जशपुर मुनादी।। बीते 28 जून को बटईकेला में सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत के बाद जिले के हेल्थ सिस्टम पर फिर से सवाल खड़े होने लगे हैं। कहा जा रहा है कि सड़क दुर्घटना में घायल युवक को आननं फानन में कांसाबेल अस्पताल लाया गया लेकिन डॉक्टरों की लापरवाही और मनमानी के चलते युवक की मौत हो गयी । डॉक्टरों की लापरवाही की इससे बड़ी पराकाष्ठा और क्या होगी कि दुर्घटना के बावजूद अस्पताल के द्वारा न तो पूलिस को सूचना दी गयी न ही उंसके मरने के बाद मृतक का पोस्टमार्टम ही कराया गया।
दुर्घटना में मृत युवक रूपक शर्मा के भाई दीपक शर्मा के द्वारा जिले के कलेक्टर को इस बाबत एक आवेदन देकर कलेक्टर को डॉक्टरों की लापरहियो का एक एक ब्यौरा बताते हुए लिखा है कि डॉक्टरों ने उसके भाई को सिर में गम्भीर चोटें आने के बावजूद उसे बगैर उचित ईलाज के रात भर अज़्प्ताल में रखा और जब उसकी हालत बिल्कुल नाजूक हो गयी तो सुबह सुबह उसे अंबिकापुर रेफर कर दिया गया जहाँ रास्ते मे ही उसकी मौत हो गयो।
मृतक के भाई ने यह भी लिखकर दिया है कि मृतक जब घायल अवस्था मे अज़्प्ताल आया था तब इसकी सूचबा अज़्प्ताल वालों ने पुलिस को नहीं दी जिसके चलते घर के लोगों को भी दुर्घटना की जानकारी नहीं मिल पाई और जब अस्पताल ले जाते जाते रास्ते मे उसकी मौत हो जाती है तब मृतक का पिस्टमार्टम भी नहीं कराया गया ।
मृतक के भाई ने कलेक्टर से निवेदन किया है कि उसके भाई मृतक रूपक शर्मा की जान जिन डॉक्टड और असप्ताल के जिम्मेदार कर्मचारियों की लापरवाही के कारण गयी है उनके विरुद्ध कठोर से कठोर कार्रवाई की जाय ।
इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर सियासत शुरू हो गयी है । इस मामले में भाजपा की ओर से तो नहीं लेकिन कांग्रेस से जुड़े हुए लोग मृतक के परिजनों के समर्थन में आ गए है और डाक्टर और जिम्मेदार अन्य लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।युवक काँग्रेस के पदाधिकारियों के द्वारा यह कहा जा रहा है कि असप्ताल प्रबंधन को यह याद रखना चाहिए कि युवक कांग्रेस के लोग आंदोलन करना भूले नहीं है याने कभी भी इस मसले को लेकर हंगामा खड़ा हो सकता है ।
युवक काँग्रेस के जिलाध्यक्ष रवि शर्मा का कहना है कि असप्ताल प्रबंधन के पास ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि उन्होंने एमएलसी केस होने के बाद भी पुलिस को सूचना देने की जरूरत महसूस नहीं की और दूसरी बड़ी बात ये कि मृतक का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया ?
इस पूरे मामले में जब हमने कांसाबेल बीएमओ संध्या टोप्पो से बात की तो उन्होंने परिजनों और सोशल मीडिया में चल रहे सारे आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि डॉक्टरों की लापरवाही के आरोप सरासर गलत है क्योंकि अगर डॉक्टर नहीं होते ,घायल का ईलाज नहीं होता तो घायल को रेफर कैसे किया जाता ।घायल के सिर में काफी चोट आई थी जब लगा कि यहाँ ईलाज सम्भव नहीं है तो उसे 29 तारीख की सुबह रेफर कर दिया गया और रास्ते मे ही उसकी मौत हो गयी। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के लिए घर के लोग ही तैयार नहीं हुए इसलिए पोस्टमार्टम नहीं हो पाया ।