जशपुर मुनादी।। कोरोना कि त्रासदी जैसे ही कम हुई, जशपुर कलेक्टर ने स्कूली बच्चों बच्चों के भविष्य को दृष्टिगत रखते हुए आदेश जारी किया कि सभी स्कूलों को खोला जाए। आदेश का परिपालन हुआ, पर अब स्कूलों की स्थिति शोसल मीडिया के माध्यम से भी सामने आने लगी है। स्थिति ऐसी की स्कूल अब प्यून और स्वीपर चला रहे हैं, क्योंकि शाला में शिक्षक ही नही हैं।
ऐसा ही एक पोस्ट कल बग़ीचा ब्लॉक सन्ना के करीब ग्राम पंचायत लोरो का सामने आया है, जहाँ वहाँ के उपसरपंच पति अरुण तिग्गा ने स्कूल की फ़ोटो और बच्चों के बैठे होने का है, और उपसरपंच ने यह लिखा है कि प्राथमिक शाला लोरो में तीन दिन से कोई टीचर नही आ रहा है, यहां स्कूल में 55 बच्चे हैं, बच्चों का देखभाल चापरासी और स्वीपर कर रहे हैं, बच्चों का पढ़ाई लिखाई नही हो पा रहा है।
अब यह तो व्यवस्था है, और हालात ऐसा की 55 बच्चों का भविष्य ही खतरे में दिखाई देने लगे। बात यह भी कि ये वही स्कूल है जहाँ बग़ीचा बीईओ के द्वारा कुछ दिनों पहले वहां की शिक्षिका को प्राथमिक शाला रौनी जो मुख्यालय के करीब है वहां अटैच कर दिया था, और स्कूल एकल शिक्षक हो गया था।
जिसको लेकर आक्रोशित सरपंच और ग्रामीण सीधे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंच गए थे, जिसके बाद जिला अधिकारी ने बग़ीचा बीईओ को फटकारते हुए आदेश निरस्त कर दिया था। पर बताया जा रहा है कि अभी तक उस आदेश का परिपालन नही हो सका है, वही दूसरा शिक्षक मेडिकल अवकाश में है, तो स्कूली शिक्षा "प्यून और स्वीपर" के भरोसे ही चलेगी।
स्कूल को लेकर फेसबुक में पोस्ट करने सरपँच पति अरुण तिग्गा से कई बार सम्पर्क करने की कोशिश की गई लेकिन कई बार फोन करने के बाद भी अरुण तिग्गा ने फोन नहीं उठाया ।जब हमारी बात लोरो ग्राम पंचायत के सचिव मंगतू राम से हूई तो उन्होंने बताया कि 2 दिनों से एक महिला शिक्षक को अटैच किया गया है ।और वह बुधवार से स्कूल आ रही है। स्कूल के रसोईया सुधीर ने बताया कि सोमबार और मंगलवार को कोई भी शिक्षक स्कूल में नही था ।एक शिक्षक हैं जिनकी तबियत खराब थी उन्होंने छुट्टी लिया हुआ

