जशपुर मूनादी।।कुनकुरी इन दिनों राजनीति का प्रदर्शनी बना हुआ है। ऐसी प्रदर्शनी जिसे लोग ताज्जुब की नजरों से देख रहे हैं। लोगो को समझ नहीं आ रहा है कि आखिर यह सब हो क्या रहा है ?



जैसा कि मूनादी डॉट कॉम न कुछ दिनों पहले यह बताया था कि कुनकुरी में बीजेपी v/s बीजेपी की रणभेरी बज चुकी है । काँग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार में काँग्रेस सरकार और जिले के कांग्रेसी विधायको के छक्के छुड़ा देने वाली बीजेपी सोशल मीडिया के महारथी कहे जाने वाले विवेकानन्द झा ने नई टीम बनाकर इस बार सीधे भाजपा के उपर हल्ला बोल दिया । इस बात का हल्ला तो दो महीने से हो रहा था लेकिन 2 दिन पहले मामला तब और गरमा गया जब भाजपा आईटी सेल की प्रदेश कार्य समिति सदस्य हेमा दीवान की एक शिकायत पर कुनकुरी पुलिस ने विवेकानन्द झा के विरुद्ध अपराध दर्ज कर लिया । भाजपा के लोगो का आरोप है कि मोदी की गारंटी पर सवाल उठाते उठाते विवेकानन्द झा ने आईटी सेल की हेमा दीवान के लिए कथित तौर अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर दिया था ।
Fir में क्या है ? Fir के बाद क्या होगा? कौन सही है या कौन गलत ? चर्चा इसकी हो ही नहीं रही है बल्कि चर्चा इस बात की छिड़ी हुई है कि संगठित, और अनुशासित कहे जानी वाली भाजपा के भीतर ही मारा मारी की स्थिति कैसे निर्मित हो गई ? भाजपा के होकर भाजपा पर हमला हो या भाजपा के लोग भाजपा के ही नेता के खिलाफ थाने पहुंच जाए दोनों परिस्थियां हैरान कर देने वाली है और सबसे ज्यादा हैरत में डालने वाली बात ये है कि विवेकानन्द झा के विरुद्ध यह कोई पहली शिकायत या fir नहीं है। बीते 2018 से 2023 के बीच तात्कालीन काँग्रेस की सरकार और काँग्रेस के विधायकों का हर दिन बखिया उधेड़ने के चलते काँग्रेस सरकार में भी इनके विरुद्ध कई सारी शिकायते या fir हो चुकी है तब इन्हें भाजपा का सायबर योद्धा कहा जाता था लेकिन अब सवाल यह है जो राजनीति से ताल्लुक रखने वाला हर सख्श पूछ रहा है कि भाजपा का सायवर योद्धा अपनी ही सरकार की खिलाफत में क्यों उतर आया? और इससे बड़ा सवाल ये कि भाजपा जैसी बुद्धिजीवियों की पार्टी और संघ जैसे विद्वान लोगो के इतने बड़े संगठन में कोई ऐसा नहीं बचा जो संगठन से भटके एक व्यक्ति की घरवापसी करा सके ?


कूल मिलाकर कुनकुरी की राजनीति में तेजी से घटित हुई इन घटनाक्रमो ने राजनीति के जानकारों के होश उड़ा दिए हैं । इन सियासी परिस्थितियों को लेकर इन दिनों सबसे ज्यादा कोई मजे में है तो वो है काँग्रेस ।काँग्रेस भाजपा के भीतर चल रहे सिर फुटौव्वल का खूब मजे ले रही है और भाजपा की इस आपसी लड़ाई में काँग्रेस को सुनहरा भविष्य भी दिख रहा है इसलिए इस लड़ाई में कांग्रेस की ओर से कोई रिएक्शन नहीं आ रहा है । काँग्रेस इस लड़ाई में कूदकर भाजपाईयों को संगठित होने का कोई मौका नहीं देना चाहती।