19-February-2022


Watch video कोरोना भी कम हुआ और स्कूल भी खुल गए लेकिन गायब हो गए थाली से भोजन , जशपुर की सामने आई तस्वीरे ,तस्वीरें देखकर आप भी कहेंगे ये क्या हो रहा है…..



जशपुर मुनादी।। जिले में शिक्षा व्यवस्था के साथ साथ शिक्षा के प्रति रुझान पैदा करने के लिए मध्याह्न भोजन योजना की स्थिति भी चिंताजनक है। जिले के दूरस्थ क्षेत्र बगीचा के पाठ क्षेत्र के स्कूलों का जब जायजा लिया गया तो पता चला कि यहाँ मध्याह्न भोजन योजना भले ही कागजों में बेहतर तरीके से संचालित हो रही हो लेकिन जमीन पर इस योजना का बुरा हाल है ।

हमारे पास इस योजना से जुड़ी कुछ तस्वीरें आयी है जिसे देखने के बाद आप भी कहेंगे ये क्या हो रहा है ? जो तस्वीरें हम आपको बग़ीचा ब्लॉक की दिखाने जा रहे हैं, वो उस योजना के नाम से जाना जाता है, जिसको लेकर बड़े-बड़े दावे हैं। जिसको मिड डे मील या "मध्यान्ह भोजन" के नाम से जाना जाता है। पर जो तस्वीरें मुनादी के सहयोगियों के माध्यम से आज की आई है, वो इस योजना को सारे दावे को खोखला बता रही है।

आज हमने सहयोगियों के माध्यम से एक आदिवासी इलाके को चुना, जहां बहुतायत में पहाड़ी कोरवा भी रहते हैं, और वह क्षेत्र है बग़ीचा मुख्यालय से 12 किमी दूर रॉनी से लेकर कुरकुरिया तक का। जिसकी कुल दूरी 10 किमी थी। यहां से जब सफर सहयोगियों ने शुरू किया तो योजना को लेकर सड़क किनारे स्कूलों को ही देखा।

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पहली तस्वीर छिछली "र" हरिजनटोली की दिखी। वहां स्थिति तो उतनी अच्छी नही पर जो अन्य स्कूलों की स्थिति आई उसके मुकाबले संतोषजनक था। बच्चों को मध्यान्ह भोजन मिला था। पर जैसे ही पकरीटोली के गुरुकुल स्कूल के प्राथमिक और माध्यमिक शाला पहुंचे, वहां जो स्थिति थी, शिक्षिका द्वारा बताया गया अब तक स्कूल में मध्यान्ह भोजन की सामग्री नहीं दी गई, कोरोना काल से पहले जो थोडा बहुत सामग्री बचा था, उसी से काम जैसे तैसे चला रहे हैं। हमने बच्चों के भोजन को परखा तो पता चला कि कुछ केवल चावल लेकर बैठे हैं, तो कुछ को दाल, कुछ को सुकटी मिली है, जिससे बच्चे भोजन कर रहे हैं, या गटक रहे हैं।

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उससे आगे जब आगे बढ़े प्रा शा सरधापाठ में भोजन ही नही बना था। शिक्षिका ने बताया अकेले हूँ, रसोइया नही आया है, बच्चे देखते संभालते भोजन की व्यवस्था ही नही हो पाई। वही प्राथमिक स्कूल घोरडेगा के शिक्षक ने बताया कि कोरोना काल के थोड़ा बहुत कुछ बचे सामग्री से योजना का संचालन किया जा रहा है।

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पर जब प्राथमिक शाला कुरकुरिया पहुंचे तो वहां की शिक्षिका ने बताया आज सामग्री मिली है तो आज मध्यान्ह भोजन दिया जा रहा है, 11 से 17 तारिख तक सामग्री नही होने से मध्यान्ह भोजन बंद था। वहीं जब प्राथमिक शाला मालिकापाठ पहुंचे तो रसोइया ने बताया कि कल शाम सामग्री मिली है इसलिए आज से मध्यान्ह भोजन बनना प्रारम्भ हुआ है। अब तक सामग्री नही होने से मध्यान्ह भोजन बंद था।

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इन तस्वीरों को देखकर समझा जा सकता है कि दूरस्थ अंचलों में इतनी बड़ी योजना का क्या हाल है।इस योजना को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए पंचायत से लेकर शिक्षा विभाग तक को लगाया गया है लेकिन समझ से परे है कि इतने सारे तंत्र होते हुए भी योजनाओं का धरातल पर बुरा हाल है।

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बहरहाल यह कोई पहली तस्वीर नही है इससे पहले भी इस तरह की तस्वीरे सोशल मीडिया में उजागर हो चुकी है । इस प्रकार की खामियों के लिए जिम्मेदार कौन सा तंत्र है यह तय करने की जरूरत है।

इस मामले में हमने पंचायत के सचिवों से भी बात चीत की ।कमल नारायण यादव सचिव सरधापाठ ने बताया कि मुझे सूचना मिली कि रसोइया की अनुपस्थिति के कारण प्राथमिक शाला में सरधापाठ में मध्याह्न भोजन बच्चों को नहीं मिला है तो मैंने रसोइया को निर्देशित किया है, कि बिना किसी पूर्व सूचना से शाला न छोड़ें, अपरिहार्य कारणों पर पांचायत को सूचना देने पर ही छुट्टी ले। वहीं गुरुकुल प्राथमिक और माध्यमिक शाला के लिए कहा कि मैंने समूह से संपर्क किया था, पर समूह द्वारा बताया कि बीईओ ऑफिस से आबंटन प्राप्त नही हुआ है। जिस पर बीईओ ऑफिस को सूचना दी जा रही है। जल्द ही बच्चों को पूरा भोजन मिलने लगेगा।

https://youtu.be/0N9kv3qxoWU


कुरकुरिया के सचिव मानिकचन्द ने बताया कि प्राथमिक शाला मालिकापाठ और प्राथमिक शाला कुरकुरिया में 11 फरवरी से 17 फरवरी तक मध्यान्ह भोजन बन्द रहा है, जिसका कारण समूहों ने बीईओ कार्यालय से आबंटन की लेटलतीफी को बताया है। अब बच्चों को मध्यान्ह भोजन मिल रहा है, तथा इस संबंध में जनपद कार्यालय को सूचना दी जा रही है, ताकि आबंटन में इस तरह की लेटलतीफी न कि जाए।













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