ये आंकड़े आपका हलक सुखा देंगे, कोरोना पीरियड के बाद लाखों लोगों ने की आत्महत्या, ज्यादातर ने लगाई फांसी, हर चौथा मृतक ..……….पढ़िए पूरी खबर

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September 06, 2022



ये आंकड़े आपका हलक सुखा देंगे, कोरोना पीरियड के बाद लाखों लोगों ने की आत्महत्या, ज्यादातर ने लगाई फांसी, हर चौथा मृतक ..……….पढ़िए पूरी खबर

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डेस्क मुनादी।। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो एनसीआरबी ने अपना 53 वा संस्करण जारी किया है। रिपोर्ट के अनुसार 2021 में भारत देश में 1 लाख 64 हजार 33 लोगों ने आत्महत्या की।  आत्महत्या करने वालों में हर चौथा व्यक्ति दिहाड़ी मजदूर था। इनमें भी ज्यादातर ने फांसी लगाकर आत्महत्या की। आत्महत्या करने वालों में 18 से 30 साल के युवा सबसे ज्यादा हैं। 


आजादी के अमृत महोत्सव में देश के प्रधानमंत्री ने भारत की श्रमशक्ति और मजदूरों के नाम कई संदेश दिए थे।  अधिकतर में प्रधानमंत्री ने यही बताने और जताने की कोशिश की थी की किसी भी विकसित राष्ट् के निर्माण में श्रमशक्ति कितना महत्वपूर्ण है। भारत को एक बार फिर से विकसित देश बनाने में श्रमशक्ति का सबसे बड़ा योगदान होगा। लेकिन इस संदेश के कुछ ही दिनों बाद राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो एक रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट भारत में हो रही आत्महत्याओं  के विश्लेषण पर था।  रिपोर्ट में यह बताया गया था कि भारत में हर वर्ष प्रति लाख व्यक्तियों में 12 व्यक्ति आत्महत्या कर रहे हैं।  इन 12 व्यक्तियों में हर चौथा व्यक्ति दिहाड़ी मजदूर है। दिहाड़ी  मजदूरों ने परिवारिक समस्या, अलगाव की भावना, दुर्व्यवहार, हिंसा शराब की लत जैसी परेशानियों के कारण आत्महत्या कर ली। आत्महत्या करने वाले अधिकतर लोगों ने फांसी के फंदे पर या फिर जहर सेवन कर आत्महत्या की। आत्महत्या आत्महत्या करने वालों में केवल मजदूर नहीं है बल्कि बेरोजगार, बीमारी से परेशान, कर्ज से परेशान, परिवारिक कारणों से परेशान भी शामिल है लेकिन सबसे दुखद यह है कि सबसे बड़ी संख्या दिहाड़ी मजदूरों की है। जिन्हें न कभी बेहतर शिक्षा मिल पाई। N स्वास्थ्य सुविधाएं मिली। ना दो वक्त का खाना नसीब हुआ।  बची जिंदगी भी इन परेशानियों के कारण समाप्त हो गई। 


भारत की श्रम शक्ति घट रही

हाल ही में आई सेंट्रल फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी ने एक रिपोर्ट जारी की थी। जिसमें बताया गया था। 2016 में भारत में श्रम शक्ति दर 47% से घटकर  40% रह गई है। प्रधानमंत्री ने अपने अमृत काल के संदेश में यह भी कहा था कि मजदूरों को दिया जाने वाला उपकर 38000 करोड रुपए राज्य सरकारों ने नहीं दिए। केंद्र और राज्य दोनों की ही हजारों योजनाएं श्रमिकों के कल्याण के लिए चलाई जा रही है लेकिन लाभ एक को भी नहीं मिल पा रहा है यही कारण है कि भारत की श्रम शक्ति लगातार गिरते जा रही है। 


गांव के मुकाबले शहरों में ज्यादा 

मजदूर शहर में ही होते हैं गांव में तो हर कोई मालिक होता है। यह कहावत काफी हद तक सही है एनसीआरबी द्वारा जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार देश के 53 बड़े शहरों में सर्वे किया गया था यहां मजदूरों की मौत के मामले सबसे ज्यादा थे शहरों में भी बीते वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 1% आत्महत्या करने वाले मजदूरों की संख्या बढ़ी है इन 53 शहरों में छत्तीसगढ़ के रायपुर और दुर्ग-भिलाई भी शामिल है। 


आत्महत्या के मामले में महाराष्ट्र नंबर वन 

आत्महत्या के मामलों में महाराष्ट्र पूरे देश में नंबर वन पर है। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 22 हजार 207 लोगों ने आत्महत्या की है। दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ का पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश है। तीसरे नंबर पर वेस्ट बंगाल, चौथे नंबर पर कर्नाटका है। उल्लेखनीय है कि मई 2020 में जब महाराष्ट्र से प्रवासी मजदूरों को भगाया जा रहा था। जब उन्हें सरकार से कोई मदद नहीं मिली तो वे पटरी के रास्ते ही घर आ रहे थे। इस दौरान औरंगाबाद के पास पटरियों पर सोए  16 मजदूरों को ट्रेन ने कुचल दिया था। 


ग्रेजुएट हो या अनपढ़ कोई नहीं  लड़ पाया जिंदगी से


आत्महत्या करने वालों में 11% अनपढ़ थे। जबकि 24% ने मैट्रिक पास की थी या उससे ऊपर की पढ़ाई की थी। इसी तरह लगभग 5% ऐसे थे जिन्होंने ग्रेजुएशन या उससे अधिक की पढ़ाई की थी लेकिन फिर भी वह वह जिंदगी की परेशानियों से नहीं लड़ पाए और आत्महत्या कर ली। 



 रायगढ़ शहर के हाल से समझिए क्या है दशा


इंडस्ट्रियल हब, कला धानी, संस्कारधानी नगरी के उपाधियों से नवाजे गए रायगढ़ में मजदूरों की दशा से आप बाकी जगहों के मजदूरों के हाल का आकलन कर ही सकते हैं।  असंगठित भवन निर्माण से जुड़े मजदूरों की संख्या जिले में लगभग 1 लाख 8 हजार है। इन मजदूरों की सुरक्षा और उनके लिए चलाई जा रही योजनाओं 40 से अधिक है। जिनमें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना अटल पेंशन योजना पीएम सुरक्षा योजना साइकिल मितान योजना सिलाई मशीन योजना। लेकिन इनमें शामिल हितग्राहियों की संख्या 70 हजार भी नहीं  है। यह आंकड़ा सन 2000 से लेकर अप्रैल 2022 तक का है। वर्तमान स्थिति तो और भी बद्तर है। 


ये आत्महत्या की वजह रही

 पैसे या कैरियर से संबंधित समस्याएं,मानसिक विकार अलगाव की भावना, दुर्व्यवहार, हिंसा, परिवारिक समस्या शराब की लत और वित्तीय नुकसान को बताया गया ।  हालांकि इन सभी कारणों में मजदूर के साथ परिवारिक समस्या और शराब की लत को जोड़ा जा रहा है।


परिवारिक समस्याएं(33.2%)

बीमारी। (18.6)

विवाह संबंधी समस्या(4.8%)


स्त्रोत -एनसीआरबी


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