जशपुर मुनादी ।। संगठन खड़ा करने से पहले ही अगर खींचतान शुरू हो जाए, तो सवाल सिर्फ नेतृत्व पर नहीं… पूरी व्यवस्था पर उठता है।” जशपुर में कुछ ऐसा ही हो रहा है । भाजयुमो के जिलाध्यक्ष तो बना दिये गए लेकिन जिले की कार्यकरणी बनाने में सभी के पसीने छिटक जा रहे हैं। संगठन के भीतर और बाहर इतने गुट हैं कि हर गुट का कार्यकर्ता बड़ा पद चाह रहा है और जिन्हें पद से मोह मतलब नहीं है वो अपने करीबो को पद दिलाने में लगे इसी चक्कर मे कार्यकारिणी की सूची कई बार बनी लेकिन जब भी सूची बनती है मुकाम तक नहीं पहुँच पाती ।
जशपुर की राजनीति में यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है और भाजयुमो कार्यकर्ताओं में बेचैनी बढ़ी हुई है ।खाशकर वो ज्यादा बेचैन हो रहे हैं जिन्हें संगठन में बड़ा पड़ या बड़ी जिम्मेदारी देने का भरोसा मिल गया था लेकिन जिस हिसाब से अनरखाने में राजनीति की खिचड़ी पक रही है और अंदर ही अंदर तिकड़म चल रहा है उस हिसाब से मामले को फ़रियाने में अभी एकाध महीने और लग जाएंगे
लेकिन इन सब के बीच एक बड़ा सवाल ये है कि संगठन के जिलाध्यक्ष विजय आदित्य जूदेव पर आखिर किसका दबाव है ? या फिर जो कुछ सामबे में दिख रहा है वो भी राजनीति है ।