सुरक्षा का विश्वास पैदा करना और सामाजिक बुराइयों को जड़ से समाप्त करना है।
रायगढ़ में हाल के दिनों में दिखाई दे रही सख्त पुलिसिंग को कई लोग उसी दृढ़ इच्छाशक्ति और स्पष्ट संदेश का परिणाम मान रहे हैं।