जशपुर मुनादी।। जिले के सबसे बड़े जिला अस्पताल में हुए 12 करोड़ के बहुचर्चित मामले का जिन्न एकबार फिर से जाग गया है।इस मामले में निलंबित किये गए तात्कालीन सिविल सर्जन और 2 डॉक्टरों को फिर से बहाल कर दिया गया है ।इनकी पुनर्बहाली की खबर आते ही इस मुद्दे को काफी ऊंचाई तक ले जाने वाले नेताओं ने सरकार और सरकार के सिस्टम को कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है।
जिले के बहुचर्चित अस्पताल घोटाले में संलिप्त लोगो के खिलाफ अभी तक कानूनी कार्रवाई की मांग का सिलसिला जारी ही था कि सोमबार को निलंबित किये गए 3 डॉक्टरों का निलंबन भी सरकार ने रद्द कर दिया और तीनों को बहाल कर लिया गया।जिला अस्पताल के तात्कालीन सिविल सर्जन एफ खाखा,डॉ अनुरंजन टोप्पो और उषा प्रेमी लकड़ा को 31 मई को फिर से बहाल किये जाने के आदेश की कॉपी जैसे ही किसी एक के हाथ लगी कॉपी कॉपी सोशल मीडिया में वायरल होने लगा । लोग इस बहाली को भ्र्ष्टाचार की पराकाष्ठा और बदहाल व्यवस्था बताने में लग गए हैं।बीजेपी विंग के लोग जोर शोर से इस मुद्दे को फिर से उछालने में लग गए है हांलाकि कांग्रेस के कुछ लोग भी सोशल मीडिया में इस बहाली पर भड़ास निकालने से नहीं चूक रहे।
दरअसल इसी हप्ते सीएम जिले की जनता से भेंट मुलाकात करने जशपुर आने वालेहै। ऐसे में भाजपा बैठे बैठाए मिले इस बड़े मुद्दे को हाथ से जाने देने के पक्ष में नहीं है इसलिए भाजपा सोशल मीडिया विंग इस मुद्दे पर हॉबी हो गया है और सिस्टम का छिछा लेदर करने में जुट गया है ताकि सीएम के आने पर सीएम को यह पता चल सके कि जिले में क्या हो रहा है ।
खाश बात यह है कि 12 करोड़ के घोटाले में शामिल डॉक्टरों के विरुद्ध एफ आई आर सहित अन्य कानूनी कार्रवाई करने की पैरवी करने में काँग्रेस के कुछ नेता भी शामिल थे । इस मसले को लेकर एक कांग्रेसी नेता ने कलेक्टोरेट के सामने धरने पर बैठने का एलान करके पूरे प्रशासन को साँसत में डाल दिया था हांलाकि बाद में मामला सुलझ गया लेकिन अब जब जिले में सीएम का दौरा होने वाला है और ठीक दौरे के कुछ दिन पहले बहुचर्चित घोटाले में शामिल डॉक्टरों की बहाली कर दी गयी है तो ऐसे में राजनीति न हो भला ऐसे कैसे हो सकता है ।
हांलाकि शासन द्वारा जारी किए गए तीनो डॉक्टरों की पुनर्बहाली के कारण भी दर्शाए गए हैं। आदेश में बताया गया है कि जिले में चिकित्सकीय सुविधा को सुचारू रूप से चलाने के उद्देश्य से डॉक्टरों को फिर से बहाल कर दिया गया है।घोटाले की विभागीय जांच चल रही है और जाँच में काफी समय लगने के कारण जिले का चिकित्सकीय कार्य प्रभावित न हो इस लिहाज से इनके पुनर्बहाली को जरूरी बताया गया है।